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हेमंत ने ममता बनर्जी को लिखा पत्र, कहा झारखंड भी सब्जियां उगाता है दीदी

रांची: पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से आलू की आपूर्ति रोके जाने को झारखंड सरकार ने गंभीरता से लिया है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने प बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को पत्र लिखा है. पत्र में मुख्यमंत्री ने ममता बनर्जी को ममता दीदी कह कर संबोधित किया है. लिखा है कि झारखंड में बड़े पैमाने पर फूलगोभी, गाजर, फ्रेंच बीन, टमाटर आदि सब्जियों की खेती होती है. झारखंड के किसान इन सब्जियों की पैदावार उस समय करते हैं, जब देश के दूसरे राज्यों के किसानों के लिए खेती संभव नहीं होती. ये सब्जियां बंगाल भी भेजी जाती हैं.

50%आलू बंगाल से आता है : उन्होंने पत्र में लिखा है कि पिछले कुछ दिनों से पश्चिम बंगाल सरकार ने आलू समेत अन्य सब्जियों को झारखंड भेजना बंद कर दिया है. झारखंड में खपत होनेवाला 50 फीसदी आलू की आपूर्ति पश्चिम बंगाल ही करता है. प बंगाल की सरकार की ओर से आपूर्ति रोके जाने के कारण आलू की कीमत में भारी इजाफा हो गया है.  आलू सभी वर्ग के लोगों के भोजन में इस्तेमाल होता है. इसकी कीमत में अप्रत्याशित वृद्धि का सबसे ज्यादा असर आम आदमी पर पड़ा है.

झारखंड में छोटे पैमाने पर होती है खेती
मुख्यमंत्री ने ममता बनर्जी को लिखे पत्र में कहा है कि बारिश के मौसम में झारखंड में भी छोटे पैमाने पर नये आलू की खेती होती है, जिसे मांग के मुताबिक दूसरे राज्यों को भी भेजा जाता है. आलू का अंतरराज्यीय परिवहन रुकने से झारखंड में आलू के बीज की भी कमी हो गयी है. बीज की कमी के कारण आलू की खेती करनेवाले किसान भी प्रभावित होंगे. मुख्यमंत्री ने पश्चिम बंगाल सरकार से वर्तमान परिस्थितियों में सहानुभूति बरतते हुए आलू और अन्य सब्जियां की झारखंड में आपूर्ति जारी रखने का आग्रह किया है.

सरकार के कदम का इंतजार : चेंबर
पश्चिम बंगाल से आलू और सब्जी की आपूर्ति रोके जाने को लेकर सोमवार को को रांची चेंबर की बैठक हुई. चेंबर ने कहा है कि वह सरकार के अगले कदम का इंतजार करेगा. बैठक में बताया गया कि कृषि सचिव नितिन मदन कुलकर्णी ने व्यापारियों से बंगाल में आलू रोके जाने संबंधी निर्देश का सबूत मांगा था. उन्हें 23 अक्तूबर को बंगाल सरकार की ओर से जानी अधिसूचना की कॉपी भेज दी गयी है. यह जानकारी चेंबर महासचिव पवन शर्मा ने दी.

बंगाल पुलिस ने थाने से ही बेच दिये झारखंड के  व्यापारियों का आलू
झारखंड लाये जा रहे आलू से भरे ट्रकों को सीमा पर रोक कर बंगाल पुलिस थाने से ही इसे बेच रही है.  पुरुलिया जिले के जयपुर व आड़सा थाने की पुलिस ने तीन बार झारखंड आ रहे वाहनों को रोका. उस पर लदे आलू को उतार कर थाने से ही स्थानीय लोगों को 13 रुपये प्रति किलो के हिसाब से दे दिया.

एक बोरा आलू भी नहीं लाने दे रही

* एक-एक आलू व्यापारियों का हिसाब मांग रही पश्चिम बंगाल की सरकार

पश्चिम बंगाल सरकार ने एक आदेश निकाल कर राज्य में कारोबार करनेवाले एक-एक आलू व्यापारियों का हिसाब मांगा था. 25 अक्तूबर को पश्चिम बंगाल सरकार के सचिव एस विश्वास ने राज्य में आलू की किल्लत को देखते हुए आदेश जारी किया था. इसमें वहां के कृषि विपणन विभाग के सचिव  को आलू के विपणन और दूसरे राज्यों में भेजे जाने पर नजर रखने का निर्देश मिला था.

व्यापारियों को निर्देश दिया गया था कि एक सप्ताह के अंदर विभाग को आलू के क्रय-विक्रय, परिवहन, जहां से दूसरे राज्यों में जाता है, उन स्थानों को चिह्न्ति करने, कितने मात्र में दूसरे राज्यों में आलू जाता है, इसकी जानकारी मांगी थी. कोल्ड स्टोरेज के स्टॉक की जानकारी भी मांगी गयी थी. इससे संबंधित प्रमाण पत्र भी व्यापारियों को देने का निर्देश गया था. इसके बाद वहां की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रेस से बातचीत के बाद दूसरे राज्यों में आलू भेजने से मना कर दिया था.

