गांवों में आम आदमी को सस्ता, सुलभ न्याय दिलाने के उद्देश्य से 73 वां संविधान संशोधन विधेयक के तहत बिहार में ग्राम कचहरी को भी कानूनी मान्यता दी गयी. छोटे-मोटे विवादों का निबटारा गांवों में हो, ताकि बड़ी अदालतों पर बोझ कम हो. इसी मकसद से ग्राम कचहरी का गठन किया गया. राज्य में इसके प्रप्रतिनिधि भी हजारों की संख्या में चुने गये. पंच-सरपंच संघ बिहार प्रदेश के अध्यक्ष आमोद...
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10 साल की बच्ची को नौकरानी बनाने वाला परिवार फंसा
अम्बाला. लुधियाना की 10 वर्षीय अनीता को घरेलू नौकरानी के तौर पर रखने वाले सहगल परिवार के तीन सदस्यों के खिलाफ आखिर मामला दर्ज हो गया है। तीन दिन से अधिकारी इस मामले की जांच में जुटे थे। अब श्रम अधिकारी की शिकायत पर महेशनगर पुलिस ने मामला दर्ज किया है। पुलिस ने जुवेनाइल जस्टिस...
More »छह साल की उम्र में सर से उठा मां का साया, समाज ने बना दिया नौकरानी
अम्बाला। तब उसकी उम्र करीब छह साल थी। मां का साया सिर से उठ चुका था। पिता की आर्थिक हालत ठीक नहीं थी। उस समय उसे जरूरत थी कि कोई मदद के लिए आगे आए, सहारा बने, ताकि बच्ची का भविष्य बन जाए। ऐसे में पिता का एक जानकार आगे आया, लेकिन बच्ची का भविष्य...
More »मुखियाओं ने डाला शहरों में डेरा- संजय पांडेय-अनिल तिवारी
माओवाद के खौफ के कारण राज्य की कई पंचायतों में विचित्र स्थिति पैदा हो गयी है. नक्सल प्रभावित इलाकों के मुखिया ही पंचायत में रात गुजारने के लिए तैयार नहीं है. पश्चिम सिंहभूम के कई मुखिया ने चुनाव जीतने के बाद प्रखंड मुख्यालय में किराये पर घर ले लिया है. वे अब दिन के वक्त किसी योजना के क्रियान्वयन के दौरान ही अपनी पंचायत की तरफ जाते हैं. मुखिया की हत्या से खौफजदा पंचायती...
More »गरीबी, खाद्य सुरक्षा और कैश ट्रांसफर- रितिका खेड़ा
कुछ महीने पहले योजना आयोग की गरीबी रेखा पर काफी चर्चा हुई हैं. उच्चतम न्यायलय में दायर हलफनामे में योजना आयोग ने कहा कि 2011 की सरकार की गरीबी रेखा- ग्रामीण क्षेत्रों में 26 रुपए और शहरी क्षेत्रों में 32 रुपए- जीवनयापन यानी खाना, शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए पर्याप्त है. आज से पहले किसी भी सरकार ने यह दावा नहीं किया कि गरीबी रेखा जीवन बिताने के लिए पर्याप्त...
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