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उत्तरकाशी हादसा: हिमालय की ‘अस्थिर’ पहाड़ियों में बदलना होगा सुरंग बनाने का तरीका

कार्बनकॉपी, 24 नवम्बर  उत्तरकाशी के बड़कोट-सिल्कियारा सुरंग के भीतर फंसे 41 मजदूरों को बाहर निकालने की जद्दोजहद का यह दसवां दिन है। 21 नवंबर को फंसे मज़दूरों का पहला वीडियो जारी किया गया था, और रुका हुआ बचाव कार्य फिर शुरू किया गया था। ताजा रिपोर्ट के अनुसार, मज़दूरों तक पहुंचने के लिए ड्रिलिंग फिर से शुरू की जा चुकी है। मंगलवार को जारी किया गया वीडियो फंसे हुए मज़दूरों के परिजनों...

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एक शोध में हिमालय के मज़बूत गद्दी चरवाहा समुदाय पर प्रकाश डाला गया है

 द थर्ड पोल, 17 नवम्बर गद्दी, हिमाचल प्रदेश में सबसे बड़ा चरवाहा समुदाय है। वर्ष 2011 में हुई हालिया भारतीय जनगणना के हिसाब से इनकी आबादी 1,78,000 है।  अब जबकि जलवायु परिवर्तन के कारण हिमालयन वाटरशेड की आबादी प्रभावित हो रही है, ऐसे में गद्दी समुदाय को लेकर इस तरह के शोध उपयोगी साबित हो रहे हैं: गद्दी समुदाय के सामने आने वाली चुनौतियां, और उनके जवाब में इनकी प्रतिक्रियाएं बेहद अहम...

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लद्दाख: आम नागरिकों की पहल से कारगर हो रहा वन्यजीव संरक्षण

मोंगाबे हिंदी, 17 नवम्बर लेह में रहने वाले 35 वर्षीय स्टैनज़िन चंबा प्रकृति की खोज में लद्दाख के नुब्रा घाटी में बीते पांच साल से जा रहे हैं। लेह शहर से लगभग 160 किलोमीटर दूर नुब्रा में उन्होंने कई प्रकार के वन्य जीव देखे लेकिन जो जीव उन्हें सबसे अधिक आकर्षित करता है वह है यूरेशियाई लिंक्स। लिंक्स को स्थानीय भाषा में ‘ई’ कहते हैं। “लद्दाख में ज्यादातर लोगों ‘ई’ का नाम...

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भारत के पहले जिओथर्मल प्लांट की संभावनाएं और चुनौतियां

द थर्ड पोल, 17 नवम्बर लद्दाख के हिमालयी क्षेत्र में पुगा घाटी में सरकार द्वारा संचालित तेल और प्राकृतिक गैस निगम (ओएनजीसी) भारत का पहला जिओथर्मल प्लांट बना रहा है। लद्दाख के नीचे दो टेक्टोनिक प्लेटें टकराती हैं, जिससे यह स्थान गर्म झरनों जैसी जिओथर्मल घटनाओं के लिए एक प्रमुख केंद्र बनता है, और यह वह ऊर्जा है, जिसका दोहन करने के लिए ओएनजीसी उत्सुक है। यह नवीकरणीय ऊर्जा का संभावित...

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खतरे में हैं हिल स्टेशन: असंवेदनशील योजनाओं का दंश झेल रहे हैं पहाड़ी शहर

डाउन टू अर्थ, 06 नवम्बर हिमालयी राज्यों के शहर और कस्बे इस वक्त त्रासदी के नए अड्डे बन गए हैं। 2023 के मॉनसून में हिमाचल में शिमला और अन्य शहरों में जान-माल की तबाही इसका जीता-जागता उदाहरण है। इससे पहले उत्तराखंड के जोशीमठ में घरों के धंसाव ने इसके नाजुक होने की निशानी पेश की। जरूरत से ज्यादा आबादी, भवन और सालाना पर्यटकों के बोझ से दब और बिखर रहे इन...

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