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न्यूज क्लिपिंग्स् | पत्थलगड़ी : यूसुफ पूर्ति ने कहा- वर्जित क्षेत्र में घुस कर सीएम व प्रशासन कर रहे तानाशाही

पत्थलगड़ी : यूसुफ पूर्ति ने कहा- वर्जित क्षेत्र में घुस कर सीएम व प्रशासन कर रहे तानाशाही

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published Published on Mar 10, 2018   modified Modified on Mar 10, 2018
खूंटी : खूंटी के भंडरा में पत्थलगड़ी के एक वर्ष पूरे होने पर शुक्रवार को स्थानीय बाजारटांड़ में सभा का आयोजन किया गया. इसमें वक्ताओं ने ग्राम सभा को सशक्त करने, पांचवीं अनुसूची क्षेत्र में रुढ़िवादी परंपरा से शासन व्यवस्था संभालने की बात कही. आदिवासियों से एकजुट होने की अपील की. सभा के दौरान वीर बिरसा मुंडा के जयकारे लगाये गये. सभा स्थल के चारों तरफ तीर-धनुष से लैस युवक तैनात थे.

हालांकि वे किसी के आने-जाने पर रोक-टोक नहीं कर रहे थे. सभा में करीब ढाई हजार से अधिक लोग मौजूद थे. भंडरा व आसपास के अलावा दूसरे जिले से भी आदिवासी समुदाय के लोग पहुंचे थे. इस मौके पर आदिवासी महासभा के यूसुफ पूर्ति ने कहा कि पारंपरिक पत्थलगड़ी हम आदिवासियों की परंपरा है. इसमें हम संवैधानिक अधिकारों को अंकित कर रहे हैं. इसे गलत बता कर हमें देश विरोधी बताया जा रहा है.

पत्रकारों से बात करते हुए यूसुफ पूर्ति ने कहा : किसी भी सरकार को सरकार कहलाने के लिए भूू-भाग की आवश्यकता होती है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि भारत में केंद्र सरकार और राज्य सरकार की एक इंच जमीन नहीं है. बिना भू-भाग के ये सरकार कैसे बन गयी हैं. वर्जित क्षेत्र में घुस कर सीएम और जिला प्रशासन तानाशाही कर रहे हैं.

वर्जित क्षेत्र में गैर आदिवासियों का मौलिक अधिकार लागू नहीं है. डीसी और एसपी कह रहे हैं कि संविधान की गलत व्याख्या की गयी है. ऐसा कहीं नहीं है. वे सामान्य कानून को हम पर थोपने का काम कर रहे हैं. जिला प्रशासन को भी वर्जित क्षेत्र में काम करने के लिए गवर्नर लोक अधिसूचना जारी करते हैं, जो आज तक जारी नहीं की गयी है.

इसलिए जिला प्रशासन अवैध है. गवर्नर जिस दिन अधिसूचना जारी करेंगे, तब जिला प्रशासन वैध हो जायेगा. अवैध जिला प्रशासन की ओर से चुनाव होते हैं.

विजेता को अवैध डीसी की ओर से सर्टिफिकेट दिया जाता है. इसलिए एमपी-एमएलए भी अवैध हैं. अवैध लोगों द्वारा बनाया गया कानून पांचवीं अनुसूचित क्षेत्रों मेंं लागू नहीं होता है.

आजादी का मतलब स्वशासन : यूसुफ पूर्ति ने कहा : भारत देश आजाद नहीं हुआ है. 15 अगस्त 1947 को ट्रांसफर ऑफ पावर हुआ था. आजादी का मतलब स्वशासन होता है, जो हम आदिवासियों को नहीं मिला है.

यह वर्जित क्षेत्र है. भारत के संविधान में इसे पांचवीं अनुसूचित क्षेत्र के रूप में बताया गया है. इसी के तहत गांव में स्वशासन व्यवस्था चलायी जा रही है. ओआइजीएस ग्राम सभा को राष्ट्र विरोधी की संज्ञा दे रहे हैं. हम आदिवासी राष्ट्र विरोधी नहीं हैं, न ही संविधान की गलत व्याख्या कर रहे हैं. हम आदिम आदिवासी भारत सरकार हैं.

