नई दिल्ली: भारत के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिख कर न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने और हाईकोर्ट के जजों की सेवानिवृत्ति उम्र बढ़ा कर 65 वर्ष करने का अनुरोध किया है. सीजेआई गोगोई ने प्रधानमंत्री से सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्टों के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की संविधान के अनुच्छेद 128 और 224ए के तहत सावधिक नियुक्ति करने का भी अनुरोध किया है, ताकि बरसों से लंबित पड़े मुकदमों...
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सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार को लगाई फटकार, कहा- मनमर्जी से अदालत नहीं आ सकते सरकारी विभाग
नई दिल्ली: विशेष अवकाश याचिका दाखिल करने में अप्रत्याशित देरी करने पर सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार पर 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है. इसके साथ बिहार सरकार को फटकार लगाते हुए कोर्ट ने कहा कि देरी के लिए सरकारी कामकाज में सुस्ती को बहाना नहीं बनाया जा सकता है. लाइव लॉ के अनुसार, पटना हाईकोर्ट के एकल पीठ के एक फैसले को चुनौती देते हुए बिहार सरकार ने 367...
More »कुल न्यायाधीशों में 50 फीसदी संख्या महिलाओं की होनी चाहिए: संसदीय समिति
नई दिल्ली: आजादी के बाद से भारत के सुप्रीम कोर्ट में केवल छह महिला न्यायाधीश नियुक्त किये जाने एवं अदालतों में महिला जजों की कम संख्या का हवाला देते हुए संसद की एक समिति ने सिफारिश की है कि कुल न्यायाधीशों में महिला न्यायाधीशों की संख्या करीब 50 प्रतिशत होनी चाहिए. संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान दोनों सदनों में पेश कार्मिक, लोक शिकायत, विधि एवं न्याय संबंधी स्थायी समिति की...
More »अगर राज्य और हाईकोर्ट जजों की नियुक्ति नहीं कर पा रहे तो हम करेंगे: सुप्रीम कोर्ट
नई दिल्ली. देशभर में जजों की नियुक्ति की धीमी रफ्तार से सुप्रीम कोेर्ट खुश नहीं है। उच्चतम न्यायालय ने सभी राज्यों और हाईकोर्ट्स से न्यायाधीशों की नियुक्ति को लेकर उठाए गए कदमों की जानकारी मांगी। अदालत ने कहा कि अगर आप खाली जगहों को नहीं भर सकते हैं, तो हम आपसे ये काम लेकर खुद करेंगे और इसके लिए केंद्रीकृत प्रक्रिया बनाएंगे। इस कथा को विस्तार से पढ़ने के लिए यहां क्लिक...
More »मी लॉर्ड! देश आपको देख रहा है-- शशिशेखर
न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा इंसाफ के सबसे बड़े ओहदे से अवकाश ग्रहण कर चुके हैं। बतौर प्रधान न्यायाधीश उनका 13 महीने लंबा कार्यकाल तमाम वजहों से लंबे समय तक याद किया जाएगा। भारतीय न्यायपालिका के गौरवपूर्ण इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ, जब समूची न्याय-व्यवस्था आम आदमी की बतकही का हिस्सा बनी और बनती चली गई। इस दौरान कुछ ऐसे सवाल उठे, जिन पर समीक्षकों ने आनन-फानन में फैसला सुना दिया। ऐसा...
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