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जम्मू-कश्मीर: हिंसा के कारण विस्थापित होने वालों की तादाद सबसे ज्यादा तादाद

पाकिस्तान से बढ़ती सैन्य तनातनी और युद्ध की आशंका के बीच केंद्र सरकार ने घोषणा की : ‘जम्मू-कश्मीर में अंतरराष्ट्रीय सीमा के आसपास रहने वाले नागरिकों को भी आरक्षण का लाभ दिया जाएगा.' लेकिन क्या सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोग सचमुच आरक्षण का लाभ हासिल कर पाने की स्थिति में हैं ?   इस सवाल का उत्तर ढूंढ़ने के लिए इन तथ्यों पर गौर कीजिए : बीते साल जनवरी से जून महीने के...

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राजद्रोह के मामले बिहार और झारखंड में सबसे ज्यादा-- एनसीआरबी की नई रिपोर्ट

  अलगाववादी रुझान वाले पूर्वोत्तर या जम्मू-कश्मीर में नहीं बल्कि बिहार और झारखंड में राजद्रोह की सबसे ज्यादा घटनाएं प्रकाश में आयी हैं. नेशनल क्राईम रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) विगत दो वर्षों से राजद्रोह के मामलों के बारे में आंकड़े प्रकाशित कर रहा है और ये आंकड़े बताते हैं कि अन्य राज्यों की तुलना में 2015 में राजद्रोह के सर्वाधिक घटनाएं बिहार में प्रकाश में आईं जबकि झारखंड 2014 में राजद्रोह की घटनाओं...

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बिनायक सेन को उम्रकैद- लोकतंत्र घायल !

 मध्यभारत के जनजातीय इलाकों में तीन दशक से भी ज्यादा समय तक निस्वार्थ जनसेवा में जीवन बिताने वाले डाक्टर बिनायक सेन को देशद्रोह के आरोप में आजीवन कैद की सज़ा सुनाये जाने पर नागरिक संगठन हतप्रभ और आतंकित हैं। रायपुर के सेशन कोर्ट के जज ने बिनायक सेन के साथ पीयूष गुहा और नारायण सान्याल को भी देशद्रोह के आरोप में उम्रकैद की सज़ा सुनायी है।  देशभर में कोर्ट के...

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Advertising, Bollywood, Corporate power by P Sainath

Issues today have to be dressed up in ways certified by the corporate media. They have to be justified not by their importance to the public but by their acceptability to the media, their owners and sponsors.  That the terrible tragedy in Pune demands serious, sober coverage is a truism. One of the side-effects of the ghastly blast has been unintended, though. The orgy of self-congratulation that marked the media...

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K.N. Raj: teacher, economist and institution builder by J Krishnamurty

In 1960, when I was enrolled for my MA at the Delhi School of Economics, the shining star at the School was certainly K.N. Raj. The founder of the School, V.K.R.V. Rao, had left the institution, but came back every Founders’ Day to remind us of its glorious past and of the enduring values it embodied. Raj’s style was much lower key, but it soon became clear that his dedication...

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