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न्यूज क्लिपिंग्स् | बेमौसमी बढ़ती गर्मी से फसलों को बचा सकता है बायोचार, वैज्ञानिकों ने बताया तरीका

बेमौसमी बढ़ती गर्मी से फसलों को बचा सकता है बायोचार, वैज्ञानिकों ने बताया तरीका

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published Published on Feb 24, 2023   modified Modified on Feb 24, 2023

डाउन टू अर्थ, 24 फरवरी 

वैज्ञानिकों का मानना है कि ‘बायोचार’ सदियों से लोगों द्वारा उपयोग की जाने वाली एक पारंपरिक कृषि पद्धति रही है। कृषि और पेड़ों का कचरा जैसे कार्बनिक पदार्थों को जलाने से बना चारकोल जैसे पदार्थ को बायोचार कहते हैं।

वैज्ञानिकों ने जलवायु-स्मार्ट कृषि (सीएसए) अभ्यास के रूप में इसकी क्षमता का विश्लेषण करने के लिए बायोचार पर दुनिया भर के लगभग 600 अध्ययनों में व्याप्त आंकड़ों को विश्लेषण किया है।

जलवायु-स्मार्ट कृषि (सीएसए) एक व्यापक दृष्टिकोण है जो स्थायी कृषि विधियों से बहुत आगे है। इसका उद्देश्य क्षेत्र में रहने वाले और काम करने वाले लोगों की आजीविका पर अच्छा असर डालते हुए बढ़ती आबादी की भोजन की मांग को पूरा करने के लिए फसल की पैदावार को स्थायी रूप देना है। सीएसए मिट्टी के स्वास्थ्य को बढ़ाता है और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करके जलवायु के अनुकूल बनाता है।

शोधकर्ता रेन की टीम ने अभ्यास, इसकी खूबियों, चुनौतियों और सीमाओं की व्यापक समझ हासिल करने के लिए बायोचार शोध पर आंकड़े जमा किए।

रेन कहते हैं, हम खेत के अवलोकन, माप, बड़े आंकड़ों का विश्लेषण और संख्यात्मक मॉडलिंग के माध्यम से बायोचार को जलवायु-स्मार्ट प्रथाओं के रूप में अपनाना चाहते थे। हम इस बात का मूल्यांकन करते हैं कि क्या यह टिकाऊ कृषि अभ्यास खाद्य उत्पादन, मिट्टी के स्वास्थ्य और पर्यावरणीय स्थिरता के मामले में जलवायु-स्मार्ट कृषि अभ्यास के रूप में काम कर सकता है।

उन्होंने कहा हम इससे संबंधित पानी और पोषक तत्वों के पदचिह्न और जलवायु लचीलापन को बढ़ावा देने की क्षमता को मापने की उम्मीद करते हैं।
पूरी ख़बर- डाउन टू अर्थ


डाउन टू अर्थ, 24 फरवरी https://www.downtoearth.org.in/hindistory/agriculture/farming/now-climate-smart-agriculture-will-be-done-with-biochar-scientists-told-the-benefits-87870#:~:text=%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%9A%E0%A4%BE%E0%A4%B0%20%E0%A
 

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