Deprecated (16384): The ArrayAccess methods will be removed in 4.0.0.Use getParam(), getData() and getQuery() instead. - /home/brlfuser/public_html/src/Controller/ArtileDetailController.php, line: 150
 You can disable deprecation warnings by setting `Error.errorLevel` to `E_ALL & ~E_USER_DEPRECATED` in your config/app.php. [CORE/src/Core/functions.php, line 311]
Deprecated (16384): The ArrayAccess methods will be removed in 4.0.0.Use getParam(), getData() and getQuery() instead. - /home/brlfuser/public_html/src/Controller/ArtileDetailController.php, line: 151
 You can disable deprecation warnings by setting `Error.errorLevel` to `E_ALL & ~E_USER_DEPRECATED` in your config/app.php. [CORE/src/Core/functions.php, line 311]
Warning (512): Unable to emit headers. Headers sent in file=/home/brlfuser/public_html/vendor/cakephp/cakephp/src/Error/Debugger.php line=853 [CORE/src/Http/ResponseEmitter.php, line 48]
Warning (2): Cannot modify header information - headers already sent by (output started at /home/brlfuser/public_html/vendor/cakephp/cakephp/src/Error/Debugger.php:853) [CORE/src/Http/ResponseEmitter.php, line 148]
Warning (2): Cannot modify header information - headers already sent by (output started at /home/brlfuser/public_html/vendor/cakephp/cakephp/src/Error/Debugger.php:853) [CORE/src/Http/ResponseEmitter.php, line 181]
साक्षात्कार | प्रभात खबर से खास बातचीत: कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह ने कहा, किसानों से किये गये सभी वायदे हुए हैं पूरे
प्रभात खबर से खास बातचीत: कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह ने कहा, किसानों से किये गये सभी वायदे हुए हैं पूरे

प्रभात खबर से खास बातचीत: कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह ने कहा, किसानों से किये गये सभी वायदे हुए हैं पूरे

Share this article Share this article
published Published on Aug 19, 2018   modified Modified on Aug 19, 2018
छात्र जीवन से ही विद्यार्थी परिषद, जनसंघ काल में ही राजनीति से जुड़े आरएसएस के स्वयंसेवक राधा मोहन सिंह बिहार के पूर्वी चंपारण से पांच बार सांसद चुने गये हैं. वह ‍भाजपा के संगठन में लंबे समय तक काम कर चुके हैं. किसानों को सशक्त बनाने की दिशा में लक्ष्य तय करने, देश में मौजूदा समय में कृषि के समक्ष चुनौतियों, किसानों की आय दोगुनी करने तथा कृषि से जुड़े अन्य विषयों पर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह की राष्ट्रीय ब्यूरो प्रमुख अंजनी कुमार सिंह से बातचीत के मुख्य अंश...

Qबीते चार सालों में आपके मंत्रालय की क्या उपलब्धियां रही हैं? सरकार की ओर से किसानों के हित में ऐसा क्या किया गया, जिससे यह पता चले कि यूपीए सरकार की तुलना में आपकी सरकार बेहतर काम कर रही है?



देश में कृषि क्षेत्र के आर्थिक स्थिति में सुधार के साथ-साथ किसानों की आय में वृद्धि के लिए वर्ष 2004 में राष्ट्रीय किसान आयोग गठित किया गया था, लेकिन तब आयोग की जो भी सिफारिशें आयीं, उसे यूपीए सरकार ने ठंडे बस्ते में डाल दिया. जब से मोदी सरकार आयी है, कृषि में नीतिगत सुधारों एवं नयी-नयी योजनाओं को सरकार द्वारा लागू करने के लिए आवश्यकता अनुसार बजट की व्यवस्था की गयी.


बड़ी खुशी की बात है कि पिछले पांच वर्षों में हम लोगों ने ऐसी योजनाओं के क्रियान्वयन एवं मजबूती प्रदान करने के लिए 2,11,694 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है. इसके अलावा भी, सरकार ने डेयरी, कोऑपरेटिव, मछली पालन, पशुपालन, कृषि बाजार, लघु सिंचाई योजना, जलजीवों के उत्पादन में आधारभूत ढांचे एवं व्यवस्था में सुधार हेतु सक्षम कार्पस फंड बनाया है. इस प्रकार से सरकार ने कृषि जगत एवं किसानों के कल्याण हेतु तथा उपभोक्ताओं के अभिरुचि को ध्यान में रखकर सतत उत्पादन की तरफ आय केंद्रित दृष्टिकोण अपनाया है. प्रधानमंत्री खुद किसानों से संवाद कर रहे हैं. इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि मोदी सरकार किसानों के हित को लेकर कितनी गंभीर और संवेदनशील है.


Qकिसानों की आय बढ़ाने मे सिंचाई एवं लागत मूल्य की प्रभावी भूमिका होती है. सरकार इस दिशा में क्या काम कर रही है?


