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चर्चा में.... | बजट 2016 : सरकार ने कहा विकास-बजट, नागरिक संगठनों ने 'किसान-विरोधी'
बजट 2016 : सरकार ने कहा विकास-बजट, नागरिक संगठनों ने 'किसान-विरोधी'

बजट 2016 : सरकार ने कहा विकास-बजट, नागरिक संगठनों ने 'किसान-विरोधी'

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published Published on Mar 3, 2016   modified Modified on Mar 3, 2016
 
बजट-2016 को सरकार ने विकास का बजट कहा और अखबारों ने सुर्खियां लगायीं-- ‘नमो ! ग्राम देवता’, ‘किसानों, गरीबों का बजट’, ‘अबकी बार, गांव चली सरकार’, ‘मेरा गांव, मेरा देश’!

 
लेकिन किसानों और वंचित तबके के अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे नागरिक संगठनों की राय एक अलग ही कहानी बयां करती है.

 
सूखाग्रस्त बुंदेलखंड के ग्रामीण परिवारों की भुखमरी की स्थिति पर अपने सर्वेक्षण और हालात में फौरी राहत के लिए सुप्रीम कोर्ट में दायर अपनी याचिका से हाल में चर्चा में आये ‘जय किसान आंदोलन’ ने बजट को निराशाजनक करार देते हुए कहा है कि “ बजट भाषण में किसानों की 'आय सुरक्षा' की बात की गयी, कहा गया 5 साल में आय दुगुनी होगी। लेकिन इसके लिए कोई प्रावधान या प्रक्रिया नहीं बताया गया. ” ( जय किसान आंदोलन के मुख्य तर्क के लिए देखें एलर्ट का आखिर का अंश और यह लिंक).

 
ऑल इंडिया पी’पल्स फ्रंट(रेडिकल- एआईपीएफआर) ने अपनी प्रेस विज्ञप्ति में कहा है कि सरकार ने इस साल के कुल बजट आबंटन (19,78,060 करोड़ रुपए) का 2 प्रतिशत से भी कम (35,983.69 करोड़ रुपया) खेती-किसानी के लिए दिया है. एआईपीएफआर के मुताबिक आवंटित बजट के ब्योरे में 15,000 करोड़ रुपया कृषि वित्तीय संस्थान को दिया गया है जो कि मुख्य रुप से बीमा और फाइनेंस कंपनियों से संबंधित है।(देखें लिंक)
 
 
एआईपीएफआर ने आरोप लगाया है कि “कृषि पर बजट बढ़ाने का ढिंढोरा पीट रही सरकार की कृषि बजट में वृद्धि बीमा कंपनियों के लिए है, न कि किसानों के लिए और बीमा क्षेत्र में सौ फीसदी एफडीआई करके यह भी साफ कर दिया है कि किन बीमा कम्पनियों के लिए यह बजट बढ़ा है.”

 
गौरतलब है कि नये बजट में कृषि एवं कृषक कल्याण विभाग के लिए आबंटन पिछले साल के बजट-आबंटन के संशोधित आकलन(15,809 करोड़) की तुलना में 127 प्रतिशत बढ़कर 35,983 करोड़ हो गया है लेकिन जय किसान आंदोलन तथा विषय के कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि इस बढोत्तरी का ज्यादातर हिस्सा(15000 करोड़) छोटी अवधि के कृषि-ऋण पर दी जाने वाली सब्सिडी के रुप में है. (देखें यह लिंक)

 
पिछले बजट में इस सब्सिडी को कृषि एवं कृषक कल्याण विभाग के आबंटन में ना दिखाकर वित्तीय सेवा विभाग के आबंटन के रुप में दिखाया गया था और तब यह राशि 13000 करोड़ रुपये की थी. विशेषज्ञों का कहना है कि एक तो छोटी अवधि के कर्जों के मद में सब्सिडी में की गई बढोत्तरी बहुत कम(2 हजार करोड़) है, दूसरे कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्रालय को कुल बजट-आबंटन में इसी वृद्धि का हिस्सा तकरीबन 40 प्रतिशत  है. 

 
नये बजट में समाज के हाशिए के वर्गों के हितों की अनदेखी पर ध्यान दिलाते हुए नेशनल कंपेन फॉर दलित ह्यूमन राइटस्(एनसीडीएचआऱ) ने कहा है कि 2016 के केंद्रीय बजट-आबंटन में शिड्यूल कास्ट सब प्लान(एससीएसपी) तथा ट्रायबल सब प्लान(टीएसपी) के मद में कुल 75 हजार करोड़ रुपये से भी ज्यादा की हकमारी की गई है.

 
एनसीडीएचआऱ के विश्लेषण के मुताबिक केंद्रीय बजट में एससीएसपी के मद में नियम के मुताबिक योजनागत व्यय का 16.8 प्रतिशत हिस्सा यानि 91301 करोड़ रुपया दिया जाना चाहिए और टीएसपी के मद में योजनागत व्यय का 8.6 प्रतिशत यानि 47300 करोड़ रुपये. एनसीडीएचआऱ आरोप है कि केंद्रीय बजट में एससीएसपी तथा टीएसपी के मद में 11.42 प्रतिशत यानि 40 हजार करोड़ से भी कम राशि दी गई है जो कि वांछित से 75 हजार करोड़ रुपये कम है.

 
गौरतलब है कि जाधव समिति की सिफारिशों के आधार पर 2011-12 में सरकार ने शिड्यूल कास्ट सब प्लान के बारे में 26 मंत्रालयों/विभागों तथा ट्रायबल सब प्लान के बारे में 29 मंत्रालयों/विभागों को निर्देश दिया था कि वे अनुसूचित जाति तथा जनजाति के कल्याण को ध्यान में रखते हुए आबादी में इस तबके के अनुपात के अनुसार बजट आबंटन करें. नई जनगणना में देश की कुल आबादी में अनुसूचित जाति की संख्या 16.6 प्रतिशत तथा अनुसूचित जनजाति की 8.6 प्रतिशत बतायी गई है.


