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न्यूज क्लिपिंग्स् | UN की इस बड़ी अधिकारी ने क्यों कहा, मौत की सज़ा देने से रेप के मामले नहीं रुकते?

UN की इस बड़ी अधिकारी ने क्यों कहा, मौत की सज़ा देने से रेप के मामले नहीं रुकते?

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published Published on Oct 19, 2020   modified Modified on Oct 19, 2020

-लल्लनटॉप,

असल गुंजन सक्सेना ने कहा- कभी पंजा नहीं लड़वाया गया

हेमा मालिनी कैसे पहुंचीं बुलंदी के मुकाम पर?

रकुलप्रीत की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या आदेश दिया है?

इन सबके बारे में जानेंगे ऑडनारी के स्पेशल न्यूज बुलेटिन WIN, यानी विमन इन न्यूज में. जहां हम बात करते हैं महिलाओं की, उनसे जुड़ी खबरों की और ख़बरों में महिलाओं की. बढ़ते हैं पहली खबर की ओर.

# चैनल्स के खिलाफ एक्ट्रेस की शिकायत पर दो हफ्ते में फैसला!

एक्ट्रेस रकुल प्रीत सिंह ने कुछ न्यूज़ चैनल्स के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी. आरोप लगाया था कि इन चैनलों ने बॉलिवुड ड्रग्स केस में उनके बारे में ‘फेक न्यूज़’ चलाई. इस पर दिल्ली हाई कोर्ट ने 15 अक्टूबर को सुनवाई की. ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के मुताबिक, कोर्ट ने NBSA यानी न्यूज़ ब्रॉडकास्ट स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी को दो हफ्ते में इस पर फैसला लेने को कहा है.

NBSA का काम चैनलों पर प्रसारित होने वाली खबरों को लेकर आने वाली शिकायतों पर विचार करना और फैसला लेना है. रकुल की जो शिकायत है, वो न्यूज़ चैनल्स के खिलाफ है तो ज़ाहिर तौर पर NBSA के पास इसे जाना था. कोर्ट में गुरुवार की सुनवाई के दौरान NBSA के वकील ने कहा कि उन्होंने 3 अक्टूबर और 12 अक्टूबर को इस मुद्दे पर सुनवाई की थी, लेकिन फैसला नहीं हो पाया. वकील ने फैसला लेने के लिए वक्त मांगा तो दो हफ्ते का समय दिया गया. कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 11 दिसंबर की तारीख तय की है.

# असल गुंजन सक्सेना ने कहा- कभी पंजा नहीं लड़वाया गया

‘गुंजन सक्सेना: दी कारगिल गर्ल’. फिर से खबरों में है. क्योंकि दिल्ली हाई कोर्ट में चल रहे मामले में असली गुंजन सक्सेना ने अपना पक्ष रखा है. दरअसल, फिल्म के कुछ सीन्स में इंडियन एयरफोर्स (IAF) के कुछ अधिकारियों को ‘स्त्री विरोधी’ सोच रखते दिखाया गया था. एक सीन में गुंजन के किरदार को पुरुष अधिकारी से पंजा लड़ाने के लिए मजबूर किया गया. ऐसे कई सीन पर एयरफोर्स ने विरोध जताया था. केंद्र सरकार ने भी फिल्म वालों के खिलाफ मुकदमा कर दिया.

असली गुंजन सक्सेना का किरदार फिल्मी पर्दे पर जाह्नवी कपूर ने निभाया है.
इसी मुकदमे पर 15 अक्टूबर यानी गुरुवार को दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई हुई. केंद्र सरकार और फिल्म बनाने वाली कंपनी धर्मा प्रॉडक्शन के वकील के बीच बहस हुई. केंद्र का पक्ष अडिशनल सॉलिसिटर जनरल संजय जैन ने रखा. उन्होंने असल जिंदगी की गुंजन सक्सेना के हलफनामे का जिक्र किया, जिसमें उन्होंने कहा है कि उनके साथ कभी भी पंजा लड़ाने वाली घटना नहीं घटी. ये भी कहा कि उन्हें कभी फिल्म के प्लॉट के बारे में आपत्ति दर्ज कराने का मौका नहीं दिया गया था.

# सुप्रीम कोर्ट ने घरेलू हिंसा का शिकार महिलाओं को लेकर अहम फैसला सुनाया

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि घरेलू हिंसा की शिकार महिला के लिए घर का मतलब पति के मालिकाना हक वाले घर से ही नहीं ही. उसे पति के रिश्तेदारों के ऐसे घरों से भी नहीं निकाला जा सकता, जहां दोनों साथ रहे हों. जस्टिस अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली 3 जजों की बेंच ने घरेलू हिंसा अधिनियम, 2005 के तहत ये फैसला सुनाया है.

घरेलू हिंसा को लेकर सुप्रीम कोर्ट का नया फैसला बहुत सी महिलाओं को राहत देने वाला है..
बेंच ने कहा कि घरेलू हिंसा अधिनियम की धारा-2(S) में पति के साझाघर यानी शेयर्ड हाउसहोल्ड की परिभाषा दी गई है. इसके अनुसार हिंसा के बाद घर से निकाली गई महिला को साझाघर यानी ससुरालवालों के घर में भी रहने का अधिकार है. इस कानून के तहत महिला, पति के ऐसे रिश्तेदारों के घर में रहने की मांग भी कर सकती है, जहां वह घरेलू संबंधों की वजह से पहले रह चुकी हो, भले ही उस घर में उसके पति का हिस्सा न हो. सुप्रीम कोर्ट का ये फैसला साल 2007 के एसआर बत्रा बनाम तरुणा बत्रा मामले के उलट है. उस केस में कहा गया था कि साझा घर में इनलॉज यानी सुसरालवालों और रिश्तेवालों के घर शामिल नहीं होंगे.

# UN की इस बड़ी अधिकारी ने कहा मौत की सज़ा से रेप नहीं रुक सकता

मिशेल बेचलेट. संयुक्त राष्ट्र (UN) में ह्यूमन राइट्स की हाई कमिश्नर हैं. हाल ही में इन्होंने एक बयान दिया. कहा कि रेप एक भयानक अपराध है, लेकिन इसका समाधान मौत की सज़ा नहीं है. मिशेल ने एक वीडियो मैसेज में कहा-

कुछ हफ्तों से भारत, बांग्लादेश, पाकिस्तान समेत कई देशों से रेप की डराने वाली खबरें आ रही हैं. लोग गुस्से में हैं. इंसाफ मांग रहे हैं. समाधान चाह रहे हैं. मैं भी सर्वाइवर्स और इंसाफ मांगने वालों के साथ हूं. लेकिन मैं इस बात से चिंतित हूं कि कई जगहों पर अपराधियों के लिए क्रूर, अमानवीय और मौत की सज़ा मांगी जा रही है. कई जगहों पर तो कानून बन भी गए हैं. मौत की सज़ा से रेप की घटनाएं कम नहीं होंगी. कोई सबूत नहीं है इसका. सबूत ये दिखाते हैं कि सज़ा की गंभीरता के बजाए इसकी निश्चितता अपराध को रोकती है.

पूरा लेख पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें. 


लालिमा, https://www.thelallantop.com/oddnaari/women-in-news-rakul-preet-singh-gunjan-saxena-hema-malini-michelle-bachelet-tsai-ing-wen-durgawati-oraon/


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