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चर्चा में.... | क्या मनरेगा बजट डूबती ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए काफी है?
क्या मनरेगा बजट डूबती ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए काफी है?

क्या मनरेगा बजट डूबती ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए काफी है?

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published Published on Feb 4, 2020   modified Modified on Feb 4, 2020

वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण द्वारा 1 फरवरी, 2020 को प्रस्तुत केंद्रीय बजट 2020-21, सामाजिक कार्यकर्ताओं और किसान समूहों (यहां और यहां क्लिक करें) को प्रभावित करने में विफल रहा हैं. अपनी प्रेस नोटों के माध्यम से, इन सगंठनों के सदस्य विशेष रूप से महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) और प्रधानमंत्री किसान विकास योजना (PM-KISAN)और ग्रामीण और कृषि क्षेत्र के लिए बजटीय आवंटन में बढ़ोतरी करने के लिए केंद्र सरकार से लगातार मांग कर रहे थे और अपने सुझाव भी प्रस्तुत कर रहे थे.
 
इन संगठनों का मानना है कि MGNREGA और PM-KISAN पर बजटीय खर्च बढ़ने से ग्रामीण जनता की क्रय शक्ति में सुधार होगा, ताकि देश आर्थिक मंदी से बाहर आ सके और घटती डिमांड से निपटा जा सके. इस तरह, सरकार कम टैक्स क्लेकशन जैसे संकट से गुजरने के बावजूद भी ग्रामीण संकट से निपटने की तरफ कदम उठा सकता थी.
 
दुर्भाग्य से, अब ऐसा लगता है कि सामाजिक कार्यकर्ताओं और अर्थशास्त्रियों की अधिकांश मांगों और सिफारिशों को अनसुना कर दिया गया है. पिछले बजट यानी वित्त वर्ष 2019-20 (संशोधित अनुमान Revised Estimates-RE) में मनरेगा के लिए 71,002 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे, जिसे इस साल के बजट यानी वित्त वर्ष 2020-21 (बजट अनुमान Budget Estimates-BE) में आंवटन घटाकर 61,500 करोड़ रुपये कर दिया गया है. जोकि पिछले वर्ष के बजट से 9,502 करोड़ रुपए कम है. (-13.4 प्रतिशत)
 
वर्ष 2019-20 (बजट अनुमान Budget Estimates-BE) में आवंटित 60,000 करोड़ रुपये के मुकाबले वर्ष 2020-21 (बजट अनुमान Budget Estimates-BE) में आवंटन में केवल 1,500 करोड़ रुपएकी वृद्धि की गई है (अर्थात 2.5 प्रतिशत की).'बजट एट ए ग्लांस 2020-21' दस्तावेज के अनुसार, वर्ष 2019-20 के मुकाबले 2020-21 में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि 10.0 प्रतिशत रहने की उम्मीद है. दूसरे शब्दों में कहें तो, 2020-21 में MGNREGA आवंटन (B.E.) जीडीपी के अनुपात के रूप में, वर्ष 2019-20 के मौजूदा आंकड़े से कम होने की उम्मीद है.
 
कृपया ध्यान दें कि आर्थिक सर्वेक्षण 2019-20 के हिसाब से वित्त वर्ष 2020-21 के दौरान आर्थिक वृद्धि (अर्थात वास्तविक जीडीपी विकास दर) 6.0-6.5 प्रतिशत के आसपास रहने की आशंका है. इसका मतलब है कि वित्त वर्ष 2020-21 में अर्थव्यवस्था में मुद्रास्फीति की दर (जीडीपी डिफ्लेटर में वृद्धि) 3.5-4.0 प्रतिशत के आसपास रहने की उम्मीद है, और 'बजट एट ए ग्लांस 2020-21' के अनुसार 10.0 प्रतिशत के हिसाब से जीडीपी में वृद्धि होने की उम्मीद है. 2019-20 और 2020-21 (2.5 प्रतिशत) के बीच MGNREGA आवंटन (B.E.) में वृद्धि, इन दो वर्षों के बीच मुद्रास्फीति की दर (जीडीपी डिफ्लेटर) से कम प्रतीत होती है. इसलिए, वास्तविक रूप में, 2020-21 में मनरेगा MGNREGA के लिए बजट आवंटन, वर्ष 2019-20 की तुलना में कम है, भले ही हम आधिकारिक डेटा का विश्लेषण करे.
 
