-द वायर, बीते मंगलवार को राज्यसभा ने कृषि सुधार के नाम पर लाए गए आवश्यक वस्तु (संशोधन) अधिनियम विधेयक, 2020 को मंजूरी दे दी, जिसके जरिये अनाज, दलहन, तिलहन, खाद्य तेलों, प्याज और आलू जैसी वस्तुओं को आवश्यक वस्तुओं की सूची से हटा दिया गया है. दूसरे शब्दों में कहें, तो अब निजी खरीददारों द्वारा इन वस्तुओं के भंडारण या जमा करने पर सरकार का नियंत्रण नहीं होगा. हालांकि संशोधन के तहत यह...
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कृषि बिल: न्यूनतम समर्थन मूल्य को लेकर डरे हुए क्यों हैं किसान?
-बीबीसी, रविवार को राज्यसभा में पारित हुए नए कृषि सुधार क़ानूनों को लेकर विपक्ष के बढ़ते विरोध के बीच केंद्र सरकार ने फ़सलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को बढ़ाने का फै़सला किया है. कैबिनेट की आर्थिक मामलों की समिति ने सोमवार को इसके लिए मंज़ूरी दे दी है. कृषि मंत्री ने रबी की छह फ़सलों की नई एमएसपी जारी की है. ये फ़ैसला ऐसे वक़्त में लिया गया है जब कृषि...
More »केंद्र ने रबी फसलों के लिए एमएसपी घोषित की, पिछले 10 सालों में गेहूं के दाम में न्यूनतम बढ़ोतरी
-द वायर, संसद में तथाकथित कृषि सुधार विधेयकों के पारित होने के बाद बीते सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति ने छह रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में वृद्धि के निर्णय को मंजूरी प्रदान की. सरकार ने गेहूं का एमएसपी 50 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ाकर 1,975 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया है. पिछले साल घोषित गेहूं का एमएसपी 1925 रुपये की तुलना में...
More »कृषि अध्यादेश के 2 बिल राज्यसभा में पास, जानिए किस सांसद ने चर्चा के दौरान क्या कहा, किस किस के बीच हुई कहासुनी
सड़क से लेकर संसद तक जोरदार हंगामे और प्रदर्शनों के बीच 2 किसान बिल संसद के ऊपरी सदन में पास हो गए। बिल पहले से लोकसभा में पास हो चुके हैं इसलिए अब उन्हें राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा, जिसके बाद कानून बन जाएगा। कृषि रिफार्म के नाम पर तीन अध्यादेश लॉकडाउन के दौरान नरेंद्र मोदी सरकार लाई थी, जिन्हें लागू तो कर दिया गया था लेकिन संसद में पास...
More »सब पर शक करो, सबको रास्ते पर लाओ! क्या यही हमारे नये ‘राष्ट्रीय शक्की देश’ का सिद्धांत बन गया है
-द प्रिंट, क्या हमारा दिमाग खराब हो गया है कि हम अपने देश को ‘राष्ट्रीय शक्की देश’ कह रहे हैं? अब आप गूगल में सर्च करने लगेंगे तो यह जुमला कहीं नहीं मिलेगा. यह वैसा मामला नहीं है जैसा हम पाकिस्तान और चीन को ‘नेशनल सिक्यूरिटी स्टेट’ (राष्ट्रीय सुरक्षित राज्य) कहते हैं, जहां क्रमशः फौज और पार्टी न केवल देश की सीमाओं की निगरानी करती है बल्कि राज्यतंत्र और नागरिकों की...
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