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Notice (8): Undefined variable: urlPrefix [APP/Template/Layout/printlayout.ctp, line 8]research-and-development/छह-एकड़-में-करोड़-की-उपज-37.html"/> शोध और विकास | छह एकड़ में करोड़ की उपज | Im4change.org
Resource centre on India's rural distress
 
 

छह एकड़ में करोड़ की उपज

कायदे से उन्हें ग्यारहवीं तक की भी शिक्षा हासिल नहीं हुई है लेकिन उनके काम आज कृषि विज्ञानियों के लिए हैरत का विषय बने हुए हैं। जिस दौर में किसान हताशा में आत्महत्या कर रहे हैं उसी दौर में उन्होंने अपने संकल्प और प्रयोगधर्मी सोच के बूते करोड़पति किसान का तमगा हासिल किया है और साथी किसानों को सम्मान के साथ आजीविका कमाने के राह दिखाई है।उत्तरप्रदेश के जिला बाराबंकी के दौलतपुर के किसान रामसरन वर्मा का हरा-भरा फार्म आज आईआईएम जैसे शीर्ष प्रबंधन के छात्रों और शिक्षकों के लिए एक जीवंत प्रजोक्ट का दर्जा हासिल कर चुका है। उनके विजिटर्स रजिस्टरों में उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान व महाराष्ट्र के कई हजार किसानों, यूपी के तमाम अधिकारियों, राजनीतिज्ञों, मीडियाकर्मियों व सामाजिक कार्यकर्ताओं के अलावा देश के शीर्ष कृषि शोध संस्थानों के वैज्ञानिकों, आईआईएम लखनऊ केशिक्षकों व छात्रों तथा भारत सरकार के अधिकारियों के नाम भरे पड़े हैं। रजिस्टरों में दर्ज विशेषज्ञों की टिप्पणिया राम सरन के लिए उनके बैंक बैलेंस से कम अहमियत नहीं रखतीं।

 राम सरन  कृषि के आर्थिक पहलू पर हमेशा नजर रखते हैं। यही वजह है कि पंद्रह वर्ष पहले जब बाराबंकी के किसानों पर मेंथा उत्पादन की भेड़चाल हावी थी, उस समय राम सरन ने केला, टमाटर व आलू की खेती का गैर-पारंपरिक फसल चक्र अपनाया। 1995 तक गेहूं-धान की परंपरागत खेती में खपकर बाकी किसानों की तरह तंगहाली झेलने वाले राम सरन ने इधर-उधर से गुर सीखकर पहले केला, फिर टमाटर, आलू, हरी खाद, गेहूं और केला की खेती का ऐसा करिश्माई तीन वर्षीय फसल चक्र विकसित किया, जिसने न सिर्फ उनकी, बल्कि आसपास के जिलों के करीब तीन हजार किसानों की जिंदगी का नक्शा ही बदल दिया। 90 एकड़ के फार्म में उनकी निजी जमीन सिर्फ छह एकड़ है, बाकी गाव के दूसरे किसानों की।
 
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http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttarpradesh/4_1_572
4680.html

 
http://www.hindimedia.in/index.php?option=com_content&
task=view&id=7840&Itemid=54