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13 साल की बच्ची का प्रयास दूसरों के लिए मिसाल बन गया

रायपुर (निप्र)। 13 साल की एक बच्ची दादा को वाकर के सहारे चलता देख कुछ ऐसा कर गई, जो दूसरों के लिए मिसाल बन गया। दादा की तकलीफों को देख पटना की शालिनी के दिमाग में औरों की तकलीफ दूर करने के लिए एडजेस्टेबल वॉकर का आइडिया 2011 में आइडिया आया और आज यह वॉकर बन कर तैयार है।

इस वॉकर के आइडिए के लिए शालिनी को पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम से 2011 में पुरस्कार भी मिल चुका है। यह आइडिया शालिनी के नाम पेटेंट भी है। रायपुर में इस वॉकर की लॉन्चिंग के मौके पर शालिनी रायपुर पहंुची थी।

नईदुनिया से चर्चा करते हुए शालिनी ने अत्याधुनिक वॉकर से जुड़ी बातें साझा कीं। शालिनी ने बताया कि मैं रोज अपने दादा को वॉकर के सहारे चलते देखती थी। उन्हें सीढ़ियों में जाने में मुश्किलें आतीं। तब मैंने काफी सोचा कि दादा की इस तकलीफ को कैसे दूर किया जाए। तभी मुझे एडजेस्टेबल वॉकर का आइडिया सूझा। मैने तुरंत नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन (एनएफआई) को यह आइडिया बताया।

इस आइडिया को पूरी तरह परखने के बाद एनएफआई की टीम एडजेस्टेबल वॉकर तैयार करने में जुट गई। आखिरकार तैयार करने के बाद इसे शालिनी के नाम पेटेंट भी करा दिया। एनएफआई ने नागपुर की कवीरा शॉल्यूशन कंपनी को इसे तैयार करने की जिम्मेदारी दी।

शालिनी ने बताया कि इस वॉकर के आगे और पीछे दोनों तरफ के पाए को एडजस्ट किया जा सकता है। सीढ़ी चढ़ते वक्त नि:शक्तों को बहुत सी परेशानी होती है। ऐसे में यह वॉकर इन्हें आसानी से सीढ़ी चढ़ने में मदद करेगा।

मेडिकल की तैयारी कर रही शालिनी

13 साल की शालिनी कक्षा 12वीं की पढ़ाई कर रही है। शालिनी के पिता सुबोध कुमार भगत की खुद की दवाई दुकान है। शालिनी की मां किरण भगत गृहिणी हैं। शालिनी बायोलॉजी की पढ़ाई कर रही है। वह डॉक्टर बनना चाहती है। इस आइडिया के लिए शालिनी को कंपनी की तरफ से दो लाख रुपए एडवांस में दिए गए। साथ ही हर वॉकर में 100 रुपए बतौर रॉयल्टी शालिनी को मिलेंगे।

लॉन्च में दस जरूरतमंदों को दिया गया वॉकर

रायपुर के होटल हयात में कंपनी 'कविरा सॉल्यूशन" ने यह वॉकर रविवार को लॉन्च किया। शालिनी के आइडिया के लिए उनका सम्मान समाज कल्याण मंत्री रमशीला साहू और महापौर प्रमोद दुबे ने किया। इस मौके पर छह जरूरतमंदों को वॉकर दिया गया।