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चालू सीजन में यूपी के गन्ना किसानों का 7,000 करोड़ बकाया, पिछले सीजन के भी 1,500 करोड़ बाकी

-रूरल वॉइस, अमित शाह 26 जनवरी को जब उत्तर प्रदेश के कुछ जाट नेताओं से मिले, तो उस बैठक में कुछ जाट नेताओं ने गन्ना किसानों को देरी से भुगतान का मुद्दा भी उठाया। दरअसल पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गन्ना किसानों का बकाया एक प्रमुख चुनावी मुद्दा बन गया है। सत्तारूढ़ भाजपा के रिकॉर्ड भुगतान के दावे के बावजूद अक्टूबर 2021 से सितंबर 2022 तक चलने वाले मौजूदा सीजन में गन्ना...

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बजट में खाद्य और उर्वरक सब्सिडी में हो सकती है कटौती, इस साल इसके पांच लाख करोड़ से अधिक रहने की संभावना

-रूरल वॉइस, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण जब एक फरवरी को आगामी वित्त वर्ष 2022-23 का बजट संसद में पेश करेंगी तो उनके सामने खाद्य और उर्वरक सब्सिडी का ट्रेंड बदलने का संकेत देने की चुनौती होगी। चालू वित्त वर्ष में राजनीतिक फायदे के लिए प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत फ्री अनाज का आवंटन मार्च तक जारी रखने और अंतरराष्ट्रीय बाजार में उर्वरकों और उनके कच्चे माल की कीमतों में...

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रिकवरी बढ़ने से चीनी मिलों को सालाना 3000 करोड़ अतिरिक्त फायदा हुआ, जबकि किसानों के लिए गन्ने का एसएपी था फ्रीज

-रूरल वॉइस, उत्तर प्रदेश में 2018-19 से 2020-21 तक तीन पेराई सत्र में चीनी मिलों को गन्ने में एक से दो फीसदी अतिरिक्त रिकवरी से हजारों करोड़ रुपये का फायदा मिला है। एक सीजन में एक फीसदी अतिरिक्त रिकवरी से ही चीनी मिलों का अतिरिक्त फायदा 3,000 करोड़ रुपये बनता है। इन तीन वर्षों में मुख्य मंत्री  योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने  गन्ने का राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी)...

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सस्ते ईरानी सेबों की वजह से लड़खड़ा रहा है कश्मीर का सेब व्यापार

-न्यूजक्लिक, कश्मीर घाटी में 24 अरब रुपये से अधिक मूल्य के सेब अपना बाजार खोने के कगार पर हैं। सेब व्यापारियों का दावा है कि सस्ते ईरानी सेबों ने आ कर भारतीय बाजारों में धूम मचा दी है, जिससे उच्च गुणवत्ता वाले कश्मीरी सेब की मांग और कीमतों में भारी गिरावट आई है।  कश्मीर के प्रमुख सेब व्यापारियों के अनुसार, उत्पादकों और व्यापारियों के पास बिक्री की बाट जोह रहे सेब के...

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ग्लोबल उथल पुथल के बीच अर्थव्यवस्था की मजबूती के लिए बुनियादी बातों पर भी ध्यान देना जरूरी

-द प्रिंट, दुनियाभर में मौद्रिक नीति में बदलावों के कारण शेयर बाजारों में इन दिनों उथलपुथल चल रही है. अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने भी मौद्रिक नीति में सामान्यीकरण का संकेत दिया तो रुपये पर दबाव बढ़ गया. पिछले कुछ महीनों से कीमतों में तेजी के कारण कई बड़े देशों के केंद्रीय बैंक सामान्यीकरण की नीति अपनाने लगे हैं. मुद्रास्फीति जब नयी ऊंचाई को छूने लगी तो अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने इस महीने...

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