मोंगाबे हिंदी, 15 मई उत्तरी ध्रुव में पिछले एक हजार साल के ठंडे और गर्म मौसम के दौर को एक अध्ययन के जरिए फिर से बनाया या रीकंट्रस्ट किया गया है। इसमें पाया गया है कि इस दौरान भारत के मॉनसून में भी बदलाव देखा गया। भारत के नेशनल सेंटर फॉर पोलर एंड ओशन रिसर्च (NCPOR) के वैज्ञानिकों का कहना है कि गर्म उत्तरी ध्रुव की स्थिति भारतीय उपमहाद्वीप में बहुत ज़्यादा...
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नए ताप विद्युत संयंत्रों को कैसे प्रभावित करेगा 40% अक्षय ऊर्जा का नया नियम
मोंगाबे हिंदी,8 मई ऊर्जा मंत्रालय (MoP) ने ऊर्जा उत्पादकों के लिए 27 फरवरी को ‘रिन्यूएबल जेनरेशन ऑब्लिगेशन (आरजीओ)’ की एक नई अवधारणा पेश करते हुए एक अधिसूचना जारी की। अधिसूचना के मुताबिक, किसी भी कोयला या लिग्नाइट-आधारित नए कमर्शियल थर्मल पावर प्लांट को अपनी कुल ऊर्जा का एक हिस्सा नवीकरणीय स्रोतों से पैदा करना होगा। नए आरजीओ के अनुसार, इन संयत्रों को अपनी कुल क्षमता के कम से कम 40 प्रतिशत हिस्से...
More »खाद्य तेलों के भारी आयात से किसानों का बुरा हाल, सरसों एमएसपी से 1000-1200 रुपये प्रति क्विंटल नीचे बिक रहा
रूरल वॉयस, 07 मई एक तरफ सरकार खाद्य तेलों के मामले में देश को आत्मनिर्भर बनाना चाहती है और इसके लिए विशेष सरसों अभियान चला रही है ताकि सरसों का बुवाई रकबा और उत्पादन बढ़े, दूसरी तरफ खाद्य तेलों के बेधड़क आयात की छूट दे रखी है। इससे सरसों किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। देशभर की तमाम मंडियों में सरसों के भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 5,450 रुपये...
More »देश में धान-तिलहन का रकबा घटा, मगर दलहन और मोटे अनाज पर दांव आजमा रहे किसान
गर्मियों में फसल का रकबा घटा कृषि मंत्रालय की ओर से गर्मियों में बोई जाने वाली फसलों के आंकड़ें सामने आए हैं. आंकड़ों के अनुसार, गर्मियों में फसली रकबा बहुत कम घटा है. 28 अप्रैल तक गर्मियों की फसल का कुल रकबा पिछले साल 66.02 लाख हेक्टेयर था, जोकि इस साल थोड़ा कम रहकर 65.29 लाख हेक्टेयर हो गया है. आंकड़ों के अनुसार, धान और तिलहन का रकबा पिछले साल के...
More »चीनी उत्पादन 18 लाख टन घटा, महाराष्ट्र में 21.5 लाख टन की भारी गिरावट
रूरल वॉइस, 19 अप्रैल चालू चीनी वर्ष (2022-23) में उत्पादन घटने की आशंका सच साबित होने लगी है। चीनी का कुल उत्पादन करीब 18 लाख टन घट गया है। देश के सबसे बड़े चीनी उत्पादक राज्य महाराष्ट्र और तीसरे बड़े उत्पादक कर्नाटक के उत्पादन में बड़ी गिरावट की वजह से यह स्थिति बनी है। पिछले वर्ष के मुकाबले महाराष्ट्र में 21.5 लाख टन की भारी गिरावट दर्ज की गई है, जबकि...
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