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न्यूज क्लिपिंग्स् | बुंदेलखंड: पलायन की इनसाइड स्टोरी, ललितपुर में खदानें बंद होने से 50 हजार से ज्यादा लोग बेरोजगार

बुंदेलखंड: पलायन की इनसाइड स्टोरी, ललितपुर में खदानें बंद होने से 50 हजार से ज्यादा लोग बेरोजगार

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published Published on Jun 9, 2020   modified Modified on Jun 9, 2020

-गांव कनेक्शन, 

ललितपुर जिले के मादौंन गांव की रैना सहारिया (40 वर्ष) उन हजारों प्रवासियों में से एक हैं, जो किसी तरह जद्दोजहद कर घर वापस तो आ गईं लेकिन खुश नहीं हैं। वो पहली बार कमाने के लिए अपने दो लड़कों के साथ घर से बाहर निकली थीं और लॉकडाउन की मुसीबत आ गई। रैना को चिंता कोरोना की नहीं, अपना घर चलाने की हैं, क्योंकि जहां उनका घर है वहां दूर-दूर तक कमाई का कोई जरिया नहीं है।

रैना दिल्ली से करीब 600 किलोमीटर दूर बुंदेलखंड में ललितपुर जिले के बिरधा ब्लॉक के मादौंन गांव में रहती हैं। सूखा प्रभावित ये इलाका ललितपुर ही नहीं बुंदेलखंड के सबसे पिछड़े इलाकों में शामिल हैं। पथरीली जमीन में खेती न के बराबर होती है। पानी की दिक्कत पूरे साल रहती है। बावजूद इसके रैना और उनके गांव वालों कभी बाहर जाकर मजदूरी नहीं करते थे, करीब दो साल पहले सब बदल गया। रैना का गांव महावीर वन्य जीव अभ्यारण की परिधि में था। नियमों के अनुसार मादौंन और उसके आसपास की 62 पत्थर की खदानें बंद कर करवा दी गईं। जिसके बाद यहां काम करने वाले रैना जैसे हजारों लोग बेरोजगार हो गए।

"हम पहले गांव के पास ही खदान में काम करते थे, कमाने के लिए कभी बाहर नहीं गए थे, इस बार गए भी तो ये मुसीबत आ गई। लेकिन अब सोच रहे कि यहां आकर भी क्या करेंगे। 20 दिन गांव आए हो गए, 10 दिन स्कूल (क्वारेंटीन) में रहे। अभी तक कोई काम नहीं मिला, आगे पता नहीं क्या होगा।" ये बताते हुए रैना के चेहरे पर बेरोजगारी की चिंता साफ झलक रही थी।

रैना के घर से थोड़ा पहले ही राधा की परचून की दुकान है। राधा बताती हैं, "खदानें बंद होने से हमारे यहां की स्थिति बहुत खराब हो गई। पहले हमारी दुकान में रोज 700-800 रुपए की बिक्री होती थी, अब 100-50 रुपए का सामान बिकता है। सामान कौन खरीदेगा, दीवारें थोड़े सामान खरीदती हैं, सब लोग कमाने बाहर चले गए। कुछ बेचारे पैदल चलकर भूखे प्यासे गांव आ गए हैं। सब बेरोजगार हैं अब।"

ललितपुर के जिला खनिज अधिकारी नवीन कुमार दास, खदानें बंद होने की वजह बताते हैं, "साल में 2017-18 में बिरधा ब्लॉक में 65 खदानों को बंद करवा दिया गया था, क्योंकि इनके पास पर्यावरण स्वच्छता प्रमाणपत्र नहीं था। ये इलाका महावीर वन्य जीव अभ्यारण में आता है। केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु मंत्रालय की गाइडलाइंस के मुताबिक सेंचुरी के 10 किलोमीटर के दायरे में खनन नहीं हो सकता है।"

पूरी रपट पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें. 


अरविंद शुक्ला, https://www.gaonconnection.com/gaon-connection-tvvideos/bundelkhand-inside-story-of-migration-more-than-50-thousand-people-unemployed-due-to-closure-of-mines-in-lalitpur-due-to-lockdown-47673


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