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न्यूज क्लिपिंग्स् | दलित बच्चों पर कहर बन रहा है फूलों की खेती का जहर: रिपोर्ट में खुलासा

दलित बच्चों पर कहर बन रहा है फूलों की खेती का जहर: रिपोर्ट में खुलासा

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published Published on Dec 19, 2020   modified Modified on Dec 20, 2020

-न्यूजलॉन्ड्री,

भारत में एक तरफ छोटे किसान बेहतर आमदनी के लिए भले ही निर्यात होने वाले फूलों की खेती की तरफ आकर्षित हो रहे हैं लेकिन दूसरी तरफ इसकी बड़ी कीमत मासूम बच्चों को चुकानी पड़ रही है. तमिलनाडु के तिरुवल्लूर जिले में बड़े पैमाने पर चमेली की खेती की जाती है, जिसमें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मानकों का उल्लंघन करते हुए प्रतिबंधित जहरीले रसायनों का इस्तेमाल किया जाता है. चौंकाने वाला यह है कि स्कूल का खर्चा निकालने और अपने परिवार को आर्थिक मदद देने के लिए ज्यादातर दलित बच्चे इन खेतों में मजदूरी करते हैं और सप्ताह में एक दिन गंभीर तरीके से बीमार पड़ते हैं.

यह खुलासा 3 दिसंबर को भोपाल गैस त्रासदी को याद करते हुए टॉक्सिक ब्लूम्स: इम्पैक्ट्स ऑफ पेस्टिसाइड्स इन इम्पैक्ट्स ऑफ फ्लोरीकल्चर इंडस्ट्री इन तमिलनाडु, इंडिया रिपोर्ट में किया गया है.

रिपोर्ट के मुताबिक 09 वर्ष से 13 वर्ष की उम्र तक के बच्चों में सिरदर्द, त्वचा संबंधी परेशानियां, उल्टी, थकान, नींद की कमी, झटके, सुस्ती, बुखार और शरीर दर्द जैसी समस्याएं हो रही हैं. वहीं, खेतों में काम करने वाले करीब एक तिहाई बच्चों ने अपने जवाब में कहा कि सप्ताह में वे एक बार जरूर बीमार पड़ते हैं.

पेस्टीसाइड एक्शन नेटवर्क एशिया पैसिफिक (पीएनएपी), सोसाइटी फॉर रूरल एजुकेशन एंड डेवलपमेंट (एसआरईडी) और पैन इंडिया द्वारा जारी संयुक्त अध्ययन में बताया गया है कि तमिलनाडु में फ्लोरीकल्चर फार्मों में अत्यधिक खतरनाक कीटनाशकों (एचएचपी) का इस्तेमाल हुआ है, जो इन खेतों में काम करने वाले दलित बच्चों के स्वास्थ्य को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है.

अमेरिका, नीदरलैंड, यूनाइटेड किंगडम, जर्मनी और यूनाइटेड अरब अमीरात वो गंतव्य देश हैं जहां भारतीय फूल उद्योग सबसे ज्यादा फूलों का निर्यात करता है. कई छोटी जोत वाले किसान, भू-स्वामी और कॉरपोरेशन इसीलिए फूलों की खेती की तरफ आकर्षित हो रही हैं. इन फूलों में जबरदस्त तरीके से कीटनाशकों का इस्तेमाल किया जाता है.

बच्चों, किसानों और खुदरा दुकानदारों के जरिए कुल 109 कीटनाशकों में से 82 फीसदी अत्यधिक खतरनाक कीटनाशकों की पहचान की गई है.

वहीं, कुल 44 अत्यधिक खतरनाक कीटनाशकों में से 32 ऐसे कीटनाशक पाए गए जो एक या उससे अधिक देशों में प्रतिबंधित हैं. और इनमें से ज्यादातर मधुमक्खियों के लिए बेहद ही घातक हैं. यहां तक की यदि इन्हें सूंघा जाए तो बेहोशी तक आ जाए. प्रजनन को विषाक्त करने वाले, कैंसर पैदा करने वाले, इंडोक्राइन यानी हॉर्मोन को बिगाड़ने वाले और जमीन व पानी में दृढ़ता के साथ टिके रहने वाले हैं.

पूरी रपट पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें. 


विवेक मिश्रा, https://www.newslaundry.com/2020/12/18/bhopal-gas-tragedy-dalit-children-agriculture-flowers-farmers-chemicals-poison


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