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न्यूज क्लिपिंग्स् | बदल दिया खेती का पैटर्न, हर माह 30 हजार कमा रही ये महिला

बदल दिया खेती का पैटर्न, हर माह 30 हजार कमा रही ये महिला

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published Published on May 14, 2018   modified Modified on May 14, 2018
कोतबा, जशपुर (छत्तीसगढ़)। सौर सुजला योजना की प्रेरणा से रोकबहार की दुतिका मरावी ने मिश्रित खेती में कुछ अलग कर दिखाया है। रासायनिक उर्वरकों की जगह देशी गोबर खाद का उपयोग करते हुए जहां गुणवत्तापूर्ण सब्जी उत्पादन को लेकर दुतिका मरावी चर्चित हुई। वहीं तीन फसल कर हर माह वह 30 हजार की आमदनी करते हुए कई लोगों को रोजगार भी दे रही है।

जनपद पंचायत पत्थलगांव के ग्राम पंचायत रोकबहार की महिला कृषक दुतिका मरावी ने विशिष्ट पहचान बनाई है। विरासत में मिले ढाई एकड़ जमीन पर सोलर पंप स्थापित कर विभिन्न प्रकार की सब्जी का वह उत्पादन कर रही है। साथ ही मिश्रित खेती के उत्पादन कर सप्ताह में सात हजार से अधिक आज अर्जित कर रही है।

हर माह लगभग 30 की आमदनी अपनी सूझबूझ से दुतिका करती है। इसके साथ ही वह अपने आसपास के ग्रामीण महिलाओं को भी कृषि कार्य के लिए प्रेरित कर रही है। पूरी खेती वह खुद ही प्लान करके करती है और बाजार का निर्धारण भी उसी के द्वारा किया जाता है।

श्रीमती मरावी का दावा है कि कृषि कार्य में यदि महिलाएं सब्जी उत्पादन को चुनती हैं तो हर सप्ताह वे पांच हजार का आय अर्जित कर सकती हैं और स्वाभिमान के साथ आत्म निर्भर बन सकती हैं। उसने बताया कि सब्जी उत्पाद व बाजार तक सब्जी पहुंचाने में वह इस कार्य के लिए लगभग चार पुरुषों को प्रतिदिन दो सौ रुपये मेहनताना देती है, जिससे चार अन्य परिवारों का का भी भरण पोषण होता है।

श्रीमती दुतिका मरावी के मुताबिक उनके परिवार के बच्चे स्कूली समय से पूर्व इस काम में हाथ बटाते हैं। उनका कहना है सरकारी योजनाओं के प्रति समझ और लाभ लेना भी महत्वपूर्ण है। इस कार्य के लिए कुछ सरकारी योजनाओं का लाभ उसने लिया है और विशेषज्ञों से वह राय भी लेती है।

उन्होंने सौर सुजला योजना के प्रति आभार जताया और कहा कि योजना का आम गरीब किसानों के बीच प्रचार हो तो ग्रामीण अधिक लाभान्वित हो सकते हैं। वर्तमान में इस महिला कृषक के बागवानी में खीरा, ककड़ी, टमाटर, बरबट्टी, भिंडी, डोंडका, ग्वार फली, मखना, लौकी,प्याज, मिर्ची,भाटा,सहित तिलहन में सूरज मुखी, मूंगफली जैसे मिश्रित खेती गर्मियों के दिन में देखने को मिल रही है। कई कृषक पूर्व में डीजल पंप का उपयोग कर सिंचाई करते थे। जिन्हें डीजल पर बहुत अधिक व्यय करना पड़ता था। सौर सुजला योजना के तहत सोलर पंप उसने स्थापित किया है, जिससे व्यय कम होता है।

रासायनिक खाद का उपयोग नहीं

आज के समय में जहां पूरे देश में रसायनिक खादों के उपयोग को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। वहीं गांव की दुतिका मरावी रसायनिक खादों से बहुत दूर रहती है। उसका कहना है कि रसायनिक खादों की अपेक्षा घर के बने खादों पर उसे अधिक भरोसा है, जिसमें खर्च भी कम होता है। उसने बताया कि लोग उनकी सब्जी इसलिए लेने आते हैं क्योंकि वह रसायनिक खादों का उपयोग नहीं करती है और यह सभी जानते और देखते हैं।

कई लोग सीधे उनके बागवानी में ही सब्जी लेने आते हैं और प्रशंसा करते हैं, जिससे बड़ी खुशी मिलती है। उसने बताया कि घर में पशुओं के गोबर से निर्मित खाद का उपयोग करती है। उनका मानना है इस देशी गोबर खाद के उपयोग से जमीन की उर्वरा शक्ति बनी रहती है और अधिक उपजाऊ होती है।

इससे कीटों के प्रकोप में कमी भी आती है। कीट आते भी हैं तो उसे दूर करने के देशी तरीके हैं। जमीन के निरंतर उवर्रक शक्ति बने रहने से वर्ष में तीन फसलों का लाभ आसानी से लेती है। यदि रसायन का उपयोग किया जाए तो तीन फसल नहीं हो सकता है और हुआ भी तो खर्च और मानसिक तनाव बना रहता है।

बेहतर विकल्प है अक्षय सौर ऊर्जा

सौर ऊर्जा के संबंध में दुतिका मरावी ने बताया कि उर्जा का सबसे स्रोत है अक्षय सौर उर्जा। सौर ऊर्जा का मुख्य लाभ यह है कि यह किसी भी प्रदूषण का निर्माण नहीं करता है और यह ऊर्जा के सबसे स्वच्छ स्रोतों में से एक है।

इसमें कम रखरखाव की आवश्यकता होती है और विभिन्न उद्देश्यों के लिए इसे उपयोग किया जा सकता है। सौर ऊर्जा की एकमात्र सीमा यह है कि इसका उपयोग रात में नहीं किया जा सकता है और पृथ्वी पर प्राप्त सूर्य की रोशनी की मात्रा स्थान, वर्ष का समय और मौसम की स्थिति पर निर्भर करती है।


https://naidunia.jagran.com/special-story-woman-is-earning-30000-rupees-every-month-by-making-organic-farming-in-jashpur-1714930


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