-आउटलुक, हॉकी जैसे तेज-तर्रार खेल में एक गोलकीपर मैदान पर सभी खिलाड़ियों में सबसे निष्क्रिय और बिना किसी तरह के सुर्खियों रहने वाला लग सकता है। लेकिन, खेल प्रशंसकों को पता होगा कि ये गोलकीपर ही होते हैं जो टीम को अपने बचाव को मजबूत करके और बाकी खिलाड़ियों को आक्रामक और गोल करने की अनुमति देकर टीम को मजबूती प्रदान करते हैं। एक ऐसा दिन जब पूरा भारत हॉकीमय हो गया है, जहां...
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सामान्य मानसून से कृषि उत्पादन का बनेगा नया रिकॉर्ड: कृषि सचिव
इस साल भी मानसून सामान्य रहने की मौसम विभाग की भविष्यवाणी से उत्साहित कृषि सचिव एस के पटनायक ने आज कहा कि इससे देश का खाद्यान्न उत्पादन नया रिकार्ड बनायेगा. उन्होंने कहा कि मानसून सामान्य रहने से खाद्यान्न उत्पादन इस साल के 27 करोड़ 75 लाख टन के रिकॉर्ड को भी पार कर जायेगा. दक्षिण पश्चिम मानसून , भारत की कृषि के साथ साथ अर्थव्यवस्था के लिए जीवन रेखा के समान...
More »वक्त के पन्नों पर जो दर्ज कर गये अपनी अमिट छाप
नियम यह है विधाता का / सभी आकर चले जाते / मगर कुछ लोग ऐसे हैं / जो जाकर भी नहीं जाते। न सब धनवान होते हैं / न सब भगवान होते हैं/ दयालु, लोकप्रिय, सतपाल / भले इनसान होते हैं।। ... और ऐसा कोई इनसान जब वक्त के पन्नों पर अपनी अमिट छाप छोड़ कर हमारे बीच से विदा होता है, तो यह हम सबका साझा फर्ज बनता...
More »गरीबी के बारे में डीटन ने बढ़ाई है अर्थशास्त्र की समझ-- रीतिका खेड़ा
अपने पूरे कैरिअर में माप के मसले उनकी चिंताओं के केंद्र में रहे हैं। उनके अनुसार आंकड़ों को बिना सवाल किए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। उदाहरण के लिए इस सदी के शुरूआती वर्षों में उन्होंने भारत में मूल्य सूचकांक की गणना की समस्याएं रेखांकित करते हुए यह दिखाया था कि वह कैसे गरीबी संबंधी अनुमानों को प्रभावित करती है। भारत के संबंध में उनका एक और काम गौर फरमाने...
More »अमीरी रेखा की जरूरत- सुनील
जनसत्ता 12 दिसंबर, 2011 : कुछ माह पहले जब योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने सर्वोच्च न्यायालय में हलफनामा दिया कि शहरों में बत्तीस रु. और गांवों में छब्बीस रु. प्रतिदिन खर्च करने वालों को गरीबी रेखा से ऊपर माना जाएगा, तो देश के संभ्रांत पढ़े-लिखे लोगों में और मीडिया में खलबली मच गई। अहलूवालिया से लेकर जयराम रमेश तक को सफाई में बयान देने पडे। उन्होंने यह...
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