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नौकरी छोड़ सरपंच बनी आरती की उड़ान

32 वर्षीया आरती ने सिक्किम मणिपाल विश्वविद्यालय से मास्टर ऑफ बिजनेस एडमीनिस्ट्रेशन (एमबीए) करने के बाद दो सालों तक बैंकिंग सेक्टर में काम किया. प्रबंधन की पढ़ाई करने के बाद बेरहामपुर में आइडीबीआइ कंपनी में मैनेजर बनीं, लेकिन बैंकिंग सेक्टर उन्हें रास नहीं आयी. आरती वर्ष 2012 में  नौकरी छोड़ राजनीति में आ गयीं. राजनीति में आने का कारण उनका अपने पैतृक गांव के प्रति अत्यधिक लगाव था और यहां रह रहे ग्रामीणों की जीवन दशा को बदलने के लिए लोगों ने उनसे यह आग्रह किया था कि वह पंचायत का प्रतिनिधित्व कर  गांव की स्थितियों को बदलने में उनकी मदद करें.

इस आग्रह पर उन्होंने पंचायत का चुनाव लड़ा और ओड़िशा के गंजम जिले में धुनकपाडा  गांव की सरपंच बनीं. सरपंच बनने के बाद उनके कार्यो को देखते हुए वर्ष 2014 में उनका चयन राजीव गांधी लीडरशीप अवार्ड के लिए हुआ. आरती के अनुसार उनके लिए एक अच्छी नौकरी छोड़ना काफी कठिन निर्णय था. साथ ही यह इस मायने में भी कठिन था क्योंकि उनके जीवन का अधिकतर समय शहरों में ही गुजरा था. शहर से गांव का रुख करना आसान नहीं था. लेकिन अपने पैतृक गांव धानुकपाडा से काफी लगाव होने के कारण वह अपने निर्णय पर अडिग रहीं. प्रबंधन की पढ़ाई का इस्तेमाल उन्होंने ग्राम स्तर पर चलाये जा रहे शासन व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए किया. वह बताती हैं कि जब उन्होंने सरपंच का पदभार ग्रहण किया तो यह मालूम हुआ कि गांव के अधिकतर लोगों को जन वितरण प्रणाली के संबंध में किसी प्रकार की जानकारी नहीं थी. उन्होंने पंचायत में चलायी जा रहे जन वितरण प्रणाली दुकानों के काम करने की व्यवस्था में उल्लेखनीय सुधार लाया. लचर पीडीएस सिस्टम वाले इस गांव के लिए यह चमत्कार था.

आरती का बतौर सरपंच काम के प्रति प्रतिबद्धता और उनकी पंचायती राज संस्था में महत्वपूर्ण भागीदारी को देखते हुए हाल ही में अमेरिकन कॉसुलेट की ओर से अमेरिका के सबसे प्रतिष्ठित प्रोफेशनल एक्सचेंज प्रोग्राम  इंटरनेशनल विजिटर लीडरशिप कार्यक्रम में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया गया था. कार्यक्रम के दौरान उन्हें अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा से मुलाकात करने का अवसर मिला. इस कार्यक्रम के लिए चयन किये जाने वाली वे एकमात्र भारतीय शख्स थीं.

ठेपा नहीं दस्तखत अभियान

आरती ने महिलाओं के लिए बड़े पैमाने पर साक्षरता अभियान चलाया. उनका अपनी पंचायत में ठेपा नहीं दस्खत के नाम से चलाया गया यह साक्षरता अभियान काफी लोकप्रिय हुआ. महिलाओं को न सिर्फ हस्ताक्षर करना सिखाया गया, बल्कि आवेदन लिखना भी सिखाया. पंचायत निधि की एक छोटी राशि का इस्तेमाल प्रौढ़ महिला के शिक्षा कार्यक्रम के लिए किया गया. प्रत्येक वार्ड में एक शिक्षित युवा की नियुक्ति महिलाओं को पढ़ाने-लिखाने के लिए किया गया है. अपने गांव की पारंपरिक लोककला के संरक्षण के लिए भी काम किया.  उनका कहना है कि वह अपने जीवन के बाकी की उम्र ग्रामीणों की सेवा में ही देंगी. महिलाओं की ग्राम सभा में भागीदारी बढ़ी है. एक समय तक इन सभाओं में पुरुष वर्ग को ही भाग लेने का अधिकार प्राप्त था. अब पंचायत की सभा में घरेलू झगड़ों का भी निबटारा किया जाता है.

आरती के अनुसार  अमेरिकन कॉनसुलेट से फोन आने पर उन्हें काफी आश्चर्य हुआ था. उन्हें बताया गया कि उनके काम की काफी सराहना की गयी है और तीन सप्ताह तक चलने वाले अंतरराष्ट्रीय लीडरशिप कार्यक्रम में भाग लेने के लिए उन्हें आमंत्रित किया गया है. वहां आरती ने राज्य सरकार के कार्यो, सरकारी कामों में पारदर्शिता तथा योजनाओं और कार्यक्रमों में उनकी जिम्मेवारी पर अपनी बात साझा की.  अमेरिका की इस यात्र का पूरा खर्च राज्य सरकार की ओर से दिया गया. आरती का मानना है कि ग्राम पंचायत के जनप्रतिनिधि यदि प्रतिबद्धता तथा ईमानदारी से काम करें तो काफी कुछ बदलाव लाया जा सकता है.

इंटरनेशनल विजिटर्रस लीडरशिप अवार्ड अमेरिका के सबसे प्रतिष्ठित अवार्ड में से एक है. पूर्व में भी भारत की कई नामी हस्तियों जैसे पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, मोरारजी देसाई तथा अटल बिहारी वाजपेयी तथा पूर्व राष्ट्रपति केआर नारायणन तथा प्रतिभा पाटिल को इस कार्यक्रम में शामिल होने का मौका मिला है.