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न्यूज क्लिपिंग्स् | नेपाल से तनाव के बीच क्या बदल जाएगा सीमा के आर-पार रहे लोगों का रिश्ता?

नेपाल से तनाव के बीच क्या बदल जाएगा सीमा के आर-पार रहे लोगों का रिश्ता?

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published Published on Jun 29, 2020   modified Modified on Jun 30, 2020

-न्यूजलॉन्ड्री,

12 जून को लगन राय को नेपाल आर्म्ड पुलिस फोर्स (एपीएफ, बोलचाल की भाषा में उन्हेंने पाली पुलिस कहकर संबोधित किया जाता है) ने बंधक बना लिया था. लगन राय उस रोज़ की घटना को याद करते हुए बताते हैं कि वे जानकी नगर-नारायणपुर बॉर्डर पर अपनी बहू और पोता-पोती को समधन (बहू की मां) से मिलवाने गए थे. नेपाल पुलिस ने उन लोगों को रोकने की कोशिश की. उसी दौरान उनके बेटे को नेपाली पुलिस ने डंडे से पीट दिया. लगन के बेटे विनय राय का ससुराल नेपाल के गुलरिया गांव में हैं. लगन राय का परिवार सीतामढ़ी के सोनबरसा प्रखंड में इसी सीमावर्ती जानकी नगर गांव में रहता है.

लगन बताते हैं कि वे नेपाल पुलिस से शिकायत करने गए कि उनके बेटे को क्यों मारा तो पुलिस उन्हें ही गालियां देने लगी. बहस सुनकर भारतीय क्षेत्र से करीब 75-80 लोग जुट गए थे. वे बताते हैं, "फिर उन्होंने (नेपाल पुलिस ने) 5-6 और जवानों को बुला लिया और वे सभी हवाई फायरिंग करने लगे. इसके बाद वहां मौजूद लोग भागने लगे. वे लोग मुझे मारते हुए घसीट कर ले गए और कैंप में जाकर रख दिया. वहां जवान लगातार पीटते रहे."

लगन आगे बताते हैं, "वे लोग मुझे पीटते हुए यह कहने का दबाव बना रहे थे कि मैं यह बोलूं कि नेपाल सीमा में घुसकर 150 भारतीय लूट पाट करने लगे जिसके कारण गोली चली और इसलिए पुलिस ने मुझे पकड़ा है. लेकिन मैंने कहा कि मेरी जान चली जाएगी ये मंजूर है लेकिन ये बात मैं कभी नहीं बोलूंगा. ये बोलने के बाद वे लोग और पीटने लगे. वे लगातार दबाव बना रहे थे कि अपने गांव के 10-20 लोगों का नाम लिखवाओ. गाली देते हुए उन्होंने कहा कि तुम्हें मारकर फेंक देंगे. मैंने जवाब दिया कि जो करना है करलें पर मैं कुछ भी नहीं बोलूंगा. 2-3 घंटे धूप में रखकर लगातार पीटा गया."

भारतीय पक्ष के कूटनीतिक दबाव के बाद नेपाल पुलिस अगले दिन सुबह करीब 3:30 बजे लगन को छोड़ने बॉर्डर पर पहुंची. इसके बारे में लगन कहते हैं, "बॉर्डर पर लाने के बाद भी मुझे अगले 1 घंटे तक गाड़ी में ही रखा गया. स्थानीय बीडीओ, दारोगा और अन्य अधिकारियों के साथ कागजी प्रक्रिया होने के बाद मुझे छोड़ा गया."

नेपाल पुलिस द्वारा बंधक बनाए गए जानकी नगर निवासी लगन राय
राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने नेपाल बॉर्डर पर हुईघटना को लेकर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है. हालांकि 15 जून को उत्तराखंड जनसंवाद वर्चुअल रैली को संबोधित करते हुए रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा था, "भारत-नेपाल के बीच कोई आम रिश्ता नहीं है, हमारे बीच रोटी और बेटी का संबंध हैं और दुनिया की कोई ताकत इसे तोड़ नहीं सकती है."

