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न्यूज क्लिपिंग्स् | इंफ्रा-मुखी लुभावना बजट-- प्रमोद जोशी

इंफ्रा-मुखी लुभावना बजट-- प्रमोद जोशी

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published Published on Feb 3, 2017   modified Modified on Feb 3, 2017
भारत का बजट लोक-लुभावन राजनीति, राजकोषीय अनुशासन और अर्थशास्त्रीय नियमों की रोचक चटनी होता है. इसकी बारीकियां केवल वित्त मंत्री का भाषण सुननेभर से समझ में नहीं आतीं. अलबत्ता पहली नजर में सार्वजनिक प्रतिक्रिया समझ में आ जाती है. इस लिहाज से इस बार का बजट काफी बड़े वर्ग को खुश करेगा. इसमें सामाजिक क्षेत्र का ख्याल है, ग्रामीण क्षेत्र की फिक्र है, साथ ही छोटे करदाता की परेशानियों को कम करने का इरादा भी. शेयर बाजार भी खुश है. 

सरकार ने करीब चार लाख करोड़ रुपये के जिस भारी इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश की घोषणा की है, उसके बेहतर परिणाम अगले साल दिखाई पड़ेंगे. इस निवेश के कारण राजकोषीय घाटे के मसले खड़े होंगे, पर अर्थव्यवस्था की गति बनाये रखने के लिए इसकी जरूरत थी. वित्त मंत्री ने कहा कि निजी क्षेत्र के सुस्त निवेश और धीमी वैश्विक वृद्धि दर के कारण सार्वजनिक व्यय की जरूरत महसूस हुई. राजकोषीय घाटा जीडीपी का 3.2 फीसदी है. आनेवाले वर्षों में इसे 3 फीसदी करने का लक्ष्य है.


बजट मूलतः आर्थिक सुधारों और ग्रामीण विकास पर केंद्रित है. विदेशी पूंजी निवेश को बढ़ाने की जरूरत है. इंफ्रास्ट्रक्चर पर पूंजी निवेश विकास की गाड़ी को देश के सुदूर इलाकों तक ले जायेगा. सरकार ने इस बजट में फॉरेन इन्वेस्टमेंट प्रमोशन बोर्ड को खत्म करने की घोषणा करके विदेशी निवेशकों को संदेश दिया है कि लालफीताशाही का घेरा हटाया जा रहा है. भारत दुनिया की छठी सबसे बड़ी मैन्युफैक्चरिंग इकोनॉमी के रूप में सामने है.


नोटबंदी ने लोगों की परेशानियां बढ़ायीं, और कुछ बातों पर से पर्दा भी हटाया. मध्यवर्ग का बड़ा हिस्सा गैर-जिम्मेवार है. वह लाखों की कार खरीदता है, विदेश यात्राएं करता है, पर टैक्स देने से बचता है. ईमानदारी से टैक्स देनेवाला पिसता है. आयकर रिटर्न को देखते हुए सालाना पांच लाख रुपये से ज्यादा आय पानेवाले व्यक्तियों को संख्या केवल 76 लाख है, जिनमें से 56 लाख लोग वेतनभोगी हैं, जो टैक्स से बच नहीं सकते. नोटबंदी के बाद राहत के रूप में वित्त मंत्री ने सबसे निचले स्तर पर आयकर को 10 फीसदी से घटा कर 5 फीसदी किया है. इससे निम्न मध्यवर्ग को राहत मिलेगी और वे लोग टैक्स दायरे में आयेंगे, जो अभी इससे बाहर हैं.


बड़ी मछलियों के लिए बैंकों में जमा नकदी की मदद ली जायेगी. काफी लोग टैक्स के दायरे में आयेंगे. सरकार ने तीन लाख से ऊपर के नकद लेन-देन को पूरी तरह रोकने की घोषणा की है. इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और इसके समांतर बढ़ती डिजिटल इकोनॉमी को सहारा मिलेगा. दोनों बातें एक-दूसरे की पूरक हैं.


सरकार ने राजनीतिक चंदे को पारदर्शी बनाने की सलाह को सुना है. अभी तक 20,000 रुपये तक के चंदे का विवरण आयकर विभाग को नहीं देना पड़ता था. यानी राजनीतिक दलों को पिछले रास्ते से बेनामी चंदा मिलता था. हाल में चुनाव आयोग ने सलाह दी थी कि इसे 2,000 रुपये कर दिया जाये. हालांकि, यह समस्या का समाधान नहीं है. पिछले रास्ते को छोटा करने की कोशिशभर है. पर, महत्वपूर्ण बात है कि सरकार ने इसके महत्व को समझा. सरकार ने आर्थिक नियमों का उल्लंघन करनेवालों के लिए नया कानून लाने की घोषणा भी बजट में की है.

