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नेतृत्व जो जनजातियों को नहीं मिला- रामचंद्र गुहा

भारतीय संविधान ने दो सामाजिक समूहों को विशेष रूप से वंचित माना है। पहला, अनुसूचित जाति, जिसे बोलचाल की भाषा में दलित कहा जाता है, जबकि दूसरा समूह है अनुसूचित जनजाति, जिसे अमूमन आदिवासी माना जाता है। दोनों समूह अपनी रचना में असाधारण रूप से एक-दूसरे के विपरीत हैं। भाषा, जाति, गोत्र, धर्म और आजीविका जैसे तमाम मामलों में पूरी तरह से जुदा। आंध्र प्रदेश की मडिगा जाति और उत्तर...

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बयान / मेधा पाटकर ने कहा- एक व्यक्ति के लिए सरदार सरोवर बांध जल्दी भरा गया, 192 गांव जलमग्न हुए

भोपाल. नर्मदा बचाओ आंदोलन का नेतृत्व करने वाली सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर ने मंगलवार को न्यूज एजेंसी से कहा कि केवल एक व्यक्ति के लिए सरदार सरोवर बांध को समय से पहले भरा गया। इस कारण मध्यप्रदेश के तीन जिले धार, बड़वानी और अलीराजपुर के लगभग 192 गांव जलमग्न हो गए। दरअसल, पाटकर का इशारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर था। उन्होंने कहा कि गुजरात सरकार द्वारा बांध के जलस्तर...

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ट्रांसजेंडर्स द्वारा भीख मांगने को अपराध घोषित करने वाला प्रावधान विधेयक से हटाया गया

नई दिल्ली: ट्रांसजेंडर्स द्वारा भीख मांगने को आपराधिक गतिविधि बताने वाले ‘ट्रांसजेंडर्स पर्सन्स (प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स) विधेयक, 2019' के विवदित प्रावधान को हटा लिया गया है. इस विधेयक को केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार को मंजूरी दी. अब इसे संसद में पेश किया जाएगा. विधेयक से उस प्रावधान को भी हटा दिया गया है जिसके तहत ट्रांसजेंडर व्यक्ति को अपने समुदाय का होने की मान्यता प्राप्त करने के लिए जिला स्क्रीनिंग कमेटी...

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आज के समय में जाति के विरोध में कोई भी आंदोलन होता नहीं दिखता: आनंद तेलतुम्बड़े

नई दिल्ली: जाने-माने शिक्षाविद, लेखक और भीमा कोरेगांव प्रकरण में आरोपी प्रो. आनंद तेलतुम्बड़े ने आंबेडकर जयंती के मौके पर नई दिल्ली में एक सार्वजनिक सभा को संभोधित किया. इस मौके पर आनंद तेलतुम्बड़े ने कहा, ‘आंबेडकर को हर कोई अपने अपने ढंग से समझता है. आज के समय में हर राजनीतिक दल उन्हें अपना बताने की कोशिश में हैं लेकिन आंबेडकर के विचारों पर कोई नहीं चलना चाहता.' मालूम हो कि...

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तेरह प्वॉइंट रोस्टर का मुद्दा -- अनुज लुगुन

बातचीत के दौरान 13 प्वॉइंट रोस्टर पर कुछ विद्यार्थी यह चिंता जाहिर कर रहे थे कि यदि नियुक्तियों में इसी तरह के रोस्टर लागू होंगे, तो हमारे पढ़ने-लिखने का कोई मतलब नहीं रह जायेगा. यह व्यवस्था तो प्राचीन मनुवादी सामाजिक व्यवस्था की सूचक है, जिसमें वंचित समुदायों के समान अवसरों का निषेध किया जाता रहा है. तेरह प्वॉइंट रोस्टर को लेकर उनकी यह चिंता वाजिब है. उनकी इस चिंता...

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