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सरकारी स्कूल फेल नहीं हुए, इन्हें चलाने वाली सरकारें फेल हुई हैं- जावेद अनीस

शिक्षा का अधिकार क़ानून (आरटीई) लागू हुए 9 साल पूरे हो चुके हैं लेकिन आज की स्थिति में 90 फीसदी से अधिक स्कूल आरटीई के मानकों पर खरे नहीं उतरते हैं. इस दौरान सरकारी स्कूलों की स्थिति और छवि दोनों ख़राब होती गई है.

इसके बरक्स निजी संस्थान लगातार फले-फूले हैं. इससे पता चलता है कि क़ानून होने के बावजूद भी सरकारें इसकी ज़िम्मेदारी उठा पाने में नकारा साबित हुई हैं. अब वे स्कूलों को ठीक करने की अपनी ज़िम्मेदारी से पीछे हटते हुए इन्हें भी बंद करने या इनका मर्जर करने जैसे उपायों पर आगे बढ़ रही हैं.

दरअसल सरकारी स्कूल फेल नहीं हुए हैं बल्कि यह इसे चलाने वाली सरकारों और उनकी सिस्टम का फेलियर है. तमाम उपेक्षाओं और आलोचनाओं से घिरे रहने के बावजूद सरकारी स्कूल प्रणाली के हालिया उपलब्धियों को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता है.

आज इनका विशाल नेटवर्क देश के हर कोने में फैल गया है और वे इस देश के सबसे वंचित और हाशिये पर रह रहे समुदायों के बच्चों की स्कूलिंग में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं.

द वायर हिन्दी पर प्रकाशित इस कथा को विस्तार से पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें