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कोरोना वायरस का डर, इम्युनिटी बना कमाई का नया फंडा

-आउटलुक, हल्दी वाला दूध, जड़ी बूटी से बना ब्रेड, रेस्टोरेंट मेन्यू में स्पेशल डिश, तो बीमारी से लड़ने वाले एनर्जी ड्रिंक, ये कोविड-19 दौर की नई मार्केटिंग स्ट्रेटेजी है। कंपनियों ने महामारी के संकट में बिक्री बढ़ाने का “इम्युनिटी” मंत्र अपना लिया है। यह मंत्र उन्हें आपके दिलो-दिमाग पर कोविड-19 के छाए डर से मिला है। यह डर इतना हावी है कि अकेले गूगल पर इम्युनिटी शब्द की सर्चिंग 500 फीसदी...

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‘आत्मनिर्भर भारत’: सरकार द्वारा जनता की जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ने का बहाना?

-न्यूजलॉन्ड्री, कोरोना महामारी के लगातार बढ़ते प्रभाव के कारण एक ओर देश की सामाजिक आर्थिक एवं शैक्षिक स्थिति बद से बदतर बनती जा रही है तो दूसरी तरफ केंद्र सरकार ने आत्मनिर्भरता की घोषणा के द्वारा जनता के प्रति कई जवाबदेहियों से अपने को मुक्त कर लिया है जिसके चलते सभी क्षेत्रों में घोर निराशा का वातावरण छाया हुआ है. आर्थिक मोर्चे पर गरीबी रेखा के नीचे जीवनयापन करने वाले तथा...

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किसान हित या खेती का कॉरपोरेटाइजेशन

-आउटलुक, केंद्र सरकार ने हाल में किसानों के उत्पादों की मार्केटिंग के लिए आर्थिक उदारीकरण की दिशा में तीन बड़े सुधार किए हैं। इनमें दो सुधारों के लिए पांच जून को राष्ट्रपति ने अध्यादेश जारी किए, क्योंकि इन फैसलों को कानूनी शक्ल देने के लिए सरकार संसद के सत्र का इंतजार नहीं करना चाहती थी। ये अध्यादेश हैं फार्मर्स प्रोड्यूस ट्रेड ऐंड कॉमर्स (प्रमोशन ऐंड फैसिलिटेशन) ऑर्डिनेंस, 2020 और फार्मर्स (एम्पावरमेंट...

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फसलों में टीबी की दवा का इस्तेमाल बंद करें: केंद्रीय संस्था

-डाउन टू अर्थ, सेंट्रल इंसेक्टिसाइड बोर्ड एंड रजिस्ट्रेशन कमेटी (केंद्रीय कीटनाशक बोर्ड और पंजीकरण समिति) के तहत रजिस्ट्रेशन कमेटी (आरसी) ने सिफारिश की है कि जहां जीवाणु (बैक्टेरियल) रोग नियंत्रण के लिए अन्य विकल्प मौजूद हो, वहां फसलों पर स्ट्रेप्टोमाइसिन और टेट्रासाइक्लिन जैसे एंटीबायोटिक्स का उपयोग तत्काल प्रभाव से और पूरी तरह से प्रतिबंधित किया जाना चाहिए। अंतिम रिपोर्ट में स्ट्रेप्टोमाइसिन सल्फेट (9 प्रतिशत) और टेट्रासाइक्लिन हाइड्रोक्लोराइड (1 प्रतिशत) के उत्पादन, बिक्री...

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कोरोना वायरस से जुड़ी भ्रांतियों के कारण, हजारों छोटे महिला मुर्गीपालक किसानों को व्यवसाय में हुआ घाटा

-विलेज स्कवायर, कुंती धुर्वे, मध्य प्रदेश में होशंगाबाद जिले के केसला प्रशासनिक ब्लॉक के जामुंडोल गांव की एक लघु स्तरीय मुर्गी-उत्पादक हैं। केसला के कुल 15,000 परिवारों में से, लगभग 9,000 आदिवासी परिवार हैं। लगभग 13% अनुसूचित जाति से सम्बन्ध रखते हैं। कुंती धुर्वे 2001 में गठित एक सहकारी समिति, केसला पोल्ट्री सोसाइटी की अध्यक्ष भी हैं। मध्य प्रदेश के होशंगाबाद और बैतूल जिले के 47 गाँवों के आदिवासी और दलित समुदायों...

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