सरकार की आर्थिक दृष्टि औद्योगिक गलियारों, राजमार्गों, बुलेट ट्रेनों और स्मार्ट शहरों तक ही सीमित है. भारत को इनकी जरूरत है, लेकिन सरकार एकतरफा ढंग से उस भारत को छोड़ इन लक्ष्यों के पीछे नहीं भाग सकती है जहां आत्महत्याओं की संख्या और लोगों की तकलीफें बेतहाशा बढ़ रही हैं. भाजपा को याद करना चाहिए कि सर्वाधिक 18,241 आत्महत्याएं 2004 में हुई थीं, जब पार्टी ‘शाइनिंग इंडिया' की बात करती...
More »SEARCH RESULT
अब भी हो रही पर्यावरण की अनदेखी - डॉ. भरत झुनझुनवाला
राज्यों के पर्यावरण मंत्रियों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा था कि पर्यावरण और विकास को साथ-साथ चलाया जा सकता है। बात सही है। आइए देखें कि सरकार इन दोनों उद्देश्यों को किस प्रकार एक साथ हासिल कर रही है। देश के पर्यावरण कानूनों की समीक्षा करने को मोदी सरकार ने पूर्व कैबिनेट सचिव टीएसआर सुब्रमण्यम की अध्यक्षता में एक उच्च-स्तरीय कमेटी गठित की थी। कमेटी में पर्यावरण से...
More »2014-15 में 5.465 लाख करोड़ रुपए रहा अप्रत्यक्ष कर संग्रह
नई दिल्ली। वित्त वर्ष 2014-15 (अप्रैल-मार्च) में अप्रत्यक्ष कर संग्रह अपने संशोधित लक्ष्य से 4,000 करोड़ रुपए ज्यादा रहा है। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में मंदी के बावजूद पिछले साल की तुलना में 9.9 फीसदी वृद्धि के साथ वित्त वर्ष 2014-15 का अप्रत्यक्ष कर संग्रह 5.465 लाख करोड़ रुपए रहा है। वित्त वर्ष 2013-14 में सरकार ने 4.970 लाख करोड़ रुपए का अप्रत्यक्ष कर का संग्रह किया था। सरकार ने वित्त वर्ष 2014-15...
More »उनके हिस्से की जमीन- नीलांजन मुखोपाध्याय
इतिहास उलट कर देखें, तो जमीन झगड़ा-फसाद का एक बहुत बड़ा कारण रही है। जब जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया अस्तित्व में नहीं आई थी, और रीयल एस्टेट व छोटे प्रॉपर्टी डीलरों द्वारा जमीनों की बिक्री का चोखा धंधा नहीं पनपा था, तब जमीन सांस्कृतिक वस्तु थी और परंपरा से जुड़ी थी। बड़े शहरों में काम करने और होली-दिवाली जैसे त्योहारों पर अपने पैतृक गांवों में जाने वाले असंख्य लोग अब...
More »संसद में महिलाओं की हिस्सेदारी- सुषमा वर्मा
भाजपा और कांग्रेस महिलाओं को बराबरी का दर्जा देने और लोकसभा व विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण की चाहे जितनी वकालत करें, उनकी कथनी और करनी में फर्क बरकरार है. महिलाओं के सशक्तीकरण तथा बराबरी की बात करनेवाले दलों की असलियत टिकट वितरण के समय सामने आ जाती है. यह भी देखने में आता है कि प्रमुख महिला प्रत्याशी के खिलाफ अकसर महिला को ही मैदान में उतारते है. ऐसे...
More »