 
नये बजट में कृषि एवं किसानों के लिए हुए बजट आबंटन के बारे में जय किसान आंदोलन की समीक्षा के मुख्य बिन्दुओं को पाठकों की सुविधा के लिए नीचे प्रस्तुत किया जा रहा है—

 
--- जिस बजट को किसान के हक में बताया जा रहा है और कुल 35,984 करोड़ रुपये के आवंटन का हवाला दिया जा रहा है, सच्चाई में यह आंकड़ों का खेल है। फसल ऋण के व्याज पर सब्सिडी जो हर साल रेवेन्यू बजट में शामिल होता था, उसके 15,000 करोड़ इस बार कृषि मंत्रालय के बजट में शामिल कर दिया गया है। अगर व्याज सब्सिडी को अलग रखा जाए तो यह सिर्फ 20,984 करोड़ है। साल 2014-15 में कृषि डिपार्टमेंट का बजट 19,852 करोड़ था जिसे साल 2015-16 में घटा कर 17,004 कर दिया गया था, उसे ही फिर से बढ़ा दिया है। इस से साफ़ है की कुछ ख़ास बढौती इस बजट में बिलकुल नहीं! दरअसल पूरे बजट का मात्र 1.9% खेती के लिए रखा गया है जबकि देश की 55% जनता खेती पर निर्भर है और बहुत ही बुरे दौर से गुजर रही है। 

 
---  प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का आवंटन दरअसल पिछले साल के 7,590 करोड़ से घटकर 5,767 करोड़ कर दिया गया है। और कहा गया है कि फसल बीमा के अंतर्गत अभी सिर्फ 20% आने वाले किसानों की संख्या को बढ़ा कर 50% किया जाएगा, दरअसल इसमें भी नए किसान नहीं जुड़ पाएंगे क्योंकि कि सारा पैसा पहले से बीमा धारक किसानों के लिए बीमा कंपनियों को उच्च प्रिमियम सब्सिडी के रूप में चला जाएगा।

 
---अगले 5 साल में 28.5 लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचाई व्यवस्था के अधीन ले आने का लक्ष्य स्वागत योग्य है। लेकिन यह कुल कृषि भूमि 141 मिलियन हेक्टेयर का 2% से भी कम होगा। केंद्र की ओर से प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना को सिर्फ 12000 करोड़ आवंटित किया गया है। साल 2014-15 में यह राशि 13,492 करोड़ था जिसमें से मात्र 5,630 करोड़ खर्च किया गया। 

 
---देश का 40% हिस्सा जब त्रासदी से गुजर रहा है तो मनरेगा में भी लगभग 60,000 करोड़ के बड़े अनुदान की जरूरत थी। लेकिन वास्तव में 38,500 करोड़ की राशि ही आवंटित है जो देखने में ज्यादा इसलिये लग रहा है क्योंकि पिछले दो साल में बहुत कटौती हुई है। दरअसल यह आवंटित राशि अब बढ़कर साल 2011-12 के 39,000 करोड़ के आवंटन के आसपास हुई है। 

 
---15000 करोड़ के ब्याज सब्सिडी में पिछले साल के 12000 करोड़ से मामूली बढ़त की गई है। 

 
---- किसानों की मांग रही है कि आपदा भरपाई को बढ़ा कर 10000 रूपये प्रति एकड़ किया जाए लेकिन 3000-4000 रुपये प्रति एकड़ के वर्तमान स्वरूप में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। 

 
----वर्तमान में काश्तकार और  बटाईदार बैंक लोन से वंचित रहते हैं। उनको लोन की व्यवस्था में शामिल करने की कोई व्यवस्था नहीं की गई है।

 
---- किसानों के लिए अधिक न्यूनतम समर्थन मूल्य, बाजार हस्तक्षेप स्कीम या बाजार स्थिरता कोष आदि में कोई आवंटन नहीं किया गया है।

 
---- वर्षा अधारित खेती जो बड़े संकट से गुजर रही है उसके लिए कोई विशेष व्यवस्था नहीं की गई है।
 
 
इस कथा के विस्तार के लिए कृपया निम्नलिखित लिंक देखें---
 

Note on Demands for Grants for Department of Agriculture, Cooperation and Farmers' Welfare (2016-17), Ministry of Agriculture, please click hereto access 

 

Note on Demands for Grants for Department of Financial Services (2015-16), Ministry of Finance, please click here to access 

 

UPA’s flagship MGNREGA receives a fresh lease of life -Harish Damodaran, The Indian Express, 1 March, 2016, please click here to access 

 

Pretending to be pro-poor, little change over UPA -Arun Kumar, The Tribune, 1 March, 2016, please click here to access 

 

The Union Budget’s political message -Smita Gupta, The Hindu, 1 March, 2016, please click here to access 

 

No Gamechangers For Farmers -Ashok Gulati, The Indian Express, 1 March, 2016, please click here to access 

 

Applause and the fine print -Devadeep Purohit, The Telegraph, 1 March, 2016, please click here to access 

 

By no means a ‘socialist’ Budget -G Sampath, The Hindu, 1 March, 2016, please click here to access 

 

Just another trivial Budget -Ashok V Desai, The Hindu, 1 March, 2016, please click here to read  

 

Government tries to harvest success with farmer-friendly Budget -Richard Mahapatra, Down to Earth, 29 February, 2016, please click here to read more 

 
'Too little' tag on rural job scheme raise, The Telegraph, 29 February, 2016, please click here to access  
 
 



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