डाउन टू अर्थ, 06 नवम्बर नवंबर की शुरुआत में एक ही दिन के भीतर दिल्ली-एनसीआर में पीएम 2.5 का स्तर आश्चर्यजनक तरीके से 68 प्रतिशत तक बढ़ गया। यह बात सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई) ने अपने एक नए विश्लेषण में कही है। विश्लेषण में कहा गया है कि यह प्रदूषण अति गंभीर स्थिति को दर्शाता है। सीएसई का कहना है कि इस गंभीर स्थिति के बाद दिल्ली और एनसीआर में...
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खतरे में हिल स्टेशन: क्या जोशीमठ के 'सबक' आ सकते हैं काम?
डाउन टू अर्थ, 3 नवम्बर मॉनसून 2023 बीत चुका है और हर सीजन की तरह यह मॉनसून हिमालयी राज्यों को नए जख्म दे गया। बल्कि हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और सिक्किम को तो ऐसे जख्म दे गया कि जो कई साल तक सालते रहेंगे। साल 2023 की शुरुआत जोशीमठ आपदा से शुरू हुई थी। जोशीमठ ने देश ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा। इसके बाद मॉनसून के दौरान हिमाचल...
More »जलवायु संकट: तीन से चार दिन पहले आ रहे शक्तिशाली उष्णकटिबंधीय चक्रवात
डाउन टू अर्थ,10 अक्टूबर एक नई रिसर्च के हवाले से पता चला है कि जलवायु में आते बदलावों के चलते 80 के दशक से शक्तिशाली उष्णकटिबंधीय चक्रवात हर दशक तीन से चार दिन पहले आ रहे हैं। गौरतलब है कि यह चक्रवात बेहद शक्तिशाली यानी श्रेणी 4 और 5 के होते हैं, जिनके दौरान हवाओं की गति 131 मील प्रति घंटा या उससे ज्यादा रहती है। यह रिसर्च हवाई विश्वविद्यालय, साउथर्न यूनिवर्सिटी...
More »जानिए क्या है गुइलेन-बैरे सिंड्रोम, जिसके चलते पेरू में लगाना पड़ा स्वास्थ्य आपातकाल
डाउन टू अर्थ, 12 जुलाई गुइलेन-बैरे सिंड्रोम या जीबी सिंड्रोम से पीड़ित मरीजों की संख्या में वृद्धि होने के बाद दक्षिण अमेरिकी देश पेरू ने गत शनिवार को राष्ट्रीय स्वास्थ्य आपातकाल की घोषणा कर दी है। यह आपातकाल 90 दिनों के लिए लगाया गया है। इस बारे में 10 जुलाई 2023 को पैन अमेरिकन हेल्थ आर्गेनाईजेशन (पाहो) द्वारा जारी रिपोर्ट से पता चला है कि पेरू में 08 जुलाई तक जीबी सिंड्रोम...
More »क्या जलवायु परिवर्तन की वजह से बढ़ते पलायन को वैश्विक मान्यता मिल पाएगी?
डाउन टू अर्थ, 16 नवम्बर जलवायु आपातकाल इसे और तीव्र कर रहा है क्योंकि अधिक से अधिक आपदाएं देशों को प्रभावित कर रही हैं। यह आपातकाल लोगों की सहनशक्ति को भी लगातार कम कर रहा है। इंटरनेशनल ऑर्गनाइजेशन फॉर माइग्रेशन (आईओएम) का कहना है कि जलवायु परिवर्तन से प्रेरित आपदाएं पलायन को नए रूप दे रही हैं। अब पलायन केवल देश के भीतर ही नहीं] बल्कि देशों के बीच भी हो रहा...
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