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कालेधन पर मोदी का बम-- अनुपम त्रिवेदी

कालेधन पर किये गये वादों को लेकर किरकिरी झेल रही मोदी सरकार ने 8-9 नवंबर की रात ऐसी ‘सर्जिकल स्ट्राइक' की, कि पूरा देश हतप्रभ रह गया. एक झटके में सरकार ने कालेधन, भ्रष्टाचार, जाली नोट और आतंकवाद को जबरदस्त चोट पहुंचायी. सरकार के इस कदम की हर ओर तारीफ हो रही है. हालांकि विरोध करनेवाले भी कम नहीं है. पर हतप्रभ सभी हैं. सोच रहे हैं कि सरकार...

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राजद्रोह का चना जोरगरम-- चंदन श्रीवास्तव

फिल्म प्यासा का गीत है- ‘सर जो तेरा चकराये या दिल डूबा जाये', एक जगह तनिक छेड़ के साथ पात्र कहता है कि ‘लाख दुखों की एक दवा है क्यों ना आजमाये.' ऐसी दवा साहित्य के पन्नों में मिला करती है, लेकिन लगता है अब राजनीति ने भी यह दवा खोज निकाली है. सार्वजनिक महत्व के मसले पर राजनीतिक असहमति से उपजनेवाले तमाम दुख-दर्दों से छुटकारे की इस दवा का...

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नाभि बची, सिर भी सलामत-- अनिल रघुराज

रामलीला खत्म होने को है, लेकिन रावणलीला जारी है. सदियों से हम बुराई पर अच्छाई की जीत का जश्न मनाते आ रहे हैं. लेकिन, हर दशहरे पर पुतला जलने के बावजूद रावण अट्टहास करता रहता है. यहां दो बातें गौरतलब हैं. एक, रावण सत्ताजनित अहंकार का प्रतीक है. परम ज्ञानी, परम शक्तिशाली, परम धनवान. लेकिन अहंकार ने उसे कहीं का नहीं छोड़ा. दो, नाभि पर चोट न की जाये, तो...

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बेरोजगारी

    एक नजर   सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर लगातार ऊंची बनी होने के बावजूद भारत अपनी ग्रामीण जनता की जरुरत के हिसाब से मुठ्ठी भर भी नये रोजगार का सृजन नहीं कर पाया है। नये रोजगारों का सृजन हो रहा है लेकिन यह अर्थव्यवस्था के ऊंचली पादान के सेवा-क्षेत्र मसलन वित्त-जगत, बीमा, सूचना-प्रौद्योगिकी और सूचना प्रौद्योगिकी के दम पर चलने वाले हलकों में हो रहा है ना कि विनिर्माण और आधारभूत ढांचे के...

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