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आंकड़ों से बाहर अलक्षित स्त्री-श्रम-- सुजाता

पुरानी बॉलीवुड फिल्मों में मां के किरदार को याद करते हुए अक्सर एक चेहरा निरूपा राय जैसी मां का सामने आता है, जो विधवा है, दुखी है, लेकिन स्वाभिमानी है. पति के न रहने पर वह दिन-रात दूसरों के कपड़े सिल कर अपने बच्चों को बड़ा करती है. अचानक यह एहसास होता है कि दुनिया का सारा कारोबार पुरुष के श्रम पर चलता है और स्त्री इसमें केवल मर्द के...

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दलाली ऐसी कि जाती ही नहीं-- अनिल रघुराज

अपने समाज में हर तरफ दलाली का बोलबाला है. जिधर भी देखिये, दलाल ही दलाल. पेशे की दलाली को छोड़ दीजिये. अब तो हर पेशे में दलालों ने ठौर बना लिया है. जो जितना बड़ा दलाल है, वह उतना ही रसूख और दौलत वाला है. लेकिन, किसी को गलती से भी दलाल कह दो, तो उखड़ कर आपको जाने क्या-क्या कह डालता है. कारण, दलाली के लिए छवि का बड़ा...

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मध्य प्रदेश-- अधिकारियों के सामने बच्‍चों से कराई जा रही है मजदूरी

भगवां। स्थानीय जनपद क्षेत्र में बाल श्रम कानून का खुलकर उल्लंघन किया जा रहा है। निर्माण एजेंसी ग्राम पंचायत के मुखिया पंचायती विकास कार्यो में बच्चों से मजदूरी करा रहे हैं और जिम्मेदार विभाग मूकदर्शक बना हुआ है। ग्राम पंचायत झिंगरी में सीमेंट कांक्रीट सड़क निर्माण कार्य में किशोर व किशोरियों को मजदूरी में लगाया गया है। ग्राम पंचायत झिंगरी में विगत कुछ दिनो से सीमेंट कांक्रीट सड़क का निर्माण जारी...

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लिंग अनुपात शर्मनाक: पढ़ें- कहां हुई सबसे ज्यादा बेटियों की हत्या

भारत में लिंग अनुपात वर्ष 2011-13 की तुलना में वर्ष 2012-14 में तीन अंक गिरा है। वर्ष 2011-13 में प्रति 1000 पुरुष 909 लड़कियां थी जो 2012-14 में घटकर 906 ही रह गई हैं। यह खुलासा सांख्यिकीय रिपोर्ट 2014 के सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (एसआरएस) में हुआ है। इन आंकड़ों से पता चलता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में लिंग अनुपात शहरी क्षेत्रों के मुकाबले ज्यादा तेजी से बिगड़ा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों...

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जीडीपी बनाम भूख सूचकांक-- धर्मेन्द्रपाल सिंह

ताजा विश्व भूख सूचकांक या ग्लोबल हंगर इंडेक्स (जीएचआइ) के अनुसार भारत की स्थिति अपने पड़ोसी मुल्क नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका और चीन से बदतर है। यह सूचकांक हर साल अंतरराष्ट्रीय खाद्य नीति अनुसंधान संस्थान (आइएफपीआरआइ) जारी करता है, जिससे दुनिया के विभिन्न देशों में भूख और कुपोषण की स्थिति का अंदाजा लगता है। आज केवल इक्कीस देशों में हालात हमसे बुरे हैं। विकासशील देशों की बात जाने दें, हमारे देश...

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