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हर साल वातावरण में प्रवेश कर रही 200 करोड़ टन धूल और रेत, चौथाई के लिए जिम्मेवार इंसानी गतिविधियां

डाउन टू अर्थ, 17 नवम्बर

हवा में मौजूद जिस धूल और रेत को हम अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं, वो अपने आप में एक बड़ी समस्या बन चुकी है। यूएनसीसीडी रिपोर्ट से पता चला है कि हर साल 200 करोड़ टन धूल और रेत हमारे वातावरण में प्रवेश कर रही है। तादाद में यह कितनी ज्यादा है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस धूल और रेत का कुल वजन गीजा के 350 महान पिरामिडों के बराबर है।

इतना ही नहीं यूएन कन्वेंशन टू कॉम्बैट डेजर्टिफिकेशन (यूएनसीसीडी) का कहना है कि धूल और रेत भरे तूफानों की करीब 25 फीसदी घटनाओं के लिए इंसानी गतिविधियों को जिम्मेवार ठहराया जा सकता है। इनमें खनन और जरूरत ज्यादा की जा रही पशु चराई के साथ भूमि उपयोग में आता बदलाव, अनियोजित कृषि, जंगलों का होता विनाश, जल संसाधनों का तेजी से किया जा रहा दोहन जैसी गतिविधियां शामिल है।

यूएनसीसीडी ने यह भी चेताया है कि धूल और रेत भरे यह अंधड़ दुनिया के कई हिस्सों में अब पहले से कहीं ज्यादा हावी हो चुके हैं, जो उत्तर और मध्य एशिया से लेकर उप-सहारा अफ्रीका तक में भारी तबाही की वजह बन रहे हैं। इनकी वजह से न केवल भूमि की उत्पादकता पर असर पड़ रहा है। साथ ही दुनिया को कृषि और आर्थिक रूप से भी भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।

बता दें कि नीतिगत सुझावों के साथ, यह चेतावनी उज्बेकिस्तान के समरकंद में चल रही यूएनसीसीडी की पांच दिवसीय बैठक के दौरान सामने आई है। 13 से 17 नवंबर 2023 के बीच आयोजित इस बैठक का मकसद कन्वेंशन को लागू करने के बाद दुनिया भर में भू-क्षरण को पलटने की दिशा में हुई हालिया प्रगति का जायजा लेना है।
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