किसानों की आय को दोगुना करने और उत्पादन बढ़ाने के लिए सिंचाई का विस्तार एवं जल उपयोग दक्षता में सुधार करना महत्वपूर्ण है. इस दिशा में सरकार ने सिंचाई बजट में भारी वृद्धि की है. सूखा प्रभाव को कम करने और 'हर खेत को पानी' और 'प्रति बूंद अधिक फसल' को सुनिश्चित करने के लिए प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना शुरू की गयी है.

इसके तहत ड्रिप तथा स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली को अपनाना एवं प्रोत्साहित किया जा रहा है और छोटे जल स्रोतों का विकास किया जा रहा है. वर्षों से लंबित 99 मध्यम और वृहद परियोजनाओं को भी पूरा किया जा रहा है. हमारा जोर सिर्फ सिंचाई पर ही नहीं, बल्कि सिंचाई विस्तार, जल संरक्षण एवं जल उपयोग दक्षता को बढ़ाने यानी संपूर्ण सिंचाई शृंखला पर ध्यान केंद्रित करने पर है.

नीम कोटेड यूरिया, एक राष्ट्रीय मानक के आधार पर स्वॉयल हेल्थ कार्ड, जैविक खेती, मनरेगा द्वारा किसानों के खेतों में नयी तकनीकों का उपयोग, तालाब निर्माण के अलावा कृषि ऋण प्रवाह को तेज कर एफपीओ एवं ज्वाइंट लाइबिलिटी ग्रुप का निर्माण भी किया जा रहा है.


Qक्या किसानों की आय सिर्फ फसलों की आय से दोगुना होना संभव है?

आज सरकार का ध्येय है कि कृषि नीति एवं कार्यक्रमों को कैसे ‘उत्पादन केंद्रित' के बजाय ‘आय केंद्रित' बनाया जा सके. खेती के साथ-साथ खेती से अतिरिक्त स्रोतों यानी कि कृषि से संबंधित क्षेत्रों पर हमारा बहुत जोर है.
इसमें बेहतर बीज, रोपण सामग्री, हाई-डेंसिटी प्लांटेशन, प्रोटेक्टेड कल्टीवेशन, एकीकृत कृषि प्रणाली, मधुमक्खी पालन, डेयरी प्रसंस्करण, मत्स्यिकी के क्षेत्र में नीली क्रांति, मुर्गी पालन आदि से स्वरोजगार सहित किसानों की आय भी बढ़ रही है.


Qलेकिन, किसानों का आरोप है कि उनकी उपज का वाजिब दाम अभी भी नहीं मिल रहा है. किसानों को उनकी उपज का अच्छा मूल्य मिले, इस दिशा में सरकार क्या कर रही है?


किसानों की यह शिकायत सही थी, क्योंकि वर्ष 2004-05 में मंडी कानूनों में सुधार के लिए की गयी सिफारिशों को 10 वर्षों तक लागू ही नहीं किया गया. मोदी सरकार कृषि बाजार में व्यापक सुधार कर रही है.
ई-राष्ट्रीय कृषि बाजार योजना के तहत देश की 585 मंडियों को जोड़ा जा चुका है, ताकि ऑनलाइन ट्रेडिंग शुरू हो सके. साथ ही 22 हजार ग्रामीण मंडियों के विकास के लिए नाबार्ड के सहयोग से 2 हजार करोड़ रुपये की राशि प्रस्तावित की गयी है. किसानों को उद्योग से जोड़ने के लिए मॉडल कॉन्ट्रेक्ट एक्ट बनाया गया है. सरकार द्वारा सभी अधिसूचित जिंसों के लिए किसानों को लागत मूल्य पर डेढ़ गुना एमएसपी के रूप में देने का निर्णय लिया गया है. पहले कई फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य डेढ़ गुना नहीं था, उसे डेढ़ गुना या उससे अधिक किया गया है. ऐसे प्रयासों से किसानों को अच्छा मूल्य मिलना तय है.


Qदेश में कृषि अभी भी मॉनसून पर निर्भर है. मॉनसून पर निर्भरता कम करने और प्राकृतिक आपदाओं से फसलों को होनेवाले नुकसान की भरपायी के लिए सरकार क्या कर रही है?


देश में जहां एक तरफ 55 फीसदी खेतों में पानी नहीं है, वहीं दूसरी ओर उन 99 परियोजनाओं में सिंचाई परियोजना वर्षों से लंबित थी. सारी परियोजनाओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त धन की व्यवस्था की गयी है, जिससे मॉनसून पर किसानों की निर्भरता भी कम हो जायेगी.


प्राकृतिक आपदाओं से होनेवाले नुकसान की भरपाई के लिए प्रधान मंत्री फसल बीमा योजना शुरू की गयी. किसान बेहद कम प्रीमियम देकर इस योजना का लाभ उठा रहे हैं. खड़ी फसल के साथ-साथ बुआई से पहले और कटाई के बाद होनेवाला नुकसान भी इसके दायरे में है. किसानों को ज्यादा परेशानी न हो, इसके लिए नुकसान के दावों का 25 फीसदी भुगतान तत्काल ऑनलाइन किया जाता है.


