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असम में 2021 के दौरान अपराध के मामलों में 10% इजाफा : NCRB

एनडीटीवी इंडिया, 31 अगस्त  अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2021 में असम में अपराध के मामलों की संख्या लगभग 10 प्रतिशत बढ़कर 1.33 लाख से अधिक हो गई. रिपोर्ट में कहा गया है कि असम में पिछले साल अपराध के 1,33,239 मामले दर्ज किए गए, जबकि 2020 में 1,21,609 मामले दर्ज किए गए थे. इनमें से 1,19,883 मामले भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के अपराध थे. यह...

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NCRB 2021: महिलाओं के खिलाफ अपराध में 15% की बढ़ोतरी, दिल्ली सबसे असुरक्षित

 क्विंट हिंदी, 30 अगस्त देश की राजधानी दिल्ली (Delhi) में साल 2021 में हर 24 घंटे में दो नाबालिग लड़कियों के साथ बलात्कार की शर्मनाक घटना हुई है. मतलब दिल्ली देश भर में महिलाओं के लिए सबसे असुरक्षित मेट्री सिटी है. ये बात राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की ताजा रिपोर्ट में सामने आई है. दिल्ली में साल 2021 में महिलाओं के खिलाफ अपराधों के 13,892 मामले दर्ज किए गए, जो...

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छत्तीसगढ़: 121 आदिवासियों ने उस अपराध के लिए 5 साल की जेल काटी जो उन्होंने किया ही नहीं

न्यूज़लॉन्ड्री, 25 जुलाई  छत्तीसगढ़ के बुर्कापल में एक हमले में सीआरपीएफ के 25 जवान मारे गए थे. इस मामले में पुलिस ने माओवादियों की मदद करने के संदेह में 121 आदिवासियों को गिरफ्तार कर लिया था. अब इसी मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी की कोर्ट ने पांच साल बाद अपना फैसला सुनाया है. दंतेवाड़ा की कोर्ट ने सभी को निर्दोष मानते हुए बरी कर दिया है. पांच साल की सजा किस बात...

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नए भारत में पनपते अंधविश्वास आधारित अपराध

-कारवां, “हमे नहीं पता कि क्या हुआ है!” आदिवासी कार्यकर्ता और पेशे से डॉक्टर अभय ओहरी रतलाम, मध्य प्रदेश में जय आदिवासी युवा शक्ति नाम का एक आदिवासी युवा संगठन चलाते हैं. एक दिन उन्हें संगठन के एक कार्यकर्ता का फोन आया, जिसने घबराई हुई आवाज में उन्हें जल्द से जल्द रतलाम जिला अस्पताल पहुंचने के लिए कहा. उन्हें बताया गया कि “राजाराम खादरी का शव यहां है. वो मर चुका है....

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गांव में अपराध: क्या सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं से फर्क पड़ता है?

-गांव सवेरा, ग्रामीण भारत में गरीबी के उन्मूलन और आर्थिक विकास हेतु अच्छी बुनियादी सुविधाओं तक पहुंच होना महत्वपूर्ण है। यह लेख, भारत मानव विकास सर्वेक्षण (आईएचडीएस) के 2004-05 और 2011-12 के आंकड़ों का विश्लेषण करते हुए दर्शाता है कि पक्की सड़कों से जुड़े गांवों के परिवारों में अपराध, श्रम बल की भागीदारी और पारिवारिक आय के सन्दर्भ में उन गांवों में रहने वालों की तुलना में बेहतर परिणाम पाए गए...

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