-द वायर, भोपाल गैस त्रासदी के पीड़ितों के हित में काम करने वाले एक गैर सरकारी संगठन ने मध्य प्रदेश सरकार से इस आपदा के कारण विधवा हुईं महिलाओं की पेंशन फिर से शुरू करने की मांग की है. इनमें से कुछ महिलाएं पिछले दो दिन से क्रमिक भूख हड़ताल पर हैं. गैस पीड़ित निराश्रित पेंशन भोगी संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष बालकृष्ण नामदेव ने बृहस्पतिवार को कहा, ‘हम प्रदेश सरकार से दुनिया...
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एक्शनएड सर्वे: लॉकडाउन लागू होने के बाद तीन-चौथाई से अधिक श्रमिक अपनी आजीविका से हाथ धो बैठे
एक्शनएड एसोसिएशन (एएए) द्वारा मई 2020 के आखिर तक तीसरे चरण के लॉकडाउन में राष्ट्रीय स्तर पर अनौपचारिक अर्थव्यवस्था पर निर्भर श्रमिकों के बीच सर्वेक्षण (14 मई और 22 मई, 2020 के बीच) किया है, जिसमें महामारी के दौरान प्रवासी श्रमिकों सहित अनौपचारिक श्रमिकों के जीवन और आजीविका में आए बदलावों और प्रभावों, उनके द्वारा अनुभव की गई रोजी-रोटी की अनिश्चितता और उससे निपटने के लिए उनके संघर्षों को दर्ज किया...
More »ग्रामीण क्षेत्रों में विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों को ठीक से लागू करने के लिए सरकारी कर्मचारी कहां हैं?
केंद्र सरकार द्वारा हर साल अपने वार्षिक बजट में ग्रामीण और कृषि क्षेत्रों के लिए भारी रकम आवंटित की जाती है. लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में पर्याप्त संख्या में अधिकारी नहीं होते हैं, तो क्या अधिकारियों की कमी के चलते सरकार की विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों को ठीक से लागू किया जा सकता है? यदि हम इस मुद्दे के बारे में गहराई से सोचें तो हमें जवाब तो आसानी से मिल...
More »कोरोना और लॉकडाउन से पैसों की तंगी थी, दिव्यांग मां-बाप अपनी बच्ची बेचने चल दिए!
-लल्लनटॉप, कोरोना वायरस ने लोगों के फेफड़ों के साथ पेट पर भी हमला किया है. रोज़मर्रा के कामकाज पर असर पड़ने से रोज़ी-रोटी की दिक्कतें हैं. इसी बीच आंध्र प्रदेश से एक मामला सामने आया है. यहां के अनंतपुरम ज़िले में दिव्यांग पति-पत्नी ने अपनी 8 महीने की बच्ची को बेचने की कोशिश की. ‘द हिंदू’ की रिपोर्ट के मुताबिक, ये रोड्डम मंडल के बुचेरल्ला गांव का वाकया है. बच्ची को बेचने...
More »कोरोना से निपटने के लिए सरकार ने ईमानदार कोशिश नहीं की
-द वायर, दो महीने के कड़े लॉकडाउन के बावजूद भी आज कोरोना वायरस संक्रमण का ग्राफ लगातार बढ़ता जा रहा है. लॉकडाउन के दौरान सरकार ने चिकित्सा व्यवस्था में सुधार के कोई प्रयास नहीं किए. इसका नतीजा है कि हर तीन में से दो जिलों के पास आज भी कोरोना जांच का इंतजाम नहीं है. राजधानी दिल्ली के अस्पतालों में भी लोग बेड के अभाव में मर रहे हैं. मजदूरों को अमानवीय क्वारंटीन...
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