सारे दस्तावेज आदिवासियों के पास : उन्होंने कहा : सारे दस्तावेज आदिवासियों के पास हैं. आदिवासियों के पक्ष में हैं. आदिवासी जाग चुके हैं. ग्राम सभा सभी नियम कानून बना सकती है और अनुपालन नहीं करने पर सजा भी दे सकती है. आदिवासियों पर केस करने के लिए हिज मजिस्ट्रेट यानी ब्रिटेन प्रिवी काउंसिल मतलब ब्रिटेन के पार्लियामेंट से परमिशन लेना होता है. यह भारत सरकार का रूलिंग कहता है.
वे सुप्रीम कोर्ट चले जायें, हम बहस करने को तैयार हैं. सीएनटी एक्ट, संविधान, विलकिंसन रूल या किसी भी कानून में संशोधन करने के लिए भारत सरकार के रूलिंग में ओआइजीएस को अधिकार नहीं है. किसी भी नियम कानून को संशोधन करने के लिए केंद्र सरकार, राष्ट्रपति, सुप्रीम कोर्ट को प्रिवी काउंसिल ब्रिटेन से अनुमति लेनी होतीहै.

क्या-क्या कहा

गवर्नर जिस दिन अधिसूचना जारी करेंगे तब से जिला प्रशासन वैध होगा
भारत आजाद नहीं हुआ है, 15 अगस्त 1947 को ट्रांसफर ऑफ पावर हुआ था
ग्राम सभा सभी नियम कानून बना सकती है और अनुपालन नहीं करने पर सजा भी दे सकती है
हम आदिम आदिवासी भारत सरकार हैं

चुनाव में हम क्यों शामिल हों

यूसुफ पूर्ति ने कहा : यह देश बड़े देश के अंदर उपनिवेशवाद के अधीन चल रहा है. वर्जित क्षेत्र में चुनाव को लेकर लोक अधिसूचना लागू नहीं है. लोक अधिसूचना जारी होती है, तो हम शामिल हो जायेंगे.

जब तक अधिसूचना नहीं हुई है, तब तक हम चुनाव में क्यों शामिल हों. ग्राम सभा द्वारा शिक्षा व्यवस्था चलाने के सवाल पर उन्होंने कहा : जब तक नन ज्यूडिशनल आरक्षण गवर्नर द्वारा जारी नहीं किया जाता, हम अपने बच्चों को ज्यूडिशनल स्कूल-कॉलेज में नहीं भेजेंगे. उन्होंने एक धर्म विशेष के धर्म ग्रंथ व पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू को लेकर भी विवादित टिप्पणी की़. कार्यक्रम में बिरसा ओड़ेया, बलराम समद, जोन जुनास तिड़ू, पौलूस टूटी, मुक्ता होरो, पुष्पा बाजराय, सुशील जमुदा सहित कई गांव के ग्राम प्रधान उपस्थित थे़

ग्राम विकास समिति का किया विरोध

बुढ़मू : बुढ़मू प्रमुख सुमन देवी के नेतृत्व में प्रखंड के निर्वाचित त्रिस्तरीय पंचायत प्रतिनिधियों ने शुक्रवार को बुढ़मू चौक पर सीएम का पुतला दहन किया. उनका कहना था कि पंचायत प्रतिनिधियों को सरकार संवैधानिक अधिकार नहीं दे पा रही है. सरकार ग्राम विकास समिति बना कर पंचायत प्रतिनिधियों को गौण करने का कार्य कर रही है. इसका हम विरोध करते हैं. हम प्रण लेते हैं कि किसी भी सूरत में ग्राम विकास समिति नहीं बनाने देंगे.

सरकार के हर कार्यक्रम का विरोध करेंगे. लोकसभा व विधानसभा चुनाव में भाजपा के विरुद्ध मतदान करेंगे. जिप उपाध्यक्ष पार्वती देवी ने कहा : पंचायत प्रतिनिधियों के साथ भाजपा सरकार सौतेला व्यवहार कर रही है. हम इसे कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे. यदि समय रहते सरकार की ओर से पहल नहीं की गयी, तो पूरे राज्य में उग्र आंदोलन करेंगे.

https://www.prabhatkhabar.com/news/ranchi/jharkhand-barred-area-infiltration-cm-administration-dictatorship-non-tribals-fundamental-rights-not-applicable/1131703.html


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