-सत्याग्रह, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन्हें किसानों के लिए रक्षा कवच कह रहे हैं. उधर, कांग्रेस नेता राहुल गांधी के लिए ये किसानों की मौत का फरमान हैं. इससे भी अंदाजा लगाया जा सकता है कि कृषि से जुड़े और संसद से पारित हो चुके तीन विधेयकों पर राय के जो दो छोर हैं उनके बीच कितना फासला है. देश के कई राज्यों में किसान इन विधेयकों पर गुस्से का इजहार करते...
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जैविक खेतीः सामूहिक प्रयास ज्यादा मुनाफा
-इंडिया वाटर पोर्टल, देश में कृषि सुधार विधेयक पर जमकर घमासान मचा हुआ है। सरकार जहां इस विधेयक को ऐतिहासिक और किसानों के हक़ में बता रही है, वहीं विपक्ष इसे किसान विरोधी विधेयक बता कर इसका पुरज़ोर विरोध कर रहा है। हालांकि संसद के दोनों सदनों से पास होने के बाद यह विधेयक अब राष्ट्रपति के पास हस्ताक्षर के लिए भेजा जा चुका है, जिनकी सहमति के बाद विधेयक लागू हो...
More »कॉन्ट्रैक्ट पर खेती करने वाले सौदों में छोटे किसानों को क्यों नुकसान उठाना पड़ता है
-न्यूजक्लिक, अनुबंध (Contract) पर खेती का विस्तार हाल के दशकों में तेजी से बढ़ा है और भारत भी ऐसा लगता है कि अपने हालिया लागू कानूनों, दिशानिर्देशों और नियमों के तहत इस दौड़ में खुद को शामिल करने के लिए तैयार कर रहा है। ठेके या अनुबंध खेती से जुड़े अनुभवों की अगर बात करें तो विकसित देशों के साथ-साथ जिन भी विकासशील देशों में इसे लागू किया गया है, वे...
More »गन्ने की FRP बढ़ने के बाद अब किसानों को कितने रुपए प्रति कुंतल का मिलेगा रेट?
-गांव कनेक्शन, देश के गन्ना किसानों के लिए अच्छी खबर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली केंद्रीय कैबिनेट ने गन्ने के उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) में 10 रुपए प्रति कुंतल की बढ़ोतरी कर दी है। मोटे दौर पर देंखे तो अब देश के करीब एक किसानों को गन्ने का सरकारी तय मूल्य 285 रुपए प्रति कुंतल का मिलेगा। लेकिन गन्ने की वास्तविक कीमत क्या होगी ये उससे निकलने वाली...
More »किसानों से ज्यादा निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाने वाले मोदी सरकार के हालिया कृषि अध्यादेश
-कारवां, उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले के टोला गांव के रामसेवक चार बीघे के किसान हैं. हाल ही में नरेन्द्र मोदी सरकार द्वारा अध्यादेश लाकर किए गए खेती से संबंधित पुराने कानून में संशोधन और दो नए कानूनों का जिक्र करते हुए वह कहते हैं, "हम कानून-आनून नईं जानत, जो कछू जानत हैं, वो इत्तो कि हमाये खेत, हमाई मेहनत, हम का बोएं, का पैदा करें, कोऊ दूसरो कैसे बता सकत!" ठेका...
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