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चर्चा में.... | स्वास्थ्य सेवा का सस्ता और कारगर विकल्प हो सकता है 'एमहेल्थ' -- नई रिपोर्ट
स्वास्थ्य सेवा का सस्ता और कारगर विकल्प हो सकता है 'एमहेल्थ' -- नई रिपोर्ट

स्वास्थ्य सेवा का सस्ता और कारगर विकल्प हो सकता है 'एमहेल्थ' -- नई रिपोर्ट

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published Published on Dec 20, 2017   modified Modified on Dec 20, 2017

देश के स्वास्थ्य ढांचे का 70 फीसद हिस्सा सिर्फ 20 शहरों तक सीमित है. ऐसे में अचरज की बात नहीं जो 30 फीसद भारतीय प्राथमिक स्तर की भी चिकित्सा सुविधा से वंचित है. तो फिर सबको स्वास्थ्य सुविधा फराहम करने का लक्ष्य कैसे हासिल हो ?

 

कंफेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री(सीआईआई) द्वारा जारी एक नीति-पत्र के मुताबिक इस समस्या का समाधान हो सकता है हमारे-आपके हाथ में मौजूद मोबाइल फोन. (देखें नीचे दी गई लिंक)


‘हाऊ एमहैल्थ कैन रिवोल्यूशनाइज इंडियन हेल्थकेयर इंडस्ट्री नाम के इस दस्तावेज के मुताबिक भारत बीमारियों के कारण विश्व पर पड़ने वाले बोझ का 21 फीसद हिस्सा वहन करता है और 30 फीसद भारतीय उपचार पर होने वाले खर्च के कारण गरीबी-रेखा से नीचे चले जाते हैं.

 

साथ ही देश में आबादी की जरुरत के हिसाब से डाक्टर, प्रशिक्षित सहायक(नर्स) और अस्पताली बेड की संख्या बहुत कम है.नीतिपत्र के अनुसार देश में प्रति 1000 आबादी पर 0.7 डाक्टर, 1.3 नर्स और अस्पताली बेड की संख्या 1.1 है.


गौरतलब है कि इस साल की शुरुआत में केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री ने लोकसभा में कहा था कि देश में रजिस्टर्ड एलोपैथिक डाक्टरों की संख्या 30 जून 2016 तक 9,88,922 थी और अगर यह मान लिया जाय कि इनमें से 80 फीसद डाक्टर फिलहाल काम कर रहे हैं तो फिर देश की कुल आबादी ( 1 अरब 32 करोड़) के हिसाब से 1688 लोगों की सेवा के लिए औसतन 1 डाक्टर मौजूद है.(देखें नीचे दी गई लिंक)


बुनियादी ढांचे की कमी झेल रही ऐसी स्वास्थ्य व्यवस्था के भीतर सबको उपचार की सुविधा पहुंचाने की चुनौती के मद्देनजर सीआईआई के दस्तावेज में समाधान के रुप में एमहेल्थ यानि मोबाइल फोन की तकनीक का सहारा लेने की बात सुझायी गई है.


दस्तावेज में ध्यान दिलाया गया है कि मोबाइल पर स्वास्थ्य सेवा हासिल करने की मांग बढ़ने या इसमें रुचि होने की सूरत में एमहेल्थ का विकल्प कामयाब हो सकता है और भारत में ऐसी मांग और दिलचस्पी जोर पकड़ रही है. गूगल ट्रेन्डस् के सहारे हासिल आंकड़ों के आधार पर दस्तावेज में कहा दया है कि ‘मोबाइल हेल्थ', ‘हेल्थ एप्पस', ‘मेडिकल एप्पस्' तथा ‘एमहेल्थ' जैसे ‘सर्च-टर्मस्' की खोज के मामले में भारत दुनिया में शीर्ष के पांच देशों में शामिल है.


स्वास्थ्य सेवा के वैकल्पिक और सहायक ढांचे के रुप में एमहेल्थ को अपनाने के पक्ष में एक बड़ी वजह मोबाइल इंटरनेट ट्रैफिक की बढ़वार के रुप में गिनायी जा सकती है. दस्तावेज के मुताबिक इस साल की शुरुआत(जनवरी,2017) में विश्व के कुल वेब-ट्रैफिक में मोबाइल इंटरनेट ट्रैफिक का हिस्सा 50 फीसद था और भारत इस पैमाने पर 78 प्रतिशत मोबाइल ट्रैफिक के साथ दुनिया के देशों में दूसरे नंबर है. इससे जाहिर होता है कि भारत में ज्यादा से ज्यादा लोग मोबाइल के जरिए इंटरनेट सेवा का इस्तेमाल कर रहे हैं और लोगों के इंटरनेटी व्यवहार में पिछले सालों में बदलाव आया है.


सीआईआई की उपर्युक्त रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक स्तर पर मोबाइल डेटा ट्रैफिक में 2016 से 2021 के बीच सालाना 47 प्रतिशत की वृद्धि-दर के साथ 7 गुना इजाफा होने की संभावना है. रिपोर्ट में इस अवधि में भारत में मोबाइल डेटा ट्रैफिक के सालाना 49 फीसद की वृद्धि दर के साथ इजाफा होने की बात कही गई है.


रिपोर्ट में कहा गया है कि स्वास्थ्य सुविधा फराहम करने का ढांचा भारत में पर्याप्त नहीं है, बीमारियों पर उपचार का खर्चा बढ़ा है और सरकार स्वास्थ्य के मद में बहुत सीमित बजट देती है, साथ ही जीवनशैली में बदलाव के कारण नये किस्म के रोग बढ़े हैं जिनके लिए विशेषज्ञ डाक्टरों की जरुरत है और विशेषज्ञ डाक्टरों तक स्वास्थ्य-सेवा फराहम करने के परंपरागत जरिए(रेफरल आदि) से पहुंचना कठिन है. ऐसे में मोबाइल के चलन के बढ़ने को एक सकारात्मक संकेत मानते हुए लोगों को कम खर्चे में समय पर एक हद तक चिकित्सा और सहायक जानकारी मुहैया करायी जा सकती है.

 

इस कथा के विस्तार के लिए देखें—

 

How mHealth can revolutionise the Indian healthcare industry

https://www.pwc.in/assets/pdfs/publications/2017/how-mheal
th-can-revolutionise-the-indian-healthcare-industry.pdf

 

India short of 5,00,000 doctors, bodies on shoulders reminders of health crisis

http://www.business-standard.com/article/current-affairs/i
ndia-short-of-500-000-doctors-bodies-on-shoulders-reminder
s-of-health-crisis-116090100399_1.html

 

80% of Indian doctors located in urban areas, serving 28% of populace: Report

http://www.business-standard.com/article/current-affairs/8
0-of-indian-doctors-located-in-urban-areas-serving-28-of-p
opulace-report-116081900640_1.html

 

In India 1 doctor serves 1,668 people; 8 lakh doctors in total: Govt

http://www.business-standard.com/article/current-affairs/i
n-india-1-doctor-serves-1-668-people-8-lakh-doctors-in-tot
al-govt-117020300985_1.html

 

  



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