 

कंपनी कर में कोई छूट नहीं दी गयी है. अलबत्ता लघु और मध्यम उद्योगों को पांच फीसदी की राहत देकर एक ऐसे क्षेत्र को बढ़ावा देने की कोशिश की है, जो आनेवाले वक्त में अर्थव्यवस्था को गति देने में मददगार होगा. रोजगार बढ़ाने में इन उद्योगों की बड़ी भूमिका है. उत्पाद कर और दूसरे अप्रत्यक्ष करों के बारे में सरकार ने कोई घोषणा नहीं की है, क्योंकि जीएसटी लागू होने जा रहा है. उसमें सारे अप्रत्यक्ष कर आयेंगे.


पूंजीगत व्यय में 25.4 फीसदी की भारी वृद्धि करके सरकार ने बड़े स्तर पर निर्माण कार्यों में सरकारी निवेश का रास्ता खोला है. इंफ्रास्ट्रक्चर पर 3,96,135 करोड़ रुपये का आवंटन बहुत बड़ा फैसला है.


देश में इतने बड़े स्तर पर निर्माण पर निवेश पहले कभी नहीं हुआ. इस निवेश के व्यावहारिक अर्थ को समझने की कोशिश करनी चाहिए. सड़कों, पुलों, भवनों, बिजली की लाइनों और रेल लाइनों के निर्माण से विकास की गाड़ी तेज होगी.

 

 


आधार संरचना का काफी बड़ा हिस्सा राष्ट्रीय राजमार्गों के रूप में है, जिसके लिए 64,000 करोड़ रखे गये हैं. वहीं 3900 किलोमीटर लंबी नयी रेल लाइनें बनाने का लक्ष्य भी है. पीपीपी मॉडल के तहत छोटे शहरों में एयरपोर्ट बनाये जायेंगे.

 

 


प्रधानमंत्री कौशल केंद्रों को मौजूदा 60 जिलों से बढ़ा कर देशभर के 600 जिलों में फैलाने की घोषणा भी महत्वाकांक्षी है. देशभर में 100 भारतीय अंतरराष्ट्रीय कौशल केंद्र स्थापित होंगे. इनमें उन्नत प्रशिक्षण तथा विदेशी भाषा के पाठ्यक्रम संचालित किए जायेंगे. इससे विदेशों में रोजगार की संभावना तलाश रहे युवाओं को लाभ होगा. रोजगार का मतलब सरकारी नौकरियां ही नहीं हैं, अपने रोजगार खड़े करना भी है.

 

 


बजट के एक दिन पहले पेश की गयी आर्थिक समीक्षा ने बताया था कि इस साल खेती में 4.1 प्रतिशत की दर से संवृद्धि की उम्मीद है. इसके पीछे बेहतर मॉनसून का हाथ भी है.

 

 


फसल का रकबा भी बढ़ने की सूचनाएं हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में गतिविधियां बढ़ रही हैं. हालात ठीक रहे, तो अगले साल खेती की विकास दर छह फीसदी होगी. कुछ साल पहले हमारी कृषि विकास दर गिरते-गिरते शून्य तक पहुंचने जा रही थी. सरकार की घोषणा है कि सन 2022 तक हम देश के किसानों की आय दोगुनी करेंगे.

 

 


मनरेगा में अब तक का सबसे बड़ी रकम 48,000 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गयी है. मनरेगा का इस्तेमाल ग्रामीण क्षेत्रों में आधार संरचना को खड़ा करने में भी किया जा रहा है. इस साल इसके अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में पांच लाख तालाब तैयार किये गये. अगले साल भी इतने ही तालाब बनाने की योजना है.

 

 


ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर का दूसरा महत्वपूर्ण कार्यक्रम है प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना, जिसके लिए 19,000 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गयी है. इसमें राज्यों की धनराशि को भी जोड़ दें, तो पूरी धनराशि 27,000 करोड़ रुपये होती है. सरकार ने मार्च 2018 तक हरेक गांव में बिजली पहुंचाने और 50,000 गांवों को गरीबी से पूरी तरह मुक्त करने की घोषणा भी की है.

 


http://www.prabhatkhabar.com/news/columns/story/935697.html


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