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सरकारी बैंकों को और मिलेंगे 4500 करोड़

नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। सरकारी क्षेत्र के बैंकों को मजबूत बनाने के लिए विश्व बैंक से आर्थिक मदद आगे भी मिलती रहेगी। पिछले वित्त वर्ष के दौरान विश्व बैंक ने भारत सरकार को इस काम के लिए दो अरब डालर [लगभग 9000 करोड़ रुपये] दिए थे। जबकि चालू वित्त वर्ष के दौरान एक अरब डालर [लगभग 4500 करोड़ रुपये] देने पर विचार किया जा रहा है।

दरअसल, वर्ष 2008 की वैश्विक मंदी के बाद विश्व बैंक ने एक बार फिर से भारत सरकार के लिए अपने खजाने के दरवाजे खोल दिए हैं। जुलाई, 2009 से जून, 2010 के बीच विश्व बैंक ने भारत को 9.3 अरब डॉलर की वित्तीय मदद पहुंचाई है जो इसके पिछले वर्ष की तुलना में लगभग साढ़े तीन गुना है।

इसके साथ ही भारत विश्व बैंक से सबसे ज्यादा आर्थिक मदद पाने वाला देश बन गया है। विश्व बैंक ने जुलाई, 2009 से जून, 2010 के बीच जितनी वित्तीय मदद दी है उसका 15 फीसदी भारत को दिया है। ंिवश्व बैंक के भारतीय संचालन के निदेशक रॉबर्टो जाघा का कहना है कि भारत ने जिस तरह से वैश्विक मंदी से निपटने की रणनीति अपनाई है उससे दुनिया के अन्य देशों की अर्थव्यवस्थाओं को भी फायदा पहुंचा है। यही कारण है कि विश्व बैंक ने भारत को वित्तीय मदद देने में ज्यादा दरियादिली दिखाई है। दूसरे स्थान पर मेक्सिको है जिसे कुल वित्तीय मदद का 11 फीसदी मिला है। दरअसल, विश्व बैंक ने भारत सहित अन्य विकासशील देशों को भी अपनी मदद बढ़ा दी है।

जाघा ने बताया कि अगले वित्त वर्ष यानी जुलाई, 2010 से जून, 2011 के बीच भी भारत को लगभग इतनी ही राशि दिए जाने की संभावना है। इसमें बैंकों के लिए दी जाने वाली राशि के अलावा पूर्वी क्षेत्र में रेलवे माल गलियारा बनाने को वित्तीय मदद देने के भी एक प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है। यह परियोजना तीन चरणों में लागू की जानी है। पहले चरण में खुर्जा से कानपुर के बीच विशेष रेलवे ट्रैक बिछाया जाएगा। विश्व बैंक पहले चरण की परियोजना के लिए एक अरब डॉलर देने पर विचार कर रहा है। संकेत है कि इस प्रस्ताव को भी शीघ्र ही मंजूरी दे दी जाएगी।

इसके अलावा विश्व बैंक गंगा की सफाई के लिए भी भारी रकम उपलब्ध कराने के एक प्रस्ताव पर विचार कर रहा है। इसके लिए भी एक अरब डॉलर दिए जाने की संभावना है। जाघा ने बताया कि इस राशि से गंगा के तट पर बसे लगभग 40 करोड़ लोगों का भला होगा। इसके अलावा विश्व बैंक शहरी क्षेत्रों में यातायात सुविधा को बेहतर बनाने के लिए भी कुछ अतिरिक्त धन भारत सरकार को उपलब्ध कराने पर विचार कर रहा है।