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चर्चा में.... | बैंकों से दिए जा रहे कर्जे में कमी के संकेत-- आर बी आई के नये आंकड़े
बैंकों से दिए जा रहे कर्जे में कमी के संकेत-- आर बी आई के नये आंकड़े

बैंकों से दिए जा रहे कर्जे में कमी के संकेत-- आर बी आई के नये आंकड़े

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published Published on Jul 30, 2017   modified Modified on Aug 2, 2017

पिछले एक साल में देश में बैंक ऋण में बढ़वार कम हुई है. यह अर्थव्यवस्था के लिहाज से एक खराब संकेत हो सकता है.

 

बीते माह जारी रिजर्व बैंक के आंकड़ों और प्रेस विज्ञप्ति से पता चलता है कि 26 मई 2017 तक सकल बैंक ऋण की सालाना बढ़वार 3.5 फीसद रही जबकि 27 मई 2016 को बैंक ऋण की सालाना बढ़वार की दर 8.0 प्रतिशत थी.

 

गौरतलब है कि जीडीपी और जीवीए(ग्रास वैल्यू एडेड) के अतिरिक्त किसी अर्थव्यवस्था की बढ़वार का एक संकतक बैंक-ऋण होता है. वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन के बढ़ने में बैंक ऋण एक महत्वपूर्ण घटक है. माना जाता है कि जब अर्थव्यवस्था की स्थिति अच्छी होती है तो विभिन्न क्षेत्रों के उत्पादक निवेश के लिहाज से ज्यादा ऋण लेते हैं. 

 

रिजर्व बैंक द्वारा जारी साप्ताहिक सांख्यिकी से एक दिलचस्प तथ्य यह भी पता चलता है कि 26 मई 2017 को अंत हाने वाले पखवाड़े में सालाना सकल जमा 10.9 फीसद बढ़ी है जबकि एक साल पहले 27 मई 2016 को सालाना सकल जमा के बढ़वार की दर 8.9 फीसद थी.

 

रिजर्व बैंक द्वारा जारी साप्ताहिक सांख्यिकी के आंकड़ों के विश्लेषण के आधार पर इन्क्लूसिव मीडिया की टीम का आकलन है कि क्रेडिट टू डिपॉजिट रेशियो (बैंकों की जमा-राशि का जो हिस्सा कर्ज के रुप में प्रदान किया गया) एक साल की अवधि में घटा है. बीते 27 मई 2016 को क्रेडिट टू डिपॉजिट रेशियो 75.83 प्रतिशत था जो 26 मई 2017 को घटकर 71.97 प्रतिशत रह गया. रिजर्व बैंक की साप्ताहिक सांख्यिकी से यह भी जाहिर होता है कि 23 जून 2017 को अंत होने वाले पखवाड़े में क्रेडिट टू डिपॉजिट रेशियो 72.26 प्रतिशत था.

 

बैंको द्वारा जारी कृषि-कर्ज

 


रिजर्व बैंक द्वारा 30 जून 2017 को जारी प्रेस-विज्ञप्ति में अन्य बातों के अतिरिक्त निम्नलिखित तथ्यों का उल्लेख है--

 

 

* कृषि एवं कृषि से जुड़ी अन्य गतिविधियों में बैंक ऋण मई 2017 में 7.4 प्रतिशत बढ़ा है जबकि मई 2016 में कृषि एवं कृषि से जुड़ी अन्य गतिविधियों में बैंक ऋण की बढ़वार 15.6 प्रतिशत हुई थी.

 

* उद्योगों को मिलने वाले बैंक ऋण में मई 2017 में 2.1 प्रतिशत की कमी आई है जबकि 2016 की मई में उद्योगों को मिलने वाले बैंक ऋण में 0.9 प्रतिशत का इजाफा हुआ था.

 

* प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक सेवा क्षेत्र को बैंक ऋण मई 2017 में 4.0 प्रतिशत बढ़ा है जबकि मई 2016 में सेवा क्षेत्र को बैंक ऋण 9.3 प्रतिशत के दर से बढ़ा था.

 

* मई 2017 में पर्सलन लोन(निजी ऋण) 13.7 प्रतिशत बढ़ा है जबकि मई 2016 में पर्सनल लोन 19.1 प्रतिशत बढ़ा था.

 

रिजर्व बैंक द्वारा जारी आंकड़ों के विश्लेषण के आधार पर इन्क्लूसिव मीडिया का आकलन है कि प्राथमिक क्षेत्र में दिया गये बैंक कर्ज की सालाना वृद्धि दर 27 मई 2016 में 11.7 प्रतिशत थी जबकि 26 मई 2017 को अंत होने वाले पखवाड़े में 4.1 प्रतिशत.

 


उल्लेखनीय है कि सकल बैंक ऋण में दो चीजें शामिल होती हैं- इसमें एक हिस्सा खाद्य ऋण(फूड क्रेडिट) कहलाता है और दूसरा हिस्सा गैर खाद्य ऋण(नॉन फूड क्रेडिट). फूड क्रेडिट की तुलना में नॉन फूड क्रेडिट का हिस्सा बैंक ऋण में ज्यादा है. मिसाल के लिए 26 मई 2017 को अंत होने वाले पखवाड़े में नॉन फूड क्रेडिट का हिस्सा 99.22 प्रतिशत जबकि फूड क्रेडिट का हिस्सा 0.78 प्रतिशत.

 

 

खेती एवं इससे जुड़ी गतिविधियों, उद्योग (सूक्ष्म, लघु, मध्यम और बड़े) और सेवा क्षेत्र को मिले ऋण तथा निजी ऋण को एक साथ मिलाकर नॉन फूड क्रेडिट कहा जाता है.

 


प्राथमिक क्षेत्र को मिला बैंक ऋण नॉन फूड क्रेडिट से अलग होता है. खेती और जुड़ी गतिविधियों, सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों, विनिर्माण, सेवा क्षेत्र, आवास, माइक्रो क्रेडिट, शिक्षा-ऋण, एससी-एसटी के लिए बनाये गये राज्य प्रायोजित संगठनों को मिला बैंक प्राथमिक क्षेत्र के अंतर्गत वितरित बैंक ऋण कहलाता है. 
 
इस कथा के विस्तार और विस्तृत आंकड़ों के लिए आप इन्क्लूसिव मीडिया फॉर चेंज का अंग्रेजी एलर्ट देख सकते हैं. 

 



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