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न्यूज क्लिपिंग्स् | चक्रवात यास से तबाह हुए पश्चिम बंगाल के किसान

चक्रवात यास से तबाह हुए पश्चिम बंगाल के किसान

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published Published on Jul 7, 2021   modified Modified on Jul 8, 2021

-कारवां, 

हर तरफ चेतावनी थी. सायरन और माइक्रोफोन बज रहे थे. सुंदरबन के बाली द्वीप के अन्य निवासियों की तरह परितोष विश्वास के पास भी अपना घर छोड़ने के अलावा कोई चारा नहीं बचा था. वह अपने परिवार के साथ पास की एक चट्टान पर बेसब्री से इंतजार कर रहे थे. "हमने पहले कभी ऐसा कुछ नहीं देखा था," उन्होंने कहा और बताया, "पानी ने एक घंटे में गांव को अपनी चपेट में ले लिया."

"बहुत गंभीर चक्रवाती तूफान" माना जाने वाला चक्रवात यास 26 मई से शुरू हुआ और तीन दिनों तक ओडिशा और पश्चिम बंगाल के तटीय क्षेत्रों में कहर बरपाता रहा. ज्वार की लहरों ने तटीय गांवों को तबाह कर दिया और मूसलाधार बारिश ने पड़ोसी क्षेत्रों को बर्बाद. समंदर का पानी अपने रास्ते में आए तटबंधों को पार कर घरों, खेतों और मछलियों के तालाबों में घुस आया और हजारों लोगों को अपने सामान और आजीविका से महरूम कर दिया. चक्रवात ने ओडिशा के 11000 गांवों में 60 लाख लोगों को प्रभावित किया है. पश्चिम बंगाल में तीन लाख घर क्षतिग्रस्त हुए है और एक करोड़ लोग प्रभावित हुए हैं. सुंदरबन क्षेत्र, जो बंगाल का एक ज्वारीय डेल्टा क्षेत्र है, इससे गंभीर रूप से प्रभावित हुआ है. एक महीने से अधिक समय से किसान अपनी आजीविका को हुए नुकसान से निपटने के लिए संघर्षरत हैं.

जब विश्वास के गांव में ज्वार कम हुआ और वह अपने घर और खेतों को देखने के लिए भागे लेकिन सब कुछ बर्बाद हो चुका था. उनका घर घुटने तक पानी में डूबा हुआ था. उनके परिवार का सामान, खाना, बारह बोरी धान की फसल, जिसे उन्होंने बाद में इस्तेमाल के लिए रखा था, उनके बेटे की स्कूल की किताबें, कुछ भी नहीं बचा.

विश्वास एक सीमांत किसान हैं और पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के गोसाबा ब्लॉक के बाली के निवासी हैं. उनका ढाई बीघा खेत, जो मौसमी सब्जियों- खीरा, भिंडी, और लौकी, से भरा हुआ था, डूब गया. उनके तालाब की सभी मीठे पानी की मछलियां समंदर के खारे पानी के घुस आने के कारण मर गईं. “सड़ती मछली से उठती बदबू बर्दाश्त से बाहर हो रही थी. मैंने सारी मरी हुई मछलियों को इकट्ठा किया और उन्हें समुद्र में फेंक दिया.” मछली को फिर से प्रजनन के लिए विश्वास को पूरे तालाब को पंप करना होगा और ताजे या बारिश के पानी से भरना होगा. ब्लीचिंग और वातन यानी हवा का मिश्रण महंगा पड़ता है. ताजे पानी के धान या अन्य मौसमी सब्जियों को फिर से उगाने के लिए मिट्टी को ठीक होने में भी कम से कम तीन साल लगेंगे. चक्रवात से उन्हें करीब पचास हजार रुपए का नुकसान हुआ है.

विश्वास की तरह सुंदरबन के हजारों निवासीयों, जो इस क्षेत्र के पारंपरिक व्यवसायों जैसे खेती और मछली पालन पर निर्भर हैं, का भविष्य अनिश्चय की स्थिति में है. बार-बार आने वाले चक्रवातों की चपेट में आने से उनके लिए यह नुकसान और बहाली का थकाऊ खेल बन गया है. इस बार पश्चिम बंगाल के समुद्र तट के कई गांवों ने खराब गुणवत्ता वाले तटबंधों का विरोध किया, जो क्षेत्र में पानी के खतरे के कारण हर बार टूट जाते या उनमें दरार पड़ जाती है. 5 जून को पर्यावरण दिवस के अवसर पर गोसाबा ब्लॉक, घोरमारा द्वीप और मौसुनी द्वीप के कई गांवों के लोगों ने सरकारी सहायता के बजाय ठोस तटबंधों की मांग को लेकर मार्च और धरना प्रदर्शन किया.

चक्रवात यास ने पश्चिम बंगाल में 136 बाढ़ अवरोधों को तोड़ दिया. द टेलीग्राफ की एक रिपोर्ट के अनुसार प्रशासनिक बैठकों में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तटबंधों के अप्रभावी पुनर्निर्माण पर "निराशा व्यक्त की" है. उन्होंने अधिकारियों से बार-बार आने वाली बाढ़ के स्थायी समाधान पेश करने और क्षतिपूर्ति राशि का कुशलतापूर्वक उपयोग करने को कहा है. यास के बाद एक प्रेस वार्ता में बनर्जी ने कहा कि इस चक्रवात ने लगभग 2.21 लाख हेक्टेयर फसल और 71560 हेक्टेयर बागवानी को नुकसान पहुंचाया है. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को 20000 करोड़ रुपए के नुकसान की एक रिपोर्ट सौंपी है.