* थाने से ही बांट दिया आलू

झारखंड में जहां आलू की किल्लत दिनों दिन बढ़ती जा रही है, वहीं पश्चिम बंगाल से आलू लेकर झारखंड को आनेवाले वाहनों को पुलिस द्वारा जबरन रोका जा रहा है. इन आलू लदे वाहनों को पुलिस द्वारा पकड़ कर थाना ले जाया जा रहा है व वहीं थाने में ही आलू का वितरण किया जा रहा है. बीते सात दिनों में पुरुलिया जिले के जयपुर व आड़सा थाने में तीन बार आलू लेकर आ रहे वाहनों के आलू का वितरण पुलिस द्वारा किया गया. थाने में ही स्थानीय लोगों को 13 रुपये की दर से पांच-पांच किलो आलू पुलिस ने दिया.

इधर, आलू की कीमत 13 रुपये से अधिक न हो, इसके लिए पश्चिम बंगाल सरकार ने पंचायत के प्रतिनिधियों व पार्टी कार्यकर्ताओं को भी निर्देश जारी किया है. इन कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया गया है कि अगर कोई दुकानदार 13 रुपये किलो से अधिक के चार्ज पर आलू बेचता है, तो इसकी सूचना तत्काल प्रशासन को दी जाये. आलू पर किस तरह की निगरानी स्थानीय प्रशासन रख रहा है, इस संबंध में बोकारो जिले के सब्जी विक्रेता गंभीर गोरांई कहते हैं कि ममता सरकार गाड़ी से आलू तो दूर, बोरे में भी आलू लेकर बॉर्डर क्रॉस करने नहीं दे रही है.

* बेड़ो से 500 ट्रक आलू जाता है दूसरे राज्यों में

राजधानी से सटे इलाके बेड़ो में बड़ी सब्जी मंडी है. यहां से हर माह औसतन 500 ट्रक आलू दूसरे राज्यों में जाते हैं. अक्तूबर में बरसाती आलू निकलने लगता है. इसके बाद हर दिन 10 से 12 ट्रक आलू जाता है. सप्ताह में तीन दिन (सोमवार, गुरुवार व शनिवार) 20 से 25 ट्रक आलू दूसरे राज्यों के किसान ले जाते हैं. दूसरे राज्यों के व्यापारी यहां के किसानों को मुंह मांगी कीमत देकर ले जा रहे हैं. यहां का आलू बिहार, बंगाल और ओडिशा की मंडियों में जाता है.

* कई इलाकों में आलू की खेती

राजधानी में इटकी, मांडर, लापुंग के अलावा गुमला के भरनो, सिसई, खूंटी के कर्रा, लोहरदगा के भंडरा आदि क्षेत्र में भी बड़े पैमाने पर आलू की खेती होती है. यहां से भी दूसरे राज्यों में आलू भेजा जाता है.

* थोक मंडी में गिरी कीमत

स्थानीय बाजार में आलू की उपज शुरू होने के बाद कीमत गिरने लगी है. बेड़ो बाजार में सोमवार को 17-18 रुपये किलो आलू बिका. दो दिन पूर्व नया सफेद आलू 28 रुपये के आसपास था. हरी सब्जियों की कीमत में कोई गिरावट नहीं आ रही है. गोभी और मूली की कीमत थोक मंडी में भी बढ़ी है.

* बोले कृषि सचिव

आलू का अंतरराज्यीय परिवहन रोकने के मुद्दे पर पश्चिम बंगाल सरकार से बात की जा रही है. मामले को  मुख्य सचिव और मुख्यमंत्री के संज्ञान में लाया गया है. सरकार आवश्यक कदम उठायेगी. डॉ नितिन मदन कुलकर्णी, सचिव, कृषि विभाग

* सरकार जल्द हस्तक्षेप करे : चेंबर

फेडरेशन चेंबर ने राज्य सरकार से आग्रह किया है कि इस मामले में हस्तक्षेप करें. चेंबर अध्यक्ष विकास सिंह ने आलू की किल्लत के मामले पर कृषि सचिव व मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव से बात की. श्री सिंह ने बताया कि दोनों से आग्रह किया गया है कि ममता सरकार से बात करें. उनको बताये कि अंतरराज्यीय प्रतिबंध का मामला आज तक नहीं हुआ है. बंगाल से आलू नहीं आने से राज्य के लोगों को परेशानी हो रही है. चेंबर के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री से भी मिलने की इच्छा जतायी थी. समय नहीं मिलने के कारण मुलाकात नहीं हो पायी है.

- सरकार को चाहिए कि यहां से हरी सब्जी दूसरे राज्यों में जाने से रोक दे. इससे यहां के लोगों को कम से कम सस्ती हरी सब्जी मिल पायेगी. आलू के विकल्प के रूप में लोग इसका उपयोग कर पायेंगे.