राजनाथ सिंह के भारत और नेपाल से रिश्तों पर जोर देने का संर्दभ था. नेपाल की ओर से एक साथ कई चीज़ें होती हुई दिख रहीथीं. एक तरफ नेपाल ने संवैधानिक रूप से भारत के कालापानी, लिंप्याधुराऔर लिपुलेख कोअपने नए नक्शे में शामिल कर लिया. दूसरी तरफ ये फायरिंग की घटना और 22 जून को एक और चिंतित करने वाली खबर आई कि नेपाल गंडक नदी पर बने वाल्मिकी नगरबराज में मरम्मत का काम करने नहीं दे रहा ह

हालांकि एक दिन बाद ही यह रिपोर्ट आयी कि “कंफ्यूजन” को दूर कर लिया गया है. दरअसल, नेपाल भारतीय मजदूरों को बिना कोविड नेगेटिव सर्टिफिकेट के अपनी सीमा में घुसने नहीं दे रहा था. फिलहाल मजदूरों की स्क्रीनिंग वाल्मीकि नगर के ही एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर होगी और मरम्मत का कार्य जारी रहेगा.

12 जून को बिहार-नेपाल बॉर्डर पर हुई तनातनी का शिकार सिर्फ लगन ही नहीं हुए. सीमा पर हुई फायरिंग की घटना में विकेश राय नाम के शख्स की गोली लगने से मौत हो गई. दो और लोग भी घायल हुए.

लगन के अनुसार उनके पकड़े जाने के बाद फायरिंग की घटना घटी. विकेश को गोली कैसे गोली लगी? इस पर लगन ने अपनी अनभिज्ञता जाहिर की. लगन राय के साथ हुई इस घटना और विकेश की हत्या के बाद गांव में आक्रोश का माहौल है. गांव के लोगों ने बॉर्डर पर धरना-प्रदर्शन भी किया. उनके एक बेटे ने कहा कि अब तक इस घटना की एफआईआर दर्ज नहीं हुई है.

सीमा के सटे इलाके मेंविकेश राय के परिवार का खेत है. वे लुधियाना में सिलाई का काम करते थे. घटना से 10 दिन पहले ही वे वापस आए थे. विकेश राय के भाई पपलेश राय बताते हैं, “जब 12 जून की सुबह विकेश और अन्य लोग खेत में काम कर रहे थे. फायरिंग की आवाज के बाद वे लोग वहां इकट्ठा हो गए.”

पपलेश आगे बताते हैं, "फायरिंग मेंगोली लगने के कारण विकेश की मौत मौके पर ही हो गई. दो अन्य लोग गोली लगने से बुरी तरह घायल हो गए थे. पहले कभी इस तरह की घटना नहीं हुई थी. ऐसी कोई उम्मीद ही नहीं थी. हम लोगों ने दो दिन बॉर्डर पर प्रदर्शन किया लेकिन फिर प्रशासन के आश्वासन पर हमने बंद कर दिया."

वे कहते हैं, "दो साल पहले ही विकेश की शादी हुई थी. उसकी पत्नी गर्भवती है. हम चाहते हैं कि सरकार उनकी पत्नी को नौकरी दे और मुआवजा दे."

मुआवजे की मांग के लिए विकेश के पिता नागेश्वर राय ने सोन बरसा थाना को एक पत्र भी लिखकर दिया है. पत्र के मुताबिक, नागेश्वर ने 25 लाख रुपये मुआवजे और विकेश की पत्नी गुंजा को आंगनवाड़ी सेविका में नियोजित करने की मांग की है ताकि उनके परिवार की रोज़ी-रोटी का इंतज़ाम हो सके.

पूरी रपट पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें. 


साकेत आनंद व रोहिन, https://www.newslaundry.com/2020/06/27/india-nepal-border-tension-pm-kp-oli-revolt-face


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