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न्यूज क्लिपिंग्स् | देश भर के डॉक्टरों के प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होने की वजह क्या है

देश भर के डॉक्टरों के प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होने की वजह क्या है

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published Published on Dec 30, 2021   modified Modified on Jan 2, 2022

-द वायर,

भारत में कोरोना वायरस के ओमीक्रॉन वैरिएंट का खतरा तेजी से बढ़ता जा रहा है, लेकिन इन सब के बीच देश के हजारों सरकारी डॉक्टर्स अस्पताल बंद कर विरोध प्रदर्शन करने के लिए मजबूर हैं.

उनकी मांग है कि राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा-पोस्टग्रैजुएट (नीट-पीजी) पास किए 50,000 एमबीबीएस डॉक्टरों की तत्काल काउंसलिंग कराई जाए.

नीट-पीजी की परीक्षा इस साल सितंबर में हुई थी. काउंसलिंग के बाद इन डॉक्टर्स को मेडिकल कॉलेजों में आगे की पढ़ाई और इलाज करने के लिए दाखिला मिलता है.

नीट-पीजी नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) द्वारा कराया जाता है, जो केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग के अधीन आता है. यह देश में सभी मेडिकल प्रवेश परीक्षा आयोजित करता है.

देश के डॉक्टर्स इसलिए तत्काल काउंसलिंग की मांग कर रहे हैं, क्योंकि नये डॉक्टरों की भर्ती से उन पर मरीजों का बोझ घटेगा और महामारी की आगामी आशांका को लेकर खुद को सुचारू रूप से तैयार कर सकेंगे.

पोस्टग्रैजुएट परीक्षा पास करने के बाद युवा डॉक्टर्स तीन साल की अवधि के लिए जूनियर रेजिडेंट के रूप में काम करते हैं. इस दौरान मुख्य रूप से उनकी ट्रेनिंग कराई जाती है, जहां वे इमरजेंसी विभाग में मरीजों का इलाज करते हैं और अन्य महत्वपूर्ण कार्यों में योगदान देते हैं.

चूंकि जूनियर रेजिडेंट के पद पर नियुक्ति रोक दी गई है, इसलिए भारत के अस्पतालों में कम से कम 50,000 डॉक्टरों की कमी हो गई है, जिसके कारण कोरोना महामारी की गंभीरता और बढ़ने पर स्थिति अत्यधिक भयावह हो सकती है.

आमतौर पर नीट-पीजी परीक्षा हर साल जनवरी में कराई जाती थी, लेकिन इस साल महामारी के चलते इसे सितंबर तक टाल दिया गया था. अब चूंकि पहले परीक्षा जनवरी में होती थी, तो काउंसलिंग मार्च तक हो जाती थी. लेकिन इस साल सरकार ने कहा था कि देरी के चलते यह नवंबर में होगी. अब दिसंबर भी बीत गया है और काउंसलिंग नहीं हो पाई है, जिसके चलते डॉक्टरों में काफी रोष है.

नीट-पीजी उत्तीर्ण छात्रों की काउंसलिंग में देरी की एक बड़ी वजह केंद्र सरकार द्वारा आर्थिक पिछड़ा वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के लिए 10 फीसदी आरक्षण लागू करने की घोषणा भी है. ईडब्ल्यूएस कोटा कानून जनवरी 2019 में संसद से पारित हुआ था.

इस कोटा के तहत पात्र होने के लिए सामान्य श्रेणी से आने वाले व्यक्ति की पारिवारिक आय आठ लाख रुपये सालाना से अधिक नहीं होनी चाहिए. इस कानून के कई प्रावधानों को मनमाना और असंवैधानिक बताते हुए कई लोगों ने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है.

कोर्ट ने कई सुनवाई के बाद इस मामले को संविधान पीठ के पास भेज दिया है, जहां यह मामला लंबित है.

इस बीच जुलाई, 2021 में एनटीए ने एक नोटिस जारी कर कहा है कि सरकार 2021-22 सत्र से ईडब्ल्यूएस कोटा लागू करने जा रही है. जबकि इस कानून पर अभी सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला नहीं आया है.

इस घोषणा के चलते कुछ वर्गों में रोष उत्पन्न हुआ, जिसके बाद एक नीट-पीजी अभ्यार्थी एनटीए के इस नोटिफिकेशन को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी.

पूरी रपट पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें. 


बनजोत कौर, http://thewirehindi.com/198747/why-doctors-are-protesting-outside-the-union-home-ministry/


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