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न्यूज क्लिपिंग्स् | क्या है WHO के नए एअर क्वॉलिटी गाइडलाइंस में, भारत के लिए इसके क्या मायने हैं

क्या है WHO के नए एअर क्वॉलिटी गाइडलाइंस में, भारत के लिए इसके क्या मायने हैं

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published Published on Sep 24, 2021   modified Modified on Sep 26, 2021

-द प्रिंट,

15 वर्षों के अंतराल के बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन ने वैश्विक वायु गुणवत्ता दिशानिर्देशों (ग्लोबल एअर क्वॉलिटी गाइडलाइंस) का एक नया और अद्यतन संस्करण जारी किया, जो पूरे विश्व से इकट्ठा किए गये नवीनतम वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर इस दुनिया की समूची आबादी के स्वास्थ्य की रक्षा हेतु अनुशंसित वायु गुणवत्ता स्तरों की रूपरेखा तय करता है.

इस बारे में डब्ल्यूएचओ द्वारा 2005 में दिए गये आखिरी अपडेट के बाद से इस तरह के सबूतों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है जो यह दर्शाते हैं कि कैसे वायु प्रदूषण स्वास्थ्य के विभिन्न पहलुओं को प्रभावित करता है और कैसे लगातार इसके संपर्क में रहना स्वास्थ्य के अन्य प्रमुख वैश्विक खतरों, जैसे अस्वास्थ्यकर आहार और धूम्रपान के बराबर ही घातक होता है.

एक अनुमान के आधार पर हर साल वायु प्रदूषण के संपर्क में आने से वैश्विक स्तर पर 7 मिलियन (70 लाख) लोगों की समय से पहले ही मौत हो जाती है.

डब्ल्यूएचओ के ये नए दिशानिर्देश मुख्यतः छह प्रदूषकों- पार्टिकुलेट मैटर (पीएम), ओजोन (O₃), नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO₃) सल्फर डाइऑक्साइड (SO2) और कार्बन मोनोऑक्साइड (CO)- जो न केवल अपने आप में स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा हैं बल्कि अन्य हानिकारक प्रदूषकों की मात्रा में भी वृद्धि करते हैं- के लिए वायु गुणवत्ता के स्तर तय करने की संस्तुति करते हैं.

इसके अनुसार 10 और 2.5 माइक्रोमीटर व्यास के बराबर या उससे कम व्यास वाले पार्टिकुलेट मैटर (अभिकणीय पदार्थ)- जिन्हें क्रमशः पीएम 10 और पीएम 2.5 के रूप में जाना जाता है- से जुड़े स्वास्थ्य संबंधी खतरे विशेष तौर पर चिंता का विषय हैं. ये अतिसूक्ष्म कण फेफड़ों में गहराई तक प्रवेश कर सकते हैं और पीएम 2.5 तो रक्तप्रवाह में भी प्रवेश कर सकता है, जिससे हृदय और श्वसन संबंधी बीमारियां हो सकती हैं.

पूरी रपट पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें. 


मोहना बासु, https://hindi.theprint.in/health/what-who-new-air-quality-guidelines-say-and-what-it-means-for-india/240441/


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