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पेसा कानून में बदलाव के खिलाफ छत्तीसगढ़ के आदिवासी हुए गोलबंद, रायपुर में निकाली रैली

जनचौक, 3 अक्टूबर गांधी जयंती के अवसर में छत्तीसगढ़ के समस्त आदिवासी इलाके की ग्राम सभाओं का एक महासम्मेलन गोंडवाना भवन में आयोजित किया गया जिसमें विभिन्न ग्राम सभाओं के 5000 से अधिक आदिवासी प्रतिनिधि हिस्सा लिए।  इस मौके पर सूबे के अलग-अलग हिस्सों से आए सिलगेर से रघु,कोयलीबेड़ा से सहदेव उसेंडी, दुर्गुकोंदल से जगत दुग्गा, अंतागढ़ से संत लाल दुग्गा, सिहावा से लोकेश्वरी नेताम, मीरा संघमित्रा,मानपुर से सरजु टेकाम, बीजापुर से...

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मनरेगा में लगातार दूसरी बार बजट कटौती, गांव कैसे बनेंगे आत्मनिर्भर

-न्यूजलॉन्ड्री, कोरोनाकाल के तीसरे वर्ष में जब रोजगार संकट चरम पर है और लोगों की जेबें खाली हैं तब गांवों में श्रमिकों का सहारा बनने वाले महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी कानून (मनरेगा) में लगातार दूसरे वर्ष बजट प्रावधान में कटौती की गई है. बजट कम होने का सीधा मतलब श्रमदिवस के कम होने और रोजगार के अवसरों में कमी से भी है. 01 फरवरी, 2022 को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण...

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इंटरव्यू/भूपेश बघेल: “राज्यों को कर्ज की ओर ढकेल रहा केंद्र”

-आउटलुक, “बघेल ने विकास के छत्तीसगढ़ मॉडल के बारे में विस्तार से बात की” भूपेश बघेल ने हाल ही छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के रूप में तीन साल का कार्यकाल पूरा किया है। उनके नेतृत्व में दो दर्जन से अधिक क्षेत्रों में उपलब्धियां हासिल करके यह प्रदेश एक मॉडल बन कर उभरा है। इसके लिए उसे राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार भी मिले हैं। आउटलुक के लिए आशुतोष शर्मा के साथ बातचीत में बघेल ने विकास के...

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सूखे बुंदेलखंड में जल संरक्षण की मिसाल है जखनी गांव

-वाटर पोर्टल, भारत में जब भी जल संकट की बात होती है, तो उत्तरप्रदेश के बुंदेलखंड़ का जिक्र जरूर होता है। यहां पाताल में जाता भूजल, मुंह चिढ़ाते सूखे कुएं-तालाब और दम तोड़ती नदियों के कारण बुंदेलखंड़ में किसान होना अभिशाप हो गया है। पानी की कमी के चलते किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है। पानी का संकट, खेती में नुकसान और रोजगार का अभाव युवाओं को पलायन के लिए मजबूर...

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किसानों में आक्रोश को लेकर गांधी ने जो चेतावनी दी थी क्या आज हम उसी का सामना कर रहे हैं?

-सत्याग्रह,  आधुनिक भारत में संगठित किसान आंदोलन के जनकों में से एक प्रोफेसर एनजी रंगा स्वयं एक किसान के बेटे थे. उन्होंने गुंटूर के ग्रामीण विद्यालय से लेकर ऑक्सफर्ड तक में अर्थशास्त्र की पढ़ाई की थी और वे गांधी से बेहद प्रभावित थे. गांधी से मिलते तो सवालों की झड़ी लगा देते थे और कई बार लंबी-लंबी प्रश्नावली पहले से लिखकर उन्हें सौंप देते थे. 1944 में जब गांधी जेल से...

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