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न्यूज क्लिपिंग्स् | "किसान आंदोलन की एक बड़ी सफलता यह है कि महिलाएं चार दीवारी से बाहर निकलकर मुख्यधारा में आ गयी हैं"

"किसान आंदोलन की एक बड़ी सफलता यह है कि महिलाएं चार दीवारी से बाहर निकलकर मुख्यधारा में आ गयी हैं"

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published Published on Mar 12, 2021   modified Modified on Mar 12, 2021

-गांव कनेक्शन,

परमजीत कौर (60 वर्ष ) को चक सड़ोके गाँव, फाज़िलका से टिकरी बॉर्डर आये हुए दस दिन हो गए हैं। किसान आंदोलन में शामिल होने के पहले परमजीत 12 साल पहले केवल एक दिन के लिए पंजाब से दिल्ली आई थीं। जिसके बाद अब वे ख़ास महिला दिवस मनाने पहुंची थीं। "बारह साल पहले एक दिन के लिए दिल्ली स्थित बंगला साहिब मत्था टेकने आये थे। आज इतने सालों बाद अपना हक़ मांगने दिल्ली का दरवाज़ा खटखटाया है," परमजीत कहती हैं। 26 नवंबर 2020 से दिल्ली की सीमाओं पर चले रहे किसान आंदोलन में बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल हैं। इनमें कई अपने परिवार के साथ आईं हैं तो कुछ का परिवार गांव में ही है। इन में वे हजारों महिलाएं भी शामिल हैं जो अपने घर के पुरुषों के आंदोलन में शामिल होने के बाद खेत का कामकाज संभाल रही थीं। पंजाब के फाज़िलका से आईं बलवीर कौर (70 वर्ष) के मुताबिक किसान आंदोलन ने गांव की महिलाओं के पैरों में पड़ी रह गईं कुछ अदृष्य बेड़ियों को भी तोड़ दिया है। वे कहती हैं, "गांव में हमें ज़्यादा घूमने-फिरने की आज़ादी नहीं है। यहां तक की शादी के बाद में अपने पति के साथ कभी घूमने नहीं गई। लेकिन आज अपने साथ इतनी सारी महिलाओं को देखकर ख़ुशी हो रही है।"

आंदोलन में महिलाओं की भागीदारी के बारे में परमजीत कौर का मानना है कि ये बदलाव का पहला चरण है। यहां से महिलाओं को और आगे जाना है, "किसान आंदोलन ने महिलाओं को घर से बाहर निकाला ज़रूर है लेकिन अभी महिलाओं को और संघर्ष करना है। हालांकि जिस संख्या में महिलाएं इस आंदोलन का हिस्सा बनी हैं उस से ये अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि समाज में बदलाव आ रहा है। महिलाओं को अपने अधिकारों की समझ आ रही है," परमजीत कहती हैं। परमजीत कई साल पहले अपने पति से अलग हो गईं थीं। इस दौरान उन्होंने तमाम मुश्किलें झेलीं, लेकिन हार नहीं मानी।

पूरा लेख पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें. 


शिवांगी सक्सेना, https://www.gaonconnection.com/desh/one-of-the-major-successes-of-the-farmers-protest-is-that-women-are-ahead-in-it-48856


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