डाउन टू अर्थ, 24 नवम्बर क्या आप जानते हैं कि जो नमक हमारे लिए बेहद जरूरी है उसकी जरूरत से ज्यादा मात्रा पर्यावरण और इंसानी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक साबित हो रही है। विडम्बना देखिए कि जिस तरह से पर्यावरण में खारापन बढ़ रहा है उसके लिए हम इंसान ही जिम्मेवार हैं। रिसर्च से पता चला है कि इंसानों के कारण दुनिया भर में बढ़ते लवणीकरण से 250 करोड़ एकड़ क्षेत्र में...
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भारत में 5 जीवित अंग दाताओं में से 4 महिलाएं और 5 प्राप्तकर्ताओं में से 4 पुरुष हैं: अध्ययन
द वायर, 16 नवम्बर देश में अंग प्राप्त करने वाली प्रत्येक महिला के मुकाबले चार पुरुषों का अंग प्रत्यारोपण हुआ है. 1995 से 2021 तक के आंकड़ों से पता चलता है कि 36,640 अंग प्रत्यारोपण किए गए, जिनमें से 29,000 से अधिक पुरुषों के लिए और 6,945 महिलाओं के लिए थे. विशेषज्ञों का कहना है कि यह बड़ा अंतर आर्थिक और वित्तीय जिम्मेदारियों, सामाजिक दबावों और अंतर्निहित प्राथमिकताओं के कारण था. टाइम्स ऑफ...
More »खाने की पौष्टिकता को कम कर रहा बढ़ता कार्बन डाइऑक्साइड
मोंगाबे हिंदी, 01 नवम्बर वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड का बढ़ता स्तर पौधों में प्रमुख खनिज पोषक तत्वों पर नकारात्मक असर डाल रहा है। इसकी वजह से उनमें पोषकता कम हो रही है। ‘ट्रेंड्स इन प्लांट साइंस’ जर्नल में एक हालिया समीक्षा लेख से इस बात की जानकारी मिली है। यह लेख कई अध्ययनों के निष्कर्षों का सारांश है। फ्रांस के वैज्ञानिकों द्वारा की गई समीक्षा में बताया गया कि लगभग सभी...
More »सदी के अंत तक भारत में 10 गुणा तक बढ़ सकता है लू का कहर, सामने आएंगें नए हॉटस्पॉट्स
डाउन टू अर्थ, 30 अक्टूबर बढ़ते तापमान और जलवायु में आते बदलावों के चलते भारत के कई हिस्सों में स्थिति कहीं ज्यादा खराब हो सकती है। डीएसटी के महामना सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन क्लाइमेट चेंज रिसर्च के वैज्ञानिकों का अनुमान है कि सदी के अंत तक भारत में लू का खतरा 10 गुणा तक बढ़ जाएगा। अध्ययन में यह भी कहा गया है कि आने वाले समय में भारत के दक्षिणी...
More »जलवायु संकट: तीन से चार दिन पहले आ रहे शक्तिशाली उष्णकटिबंधीय चक्रवात
डाउन टू अर्थ,10 अक्टूबर एक नई रिसर्च के हवाले से पता चला है कि जलवायु में आते बदलावों के चलते 80 के दशक से शक्तिशाली उष्णकटिबंधीय चक्रवात हर दशक तीन से चार दिन पहले आ रहे हैं। गौरतलब है कि यह चक्रवात बेहद शक्तिशाली यानी श्रेणी 4 और 5 के होते हैं, जिनके दौरान हवाओं की गति 131 मील प्रति घंटा या उससे ज्यादा रहती है। यह रिसर्च हवाई विश्वविद्यालय, साउथर्न यूनिवर्सिटी...
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