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कोरोना वायरस संकट: अगले एक महीने में क्या हो सकता है?

-सत्याग्रह,  केंद्र सरकार ने कोरोना वायरस के चलते घोषित लॉकडाउन का पांचवां चरण शुरू हो गया. इसके लिए जारी दिशा-निर्देशों के मुताबिक कंटेनमेंट जोन में 30 जून तक लॉकडाउन बढ़ा दिया गया है. बाकी इलाकों में चरणबद्ध तरीके से परिवहन से लेकर शिक्षण तक वे तमाम गतिविधियां फिर से शुरू की जाएंगी जिन पर पाबंदी लगी हुई थी. कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए देश भर में...

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मजबूर मजदूरः कुलीनों का नैतिक अर्थशास्त्र और प्रवासी

-इंडिया टूडे, ''अनिवार्य गतिविधियों को छोड़कर बाकी व्यक्तियों के लिए आवाजाही शाम 7 बजे से सुबह 7 बजे तक ‘कठोरता से प्रतिबंधित’ रहेगी...’’ —गृह मंत्रालय का परिपत्र, इंडिया टुडे (17 मई) की रिपोर्ट के अनुसार परिपत्र ने 'सवारी वाहनों और बसों के अंतर-राज्यीय आवागमन की अनुमति देकर प्रवासी मजदूरों को राहत’ प्रदान की (यदि दो पड़ोसी राज्य इसके लिए राजी हों). लेकिन राजमार्गों पर पैदल चलते जा रहे लाखों लोगों के बारे में...

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कोविड-19 के खिलाफ जंग में झारखंड की ढ़ाल बने सखी मंडल

-विलेज स्कवायर,  कोविड-19 संक्रमण के इस दौर में हालात डराने वाले हो रहे हैं| गांव-शहर, सब मास्क के भीतर सिमटते जा रहे हैं। सोशल डिस्टेंसिंग समाज का नया सच बन गया है, जिससे लोग अब दूरियां बनाने लगे हैं। मुसीबत की इस घड़ी में सरकारें कोरोना वायरस से सुरक्षा को लेकर, जी-जान से जुटी हैं| एक तरह से सभी अपने हौसलों से मिलजुल कर इस अंधेरे को छांटने की कोशिश में...

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विश्लेषण: पूरे भारत में लॉकडाउन से कितना काबू आया कोरोनावायरस?

-डाउन टू अर्थ, भारत दुनिया का सबसे बड़ा देश है, जिसने 42 दिन के लॉकडाउन का सामना किया। लगभग 130 करोड़ लोग कोरोनावायरस से होने वाली बीमारी (कोविड-19) को फैलने से रोकने के लिए अपने घरों में बंद रहे।  दो चरणों का लॉकडाउन खत्म होने के बाद सरकारी अधिकारियों ने दावा किया कि इन लॉकडाउन से कई फायदे हुए हैं। इनमें से एक बड़ा फायदा यह हुआ कि भारत ने कोरोनावायरस के...

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कभी घर-घर सर्वे, कभी थोड़ी जासूसी, कभी ढोलक की थाप: कौन हैं ये गुमनाम "कोरोना वॉरियर्स", महामारी से लड़ती हुई ये दस लाख की पैदल सेना ?

-गांव कनेक्शन,  खबर पक्की थी। फोन गुपचुप आया था, "दीदी हमारे पड़ोस में बंबई से आये हैं।" उत्तर प्रदेश के अटेसुआ गाँव में शहर से वापस आये मजदूरों को कायदे से 14 दिन के लिए क्वारंटाइन होना था, लेकिन ग्राम प्रधान ने उनके तुरंत आने पर ऐसा नहीं करवाया था। गाँव की आशा कार्यकर्ता कुसुम सिंह (48) को पता था कि अगर प्रधान पर उन्होंने सीधे ऊँगली उठाई तो उनका विरोध...

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