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सरसों के भाव एमएसपी से नीचे आए, खाद्य तेलों के रिकॉर्ड आयात का दाम पर पड़ रहा असर, पामोलिन पर ड्यूटी बढ़ाने की मांग

रूरल वॉयस, 2 मार्च

आलू और प्याज के बाद अब सरसों के भाव किसानों के लिए परेशानी का सबब बनते जा रहे हैं। मंडियों में सरसों की आवक तेज होते ही कीमतें घटने लगी हैं। देश की ज्यादातर मंडियों में नई सरसों का भाव 2022-23 के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 5,450 रुपये प्रति क्विंटल से नीचे चल रहा है। रिकॉर्ड रकबे में बुवाई होने की वजह से पैदावार रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के अनुमान और जनवरी में खाद्य तेलों के रिकॉर्ड आयात का असर सरसों के भाव पर पड़ रहा है। इसे देखते हुए खाद्य तेलों के उत्पादकों के संगठन सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए) ने किसानों के हितों की रक्षा के लिए सरकार से हस्तक्षेप की मांग करते हुए खाद्य तेलों के आयात, खासकर पामोलिन (रिफाइंड पाम ऑयल) पर ड्यूटी बढ़ा कर 20 फीसदी करने की मांग की है।

सरसों के एमएसपी में 400 रुपये की बड़ी बढ़ोतरी कर एक तरफ सरकार खाद्य तेलों के मामले में आत्मनिर्भर बनना चाहती है और आयात निर्भरता कम करना चाहती है, वहीं दूसरी तरफ ड्यूटी में छूट देकर कर आयात को बढ़ावा दे रही है। यह अपने आप में विरोधाभासी है जिसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। 2021-22 और 2020-21 में सरसों का औसत भाव एमएसपी से  काफी ऊपर रहा था और 6,000-8,000 रुपये प्रति क्विंटल तक बिका था। देश की ज्यादातर मंडियों में इस समय सामान्य किस्म के सरसों का औसत भाव 4,500-5,200 रुपये प्रति क्विंटल चल रहा है। इस बार सरसों की रिकॉर्ड बुवाई हुई है जिससे सरसों का रिकॉर्ड उत्पादन होने का अनुमान लगाया गया है। इसकी वजह से भी भाव पर असर पड़ रहा है। सरकार की ओर से जारी बुवाई के अंतिम आंकड़ों के मुताबिक रबी सीजन 2022-23 में 98.02 लाख हेक्टेयर में सरसों की बुवाई हुई है जो 2021-22 की तुलना में 6.77 लाख हेक्टेयर ज्यादा है। बुवाई रकबे का यह नया रिकॉर्ड है। पिछले सीजन में भी बुवाई ने नया रिकॉर्ड बनाया था जिसकी वजह से पैदावार भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था। 2021-22 में 117.46 लाख टन की र‍िकॉर्ड पैदावार हुई थी। कृषि मंत्रालय के दूसरे अग्रिम अनुमान में सरसों एवं रेपसीड का उत्पादन 2022-23 में बढ़कर 1.28 करोड़ टन रहने का अनुमान लगाया गया है। तिलहन फसलों में सरसों की हिस्सेदारी 26 फीसदी है। सरकार द्वारा सरसों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में 400 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी करने से बुवाई में उछाल आया है। देश के सबसे बड़े सरसों उत्पादक राज्य राजस्थान के बाद इस बार मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और हरियाणा में सबसे ज्यादा बुवाई हुई है।
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