जिन राज्यों में मौसम ज्यादा प्रतिकूल रहा, उन राज्यों में बीमित किसानों को प्राप्त कुल दावा राशि कुल प्राप्त प्रीमियम से अधिक रहा है. उदाहरण के तौर पर खरीफ 2016 मौसम में केरल, कर्नाटक, आंध्रप्रदेश में और रबी 2016-17 में तमिलनाडु एवं आंध्र प्रदेश तथा खरीफ 2017 में छत्तीसगढ़, हरियाणा, मध्यप्रदेश एवं ओडिशा में कुल प्राप्त प्रीमियम के तुलना में किसानों को ज्यादा दावा राशि का भुगतान किया गया है. राज्य सरकारें नयी टेक्नोलॉजी का जितना अधिक उपयोग कर सकेंगी, किसानों को उतना


अधिक लाभ मिल सकेगा. फसल बीमा योजना के अलावा प्राकृतिक आपदाओं से होनेवाले नुकसान के राहत नियमों को भी आसान बनाया गया है. अब सिर्फ 33 फीसदी नुकसान पर ही किसानों को लाभ दिया जाता है. पहले राज्य आपदा कोष में पांच साल के लिए 33000 करोड़ रुपये आवंटित था, जिसे हमारी सरकार ने बढ़ाकर 61000 करोड़ रुपये किया है.


Qदेश में भंडारण की कमी के कारण अक्सर अनाज के बर्बाद होने की खबरें आती हैं. अनाज की बर्बादी कम करने और इसके वैल्यू एडिशन के लिए सरकार क्या कदम उठा रही है?


देश में रिकॉर्ड स्तर पर उत्पादन हो रहा है. उपज के बाद उसका भंडारण करना किसानों के लिए एक बड़ी समस्या है, जिसके लिए सरकार भंडारण क्षमता विकसित कर रही है. देश में बड़े पैमाने पर वेयर हाउस का निर्माण किया जा रहा है. सरकार ग्रामीण भंडारण और एकीकृत कोल्ड स्टोरेज के निर्माण पर जोर दे रही है. फसलों की बर्बादी रोकने के लिए फूड प्रोसेसिंग उद्योग को बढ़ावा दिया जा रहा है और प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना के तहत 6 हजार करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है. इस योजना के तहत देश के विभिन्न क्षेत्रों में एग्रो प्रोसेसिंग कलस्टर बनाया जा रहा है. इससे लाखों किसानों को फायदा होगा और लाखों लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे.


Q देश में कुपोषण एक बड़ी समस्या है. इसे देखते हुए सरकार ने फसलों की उत्पादकता बढ़ाने के लिए क्या किया है, जिससे इस समस्या से निजात पायी जा सके?

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा केवल पिछले चार सालों में फसलों की कुल 795 उन्नत किस्में विकसित की गयी हैं. इसे विभिन्न कृषि भौगोलिक क्षेत्रों में परीक्षण कर किसानों तक पहुंचाया गया, जिससे उत्पादकता बढे. कुपोषण की समस्या लंबे समय से भारतीय समाज में व्याप्त है, जिसे दूर करने की दिशा में ऐतिहासिक पहल की गयी है.


इसके अंतर्गत आइसीएआर ने पहली बार फसलों की ऐसी 20 किस्मों का विकास किया, जिनमें पोषक तत्वों की मात्रा सामान्य से काफी अधिक है. कृषि मंत्रालय ने वर्ष 2018-19 को मिलेट वर्ष घोषित किया है. बागवानी फसलें, जिनका पोषणिक सुरक्षा में अहम योगदान है, का इस वर्ष रिकॉर्ड उत्पादन हुआ है. यह 300 के आंकडे को पार कर 305 मिलियन टन हो गया है. बागवानी उत्पादन के मामले में आज भारत विश्व में प्रथम स्थान पर है.


दाल उत्पादन के मामले में पहले स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी. बाजार में दालों के दाम ज्यादा थे. हमने इसे एक चुनौती के रूप में लिया और देशभर में दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भरता लाने के लिए 150 सीड हब बनाये गये और दलहनी फसलों के 2.35 लाख अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन किये गये. आज दालों का लगभग 23 मिलियन टन रिकॉर्ड उत्पादन हुआ है, जो आत्मनिर्भरता के काफी नजदीक है.


https://www.prabhatkhabar.com/news/national/agriculture-and-farmer-welfare-minister-radha-mohan-singh-farmer-futures/1195634.html


Related Articles

 

Write Comments

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

Video Archives

Archives

share on Facebook
Twitter
RSS
Feedback
Read Later

Contact Form

Please enter security code
      Close