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बुंदेलखंड में सहकारिता के जरिए श्वेत क्रांति लाने की तैयारी

सागर। मध्यप्रदेश के बुंदेलखंड को सूखे व पिछड़ेपन के दंश से मुक्ति दिलाने के लिए केन्द्र सरकार द्वारा हाल ही में स्वीकृत किए गए विशेष आर्थिक पैकेज के तहत प्रदेश सरकार बुंदेलखंड में गुजरात की तर्ज पर सहकारिता के जरिए दूध का उत्पादन बढ़ाने की तैयारी कर रही है। पशुपालन, मत्स्य पालन एवं उद्यानिकी विभाग की संभाग स्तरीय बैठक में राज्य के अपर मुख्य सचिव एवं कृषि उत्पादन आयुक्त मलय राय...

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बंगाल में 225 करोड़ निवेश करेगी आईटीसी

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में आईटीसी ने 225 करोड़ रुपये निवेश करने का इरादा जाहिर किया है। इसके लिए पश्चिम बंगाल औद्योगिक विकास निगम ने उलबेड़िया में 18 एकड़ जमीन चिन्हित की है। दरअसल ने तीन-चार वर्ष पहले ही आईटीसी ने राज्य में खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश करने की घोषणा की थी। इसके तहत ही आईटीसी ने सरकार को राज्य में एकीकृत प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ...

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नरेगा में एक लाख रुपए की क्षतिपूर्ति

नई दिल्ली. केंद्र मनरेगा के तहत काम करने वालों की किसी दुर्धटना की स्थिति में मृत्यु हो जाने अथवा स्थायी अपंगता पर मुवाअजा राशि बढ़ाकर एक लाख रुपए करने की सिफारिश पर गंभीरता से विचार कर रहा है। मनरेगा के तहत मौजूदा मुवाअजा राशि 25 हजार रुपए है। मनरेगा पर अमल की समीक्षा करने वाली संसदीय लोक लेखा समिति ने अपनी आठवीं रिपोर्ट में सरकार से कहा है क्षतिपूर्ति की राशि बढ़ाई जाए। समिति ने इसके लिए...

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हर पंचायत समिति होगी हाईटेक

राजस्थान की हर पंचायत समिति मुख्यालय को आईटी केंद्र बनाकर हाईटेक किया जाएगा। इनमें राजीव गांधी सेवा केंद्र स्थापित होंगे। राज्य सरकार इनके लिए दस करोड़ रुपए खर्च करेंगी। पंचायत समिति में बनने वाले एक केंद्र की लागत 26 लाख रुपये आएगी। जिसमें छह लाख रुपये पांच वर्षो के लिए फैसिलिटी मैनेजमेंट सर्विस की लागत भी शामिल है। इस योजना की वर्तमान कुल लागत 6162 लाख रुपये है, जिसमें से 1245 लाख रुपये पिछड़ा क्षेत्र...

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सांसद निधि फंसी है कई अजूबों और पेंच में

पटना राज्य के ज्यादातर सांसदों ने अपने कर्तव्यों की केंचुल उतार लोकहित की अपनी जिम्मेदारियां स्थानीय प्रशासन के जिम्मे छोड़ दी है। लिहाजा कहीं सांसद निधि की राशि विमुक्त न हो सकी, तो कहीं जमीन पर उसका कोई उपयोग नदारद है। लगता है कि पहले की तरह वायदों को जमीन पर उतारने की नहीं , कुछ और वायदे करते जाना, सांसदों का राजनीतिक शगल हो गया है। जनता यह खेल देखते रहने को अभिशप्त है।...

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