1 फरवरी, 2020 को जारी एक प्रेस नोट में, पीपुल्स एक्शन फ़ॉर एम्प्लॉयमेंट गारंटी (PAEG) – (मनरेगा पर काम करने वाले विशेषज्ञों और कार्यकर्ताओं का एक नागरिक समूह) ने अनुमान लगाया है कि केंद्रीय बजट 2020-21 में आदर्श रूप से मनरेगा के लिए 85,927 करोड़ रूपए की एक न्यूनतम राशि अलग से आंवटित करनी चाहिए. इसकी गणना निम्नलिखित मान्यताओं पर आधारित है:
 
i. मजदूरी सूचकांक में मूल्य वृद्धि और मुद्रास्फीति के कारण पिछले वर्ष की लागत में 8 प्रतिशत की वृद्धि के हिसाब से पिछले वर्ष की 248 रुपये प्रतिदिन प्रतिव्यक्ति मजदूरी को बढ़ाकर 268 रुपए मानते हुए.
ii. 2019-20 तक स्वीकृत श्रम बजट (लेबर बजटLB) के रूप में 270 करोड़ व्यक्ति-दिवस को ध्यान में रखते हुए.
iii. स्वीकृत लेबर बजट के लिए मजदूरी भुगतान को पूरा करने के लिए आवश्यक कुल वित्तीय आवंटन (i + ii), यानी 72,360 करोड़ रुपये है.
iv. औसतन, कुल खर्च का एक-चौथाई हिस्सा भौतिक लागतों के लिए रहा है (वास्तव में यह 40 प्रतिशत तक हो सकता है) यह लागत सामग्री 0.25 * 72,360 = 18,090 करोड़ रुपये होगी. MGNREG अधिनियम के अनुसार, सामग्री लागत का तीन-चौथाई केंद्र सरकार द्वारा वहन किया जाना है. इस प्रकार, केंद्र सरकार के लिए लागत सामग्री 0.75 * 18,090 = 13,567 करोड़ रुपये होगी.
v. केंद्र सरकार द्वारा आवश्यक कुल आवंटन मजदूरी + सामग्री = 72,360 करोड़ + 13,567 करोड़ = 85,927 करोड़ रुपये होगा.
 
PAEG द्वारा प्रेस नोट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि प्रत्येक वर्ष के अंत में लंबित देनदारियों को ध्यान में रखते हुए बजट के लिए (प्रत्येक वर्ष के आवंटन का एक-छठा हिस्सा), मनरेगा योजना में न्यूनतम मजदूरी का भुगतान (जो कि वर्तमान में ज्यादातर राज्यों में नहीं हो रहा है) और "स्वीकृत" श्रम बजट के बजाय वास्तविक श्रम बजट, जिनके आंकड़े दबा दिए जाते हैं, बजटीय आवंटन 1 लाख करोड़ रुपये रुपये से कम नहीं होना चाहिए था.
 
PM-KISAN के लिए निर्धारित बजटीय राशि वित्त वर्ष 2019-20 में खर्च नहीं की गई है. इसकी वजह है कि वित्तीय वर्ष 2019-20 में पीएम- KISAN के लिए बजट अनुमान (Budget Estimates-BE) (75,000 करोड़ रुपये) की तुलना में संशोधित अनुमान(Revised Estimates-RE) (54,370 करोड़ रुपये) कम है. (इसी वजह से ग्रामीण क्षेत्रों में पीएम-किसान फंडों का वितरण नहीं हो रहा है, जैसा कि कुछ समाचार रिपोर्टों द्वारा दिखाया गया है.)
 
References
 
Budget speech by the Finance Minister dated 1st February 2020, please click here to access

Farmers' group not impressed with Union Budget 2020-21, Press released by All India Kisan Sangharsh Coordination Committee (AIKSCC) dated 1st February, 2020, please click here to access

Budgetary allocations to agricultural and rural sector is meagre, alleges ASHA, Press release by Alliance for Sustainable & Holistic Agriculture (ASHA) dated 1st February, 2020, please click here to access 

MGNREGA allocation slashed by Rs. 9,500 crore in the Union Budget 2020-21, allege Right to Work activists, Press release by Peoples' Action for Employment Guarantee dated 1st February, 2020, please click here to access 

Civil society demands for increase in budgetary allocation under MGNREGA to clear pending wages, Press release by NREGA Sangharsh Morcha dated 31st January, 2020, please click here to access 

Civil society presses for an increase in budgetary allocation for MGNREGA in FY 2020-21, Press release by NREGA Sangharsh Morcha dated 27th January, 2020, please click here to access 

Economic Survey 2019-2020, Volume-II, Ministry of Finance, please click here to access 
 
Guidelines/ framework for "Planning for Works and Preparation of Labour Budget" under the MGNREGA for the FY 2020-21, please click here to access 
 
Almost 75% farmers did not get all 3 PM Kisan instalments, a year after implementation -Kabir Agarwal, TheWire.in, 28 January, 2020, please click here to access   



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