द वायर, 21 मार्च ग्रामीण और शहरी भारत में समान कार्य के लिए बाजार द्वारा निर्धारित मजदूरी पुरुषों की तुलना में महिलाओं के लिए काफी कम है. इससे भी बुरी बात यह है कि पिछले एक दशक में ग्रामीण क्षेत्रों में यह अंतर बढ़ा है, हालांकि यह शहरों में कम हुआ है. टाइम्स ऑफ इंडिया ने राष्ट्रीय सांख्यिकी सर्वेक्षण कार्यालय (एनएसएसओ) द्वारा जारी एक सर्वेक्षण के नतीजों के हवाले से यह जानकारी दी...
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कैसे उड़ीसा में बीज बैंक जैविक खेती को बढ़ावा दे रहे हैं
इंडियास्पेंड, 16 मार्च उड़ीसा की राजधानी भुवनेश्वर से करीब 150 किमी पश्चिम में रायसर नाम की एक छोटी सी बस्ती में रहने वाले 45 वर्षीय दुर्ज्यधन जानी के लिए पिछले तीन साल काफी रोमांचित करने वाले रहे हैं। उनके लिए यह एक ऐसा समय है, जैसे वह अपने बचपन में जी रहे हैं। एक बच्चे के रूप में उन्होंने अपने परिवार को जैविक खेती करते हुए देखा था, लेकिन दो दशक...
More »ग्रामीण क्षेत्र के लिए कितना हितकारी है 2023-24 का बजट?
रूरल वॉइस, 24 फरवरी पिछले साल 2022-23 के लिए जब बजट पेश किया गया तो मैंने उसे जातिगत भेदभाव वाला बताया था। अगले वित्त वर्ष के लिए जो बजट पेश किया गया है, उसके प्रस्तावों पर गौर करें तो इसमें भी जातिगत भेदभाव झलकता है। तमाम मीडिया में नई स्कीम की घोषणाओं और पूंजी निर्माण के लिए अधिक आवंटन को ‘अमृत काल’ जैसे लुभावन शब्दों के रूप में पेश किया गया।...
More »असर (ASER) की रिपोर्ट: शिक्षा के क्षेत्र में बेटा-बेटी के बीच भेदभाव अभी जारी
जनचौक, 8 फरवरी देश में अभी भी लड़कों की तुलना में लड़कियों की शिक्षा पर कम जोर दिया जा रहा है। असर की चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। असर की अतिरिक्त रिपोर्ट के मुताबिक देश में लड़कियों की तुलना में 15-25% अधिक लड़के निजी स्कूलों में पढ़ने जाते हैं। वहीं प्राथमिक विद्यालयों में लड़कियों की तुलना में लगभग 52 लाख अधिक लड़के पढ़ने जाते हैं। मतलब साफ है कि लगभग...
More »मनरेगा पर संकट के बादल
हाल ही में पेश किए गए बजट के बाद पक्ष-विपक्ष की अतिवादी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। इन बयानबाजियों में सबसे ज्यादा ध्यान मनरेगा ने खींचा है। बजट में मनरेगा के लिए आवंटित बजट, 2022-23 के संशोधित अनुमान की तुलना में काफी कम है। यह कमी करीब 33 प्रतिशत के आस–पास ठहरती है। सरकार के पास इस कटौती को जायज ठहराने के अपने तर्क हैं और विपक्ष व सामाजिक संगठनों की अपनी...
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