दक्षिण 24 परगना के डायमंड हार्बर में पान के किसानों को भारी नुकसान हुआ है. डायमंड हार्बर-I ब्लॉक के गांव पुरबा गोबिंदपुर निवासी 45 वर्षीय निरंजन मैती का अम्फान चक्रवात के वक्त पान एक पूरा बागान बर्बाद हो गया था. लगभग दो लाख रुपए के नुकसान के बाद उन्हें अपने दो शेष बचे बागानों के पुनर्निर्माण के लिए 1.5 लाख रुपए और लगाने पड़े. अभी एक साल ही हुआ था कि यास चक्रवात ने उस जगह को फिर बर्बाद कर दिया और उन्हें एक लाख रुपए का नया झटका लगा. यास के दौरान एक भारी तूफान ने पान के पत्तों को सुखा दिया और शाखाओं को तोड़ दिया. उन्होंने कहा, "इसे ठीक करने में फिर से बहुत मेहनत और पैसा लगेगा. मैं पहले से ही लगानी कम करने को लेकर परेशान था क्योंकि 2020 के लॉकडाउन के बाद मांग में भारी कमी आई है. आमतौर पर मैं 10000 रुपए कमाता हूं लेकिन इस अप्रैल में मैं केवल 3000 रुपए कमा सका.”

पश्चिम बंगाल में 15 लाख से अधिक किसान पान की खेती पर निर्भर हैं. यास की चपेट में आए पान के किसानों की सहायता के लिए राज्य सरकार अपने राहत अभियान दुआरे ट्रान के तहत उनमें से प्रत्येक को 5000 रुपए का भुगतान कर रही है. इस एकमुश्त योजना में यास से प्रभावित हितग्राहियों को ग्राम पंचायतों में स्थापित बूथ शिविरों पर 3 जून से 18 जून के भीतर आवेदन करना है.

अन्य किसानों को फसल को हुए नुकसान की मात्रा के आधार पर 1000 रुपए से 2500 रुपए के बीच सहायता दी जाएगी. जिन परिवारों के घर पूरी तरह या आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हो गए हैं, वे भी दुआरे ट्रान के तहत राहत के हकदार हैं. जिनके घर पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गए हैं सरकार ने उन्हें 20000 रुपए का मुआवजा दिया है और आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त घरों के लिए 5000 रुपए. दुआरे ट्रान के तहत कम से कम 3.6 लाख लोगों ने राहत का दावा किया है. राहत वितरण कार्य 1 जुलाई से शुरू होगा. राज्य सरकार की समय-सीमा के अनुसार पात्र हितग्राहियों को 7 जुलाई तक सीधे अपने बैंक खातों में सहायता प्राप्त होगी.

जिन किसानों से मैंने बात की उनके अनुसार उनकी राह में कई रोड़े हैं. वे बताते हैं कि खराब जागरूकता और डिजिटल साक्षरता की कमी, सरकारी कार्यालयों में बार-बार आने की जरूरत, सहायता प्राप्त करने में देरी और फिर आखिर में थोड़ी ही प्रतिपूर्ति मिलना थकाने वाली बाते हैं. मैंने ग्रामीण विकास मंत्रालय की संस्था राष्ट्रीय ग्रामीण विकास और पंचायती राज संस्थान के प्रोफेसर रवींद्र एस गवली से बात की. उनका कहना है, "जमीनी स्तर तक पहुंचने के लिए राहत और सामुदायिक भागीदारी का विकेंद्रीकरण आवश्यक है. राज्य सरकारें आपदाग्रस्त गांवों में पंचायत स्तर पर युवा समितियां बनाकर शुरुआत कर सकती हैं. ऐसी टीमों को डिजिटल रूप से सक्षम होना चाहिए और साथ ही उन्हें ग्रामीणों को सरकारी लाभ प्राप्त कराने में सक्षम होना चाहिए.”

चक्रवात यास के लिए बनर्जी का राहत मुआवजा सबसे अधिक प्रभावित जिलों, पूर्व मेदिनीपुर, पश्चिम मेदिनीपुर, उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना, हावड़ा, के लिए ही है. मालदा जिले जैसे अन्य क्षेत्रों में प्रभावित किसान इससे बाहर है. मालदा निवासी 29 वर्षीय किसान इस्लाम उनमें से एक हैं. जब भारत में कोविड-19 की पहली लहर आई और केंद्र ने देशव्यापी लॉकडाउन लगाया, तो उन्होंने मुंबई में अपनी संविदा पर लगी नौकरी छोड़ दी और चांदीपुर गांव में अपने परिवार के पास लौट आए. अपनी वापसी के एक साल बाद इस्लाम अब कर्ज में डूबे हुए हैं और अपने घर के लोगों की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं. उनके परिवार में एक बीमार चाचा, उनकी पत्नी और पांच महीने का बेटा है.

पूरी रपट पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें. 


ऋतुपर्णा पालित, https://hindi.caravanmagazine.in/environment/how-cyclone-yaas-impacted-farmers-livelihoods-hindi


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