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न्यूज क्लिपिंग्स् | छत्‍तीसगढ़ : बस्तर के धान की होगी जीन मैपिंग

छत्‍तीसगढ़ : बस्तर के धान की होगी जीन मैपिंग

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published Published on Dec 6, 2014   modified Modified on Dec 6, 2014
नारायणपुर(ब्यूरो)। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् के देश में शामिल 12 हॉट स्पॉट्स में बस्तर भी है और यहां की जैव विविधिता को देखते वैज्ञानिक नई किस्मों के बीजों की खोज कर रहे हैं। यदि बस्तर के किसानों की ओर से दिए गए बीज खरे पाए जाते हैं तो इनकी जीन मैपिंग होगी और किसानों को इसकी रायल्टी मिलती रहेगी। ऐसा बौद्घिक संपदा की सुरक्षा के लिए किया जा रहा है।

इसी सिलसिले में किसानों को जागरूक करने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् (आईसीएआर)के आंचलिक परियोजना निदेशालय जबलपुर से आए प्रमुख वैज्ञानिक डॉ यूएस गौतम ने बताया कि भारत में परिषद् ने 12 इलाकों को हॉट स्पॉट में रखा है।

इनमें उनके जोन में छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश एवं ओड़िशा में पांच हॉट स्पॉट हैं। इनमें बस्तर, छोटा नागपुर, कोरापुट, बुंदेलखण्ड एवं मालवा का पठार शामिल हैं। ये हॉट स्पॉट जैव विविधता से भरे हैं और इनमें विलक्षण गुणधर्म वाली फसलों की किस्म मिलने की ज्यादा उम्मीद है।

52 दिनों में पकने वाली भी एक किस्‍म

बस्तर के मर्दापाल गांव के 20-22 किसानों का एक समूह है। इस समूह में सोनाधर एवं अन्य किसान हैं। इनके पास धान की दो सौ किस्मों के संरक्षित बीज मिले। इन्होंने कृषि विज्ञान केन्द्र से पंजीयन कराकर बीजों को आईसीएआर को सौंपा है। इनमें एक किस्म को 52 दिनों में पकने वाली बताया गया है। इस धान बीज एवं अन्य बीजों का आईसीएआर नई दिल्ली में दो साल तक परीक्षण किया जाएगा।

इनमें विलक्षण गुण मिलने की दशा में ये बीज उन किसानों के समूह के नाम पर हो जाएगा और इस समूह को 15 से 18 साल तक रायल्टी मिलती रहेगी। इसके बाद पंजीयन का नवीनीकरण कराना होगा, बशर्ते ये बीज तब तक उनके पास उपलब्ध रहे। पंजीयन केवल समूह का ही नहीं बल्कि व्यक्तिगत तौर पर भी किसान करवा सकते हैं।

डॉ गौतम ने बताया कि दो साल में किसान के बीज को विशेष किस्म का पाया जाता है तो इस किस्म के साथ दूसरे विशेष गुण वाली किस्म के साथ जीन मैपिंग की जाएगी अर्थात दो गुणों को एक पौधे में समाहित किया जााएगा। इससे बनने वाली नई किस्म दो विशेष गुण वाली हो जाएगी।

73 किस्‍मों का कराया पंजीयन

अब तक नारायणपुर जिले में 73 किस्मों का पंजीयन कराया गया है। इनमें से 20 किस्मों को नई दिल्ली में परीक्षण के लिए भेज दिया गया है। छग में 1200 किस्मों का पंजीयन किसान करवा चुके हैं। आईसीएआर 88 फसलों का पंजीयन कर इनका परीक्षण कर रहा है। इनमें धान, मक्का, गेहूं, सब्जी, मसाला एवं अन्य फसल शामिल हैं। ये काम दरअसल किसानों को उनका हक दिलाने के लिए किया जा रहा है। भारत ही एक ऐसा देश है जहां किसानों को इस तरह से उनका हक दिया जा रहा है।

किसान अधिकार अधिनियम 2001 के तहत ये काम किया जा रहा है। बुधवार को इस पर किसानों की एक कार्यशाला का आयोजन रामकृष्ण मिशन आश्रम के ब्रेहबेड़ा स्थित कृषक प्रशिक्षण केन्द्र में आयोजित किया गया था। इसमें किसानों को एक डाक्यूमेंट्री दिखाई गई। किसानों ने कई सवाल किए। इनका जवाब दिया गया। इस मौके पर मनीष महाराज, केवीके प्रभारी डॉ एनके साहू, वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारी एमडी बैस एवं अन्य विशेषज्ञ मौजूद थे।

दस लाख का पुरस्कार

मर्दापाल के किसान सोनाधर एवं उनके साथियों को वैरायटी संरक्षित रखने के लिए नई दिल्ली में केन्द्रीय कृषि मंत्री दस लाख रुपए के पुरस्कार से सम्मानित करेंगे। इससे किसान अपने आप देश की हस्ती बन जाएंगे। विशिष्ट गुण वाली किस्म के बीज देने वाले किसानों के लिए 50000 से 10 लाख रुपए तक का इनाम रखा गया है।

हर साल एक-एक लाख के दस पुरस्कार आईसीएआर की ओर से दिए जाते हैं। ये बौद्धिक संपदा को बचाने की एक पहल है। इस तरह की कार्यशाला का आयोजन मंगलवार को कांकेर में किया गया था। इस सप्ताह दंतेवाड़ा और बस्तर में भी किसानों को जागरूक करने कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा।


- See more at: http://naidunia.jagran.com/special-story-gene-mapping-of-rice-in-bastar-will-244458#sthash.MIGYhU49.dpuf


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