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हिमालय में बर्फबारी न होने से आएगा मुसीबतों का दौर

थर्ड पोल, 30 जनवरी 

हिमाचल प्रदेश की लाहौल स्पीति घाटी में इस जनवरी अब तक बर्फ नहीं गिरी है। विक्रम कटोच इस बात को लेकर चिंतित हैं। इकोलॉजी के लिहाज से नाजुक इस घाटी को पर्यावरण संबंधी दिक्कतों और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से बचाने की दिशा में काम करने वाले एक एनजीओ, सेव लाहौल स्पीति सोसाइटी के उपाध्यक्ष कटोच कहते हैं, “अब तक हमारे यहां कम से कम चार से पांच फीट बर्फ होनी चाहिए थी, लेकिन अभी तक कुछ भी नहीं है। यह गंभीर चिंता का विषय है क्योंकि बर्फबारी हमारी जल सुरक्षा सुनिश्चित करती है और स्थानीय ग्रामीणों को सिंचाई व खेती के लिए पानी उपलब्ध कराती है।”

तकरीबन 500 किमी उत्तर, कश्मीर के गुलमर्ग में भी हालात कुछ अलग नहीं हैं। यह जगह स्कीइंग के लिए भी बहुत प्रसिद्ध है। मौजूदा चिल्लई कलां (यह एक फारसी शब्द है, जिसका मतलब है ‘भीषण सर्दी’। यह 40 दिन का होता है) के बावजूद गुलमर्ग से बर्फ गायब है।

जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस पार्टी के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने 9 जनवरी को सोशल मीडिया के माध्यम से कहा: “मैंने गुलमर्ग को सर्दियों में इतना सूखा कभी नहीं देखा… अगर हमें जल्द ही बर्फ नहीं मिली तो गर्मियां बेहद खराब और तकलीफदेह होने वाली हैं।” 
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