शंभु गुप्ता, अध्यक्ष, रांची चेंबर

* नये आलू के भाव में गिरावट

पंडरा स्थित थोक मंडी में नये आलू के भाव में सोमवार को गिरावट आयी. पूर्व में जहां यह आलू 24 रुपये प्रति किलो था, अब 20 रुपये किलो बिक रहा है. आलू के थोक विक्रेता ने कहा कि जल्द ही इसकी कीमत में गिरावट आयेगी. इन दिनों लोकल के अलावा छत्तीसगढ़ व यूपी से आलू पहुंच रहा है. मंडी में सादा आलू 1800 से 2000 रुपये क्विंटल के भाव बिक रहा है. वहीं लाल पुराना आलू 1800 से 1850 क्विंटल की दर से बिक रहा है. वहीं प्याज छोटा मीडियम 30, मीडियम बड़ा 40 व बड़ा प्याज 45 से 50 रुपये किलो बिक रहा है. प्याज की कीमत में एक से दो सप्ताह के अंदर थोड़ी गिरावट आ जायेगी.

* हरी सब्जी के निर्यात पर रोक लगे : भाजपा

भाजपा के प्रदेश सह मीडिया प्रभारी संजय कुमार जायसवाल ने कहा कि आलू पर रोक लगाने के मामले में झारखंड सरकार को कठोर निर्णय लेना चाहिए. जिस प्रकार बंगाल सरकार ने आलू पर रोक लगायी है, उसी प्रकार झारखंड सरकार को हरी सब्जियों के निर्यात पर रोक लगा देनी चाहिए. सरकार को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि राज्य में आलू की कालाबाजारी नहीं हो पाये.

* गोभी व कोयला रोके झारखंड : देहाती

राज्य के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री हेमेंद्र प्रताप देहाती ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन व वित्त मंत्री राजेंद्र प्रसाद सिंह को पत्र लिख कर बंगाल सरकार के विरुद्ध सख्त कदम उठाने का आग्रह किया है. श्री देहाती ने कहा है कि झारखंड सरकार भी यहां से गोभी, कोयला, खस्सी, बकरी भी बंगाल भेजने पर रोक लगाये, ताकि दबाव में आकर बंगाल सरकार झारखंड आनेवाले आलू पर से रोक हटा सके.

* अधिकतर सब्जियां 50 रुपये प्रति किलो के पार

- कीमत में सात से 10 दिनों के अंदर आयेगी गिरावट

- कई लोग ग्रामीण बाजार से कर रहे हैं खरीदारी

सब्जियों के भाव में आयी तेजी से जनता करार रही है. लोग अब किलो की जगह पाव में खरीदारी कर रहे हैं.  फूलगोभी 55 से 60 रुपये किलो बिक रही है. छठ के दिन इसकी कीमत 70 से 80 रुपये किलो तक पहुंच गयी थी.  पत्ता गोभी भी 35 से 40 रुपये किलो है.  मटर छेमी 80 रुपये किलो है. मूली, खीरा,लाल साग, कद्दू, कोहड़ा, टोटी, ओल, कच्च केला आदि को छोड़ दिया जाये, तो कोई भी सब्जी 50 रुपये किलो से नीचे नहीं बिक रही है.

मौसम खुला रहा, तो गिरेगी कीमत : सब्जी विक्रेता भीम ने कहा कि सब्जियों के भाव में धीरे-धीरे गिरावट आ रही है. सप्ताह से 10 दिनों के अंदर मौसम यदि इसी तरह खुला रहा, तो सब्जी की उपलब्धता काफी बढ़ जायेगी. इसके बाद कीमत में गिरावट आयेगी. सब्जियों की बाहर अत्यधिक लोडिंग होने के कारण भी कीमत में गिरावट नहीं आ रही है.

* देहाती बाजार से सब्जी की खरीदारी

सब्जियों के दाम में आयी तेजी के बाद कई लोग देहाती बाजार से सब्जी की खरीदारी कर रहे हैं. रांची-लोहरदगा पैसेंजर से प्रतिदिन कई परिवार के लोग सब्जी खरीद कर लौट रहे हैं. रांची से इस ट्रेन में पिस्का, नरकोपी, नगजुआ, इरगांव,  सहित अन्य स्टेशनों का भाड़ा भी काफी कम है, जिस कारण वे लोग वहां से सब्जी खरीद कर ला रहे है.सब्जी की कीमत शहर के बाजार की तुलना में देहात बाजार में थोड़ी कम है. ग्रामीण इलाके में नौकरी करनेवाले लोग भी इन दिनों में हाथों में सब्जी का झोला लेकर लौट रहे हैं.

* नगजुआ बाजार में सब्जी की कीमत

आलू नया सादा-लाल 20, बोदी सादा : 20-25, फुलगोभी : 30-35, टमाटर छोटा : 25-30, टमाटर बड़ा : 30-35, कद्दु गोल प्रति पीस : 10-15, कच्च केला : 20-22, बीन : 20-25, पालक : 30, सरसों साग : 20, मेथी : 40-45, बैगन हरा : 20-25, बैगन लाल लंबा : 25-30, मूली : 15-16, खीरा हाइब्रिड: 20-24, कोहड़ा : 10, अदरख पुराना : 80, अदरख नया : 60-70, लहसुन : 60, टोटी : 20, नेनुआ : 20, भिंडी : 30