Deprecated (16384): The ArrayAccess methods will be removed in 4.0.0.Use getParam(), getData() and getQuery() instead. - /home/brlfuser/public_html/src/Controller/ArtileDetailController.php, line: 150
 You can disable deprecation warnings by setting `Error.errorLevel` to `E_ALL & ~E_USER_DEPRECATED` in your config/app.php. [CORE/src/Core/functions.php, line 311]
Deprecated (16384): The ArrayAccess methods will be removed in 4.0.0.Use getParam(), getData() and getQuery() instead. - /home/brlfuser/public_html/src/Controller/ArtileDetailController.php, line: 151
 You can disable deprecation warnings by setting `Error.errorLevel` to `E_ALL & ~E_USER_DEPRECATED` in your config/app.php. [CORE/src/Core/functions.php, line 311]
Warning (512): Unable to emit headers. Headers sent in file=/home/brlfuser/public_html/vendor/cakephp/cakephp/src/Error/Debugger.php line=853 [CORE/src/Http/ResponseEmitter.php, line 48]
Warning (2): Cannot modify header information - headers already sent by (output started at /home/brlfuser/public_html/vendor/cakephp/cakephp/src/Error/Debugger.php:853) [CORE/src/Http/ResponseEmitter.php, line 148]
Warning (2): Cannot modify header information - headers already sent by (output started at /home/brlfuser/public_html/vendor/cakephp/cakephp/src/Error/Debugger.php:853) [CORE/src/Http/ResponseEmitter.php, line 181]
न्यूज क्लिपिंग्स् | फायदे और नुकसान का गोरखधंधा-- आशुतोष चतुर्वेदी

फायदे और नुकसान का गोरखधंधा-- आशुतोष चतुर्वेदी

Share this article Share this article
published Published on Sep 17, 2018   modified Modified on Sep 17, 2018
हम भारतीयों की एक दिक्कत है कि हम अपने सदियों पुराने ज्ञान पर भरोसा करने के बजाय पश्चिम के लोगों की बातों पर अधिक यकीन करते हैं. पश्चिम ने फसलों का उत्पादन बढ़ाने के लिए रासायनिक उर्वरकों का इस्तेमाल शुरू किया, तो हमने अपनी जैविक खाद का तिरस्कार कर उसे अपना लिया. जल्द ही पश्चिमी देशों को रासायनिक उर्वरकों के इस्तेमाल से सेहत पर खतरा नजर आने लगा. इनके अंधाधुंध इस्तेमाल से कैंसर के मामले बढ़ गये और उन्होंने जैविक खाद का इस्तेमाल शुरू कर दिया.

उन्होंने अब इससे तैयार उत्पादों को नाम दिया ऑर्गेनिक उत्पाद. उसके बाद हमें भी समझ आया कि हमारी खाद ही ठीक थी और हमने लौट के बुद्धू की तरह वापस जैविक खाद को अपनाना शुरू कर दिया है, लेकिन इस दौरान पंजाब में रासायनिक उर्वरकों का अंधाधुध इस्तेमाल हुआ और वहां कई इलाके हैं, जहां जल स्रोतों तक यह जहर जा पहुंचा है और कैंसर के मामले बढ़ गये हैं.

इसी तरह कुछ समय पहले पश्चिम ने कहा कि दूध, मक्खन और पनीर सेहत के लिए नुकसानदेह हैं और इनसे हृदय रोग का खतरा बढ़ जाता है. पश्चिमी शोध ने यह धारणा बना दी थी कि दुग्ध उत्पाद सेहत के लिए ठीक नहीं होते.

हम लोगों ने तत्काल मान लिया और दूध, दही, मक्खन और पनीर का सेवन या तो कम कर दिया या फिर एकदम छोड़ दिया. हम भी वसा निकालकर दूध बेचने लगे. पिछले हफ्ते अमेरिकी वैज्ञानिकों ने दावा किया कि दूध से बने उत्पाद जैसे पनीर, मक्खन या फिर पूर्ण वसा वाले दूध के सेवन से हृदय रोग का जोखिम नहीं है.

इस अध्ययन में दूध या दूध से बने उत्पादों और दिल की बीमारी से होने वाली मौत के बीच कोई संबंध नहीं पाया गया. अध्ययन में पाया गया कि इसके उलट डेयरी उत्पाद में मौजूद वसा गंभीर हृदय आघात से सुरक्षा मुहैया कराती है. अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास के प्रोफेसर मार्सिया ओटो ने कहा कि उनका शोध इस बात की पुष्टि करता है कि डेयरी फैट दिल की बीमारी के खतरे को नहीं बढ़ाता है.

उनका यह अध्ययन अमेरिकन जर्नल ऑफ क्लिनिकल न्यूट्रीशन पत्रिका में प्रकाशित हुआ है. यह कोई एक दिन का अध्ययन नहीं है, बल्कि लगभग 22 साल शोधकर्ताओं ने डेयरी फैट में मौजूद फैटी एसिड का दिल की बीमारी को देखने के लिए अध्ययन किया. किसी भी फैटी एसिड का हृदय रोग से कोई संबंध नहीं पाया गया. अब विशेषज्ञों का कहना है कि डेयरी उत्पाद में मौजूद फैट गंभीर हृदय आघात से सुरक्षा मुहैया कराता है. इस शोध के बाद अब हमें भी अपनी धारणाओं पर पुनर्विचार करने की जरूरत है.

पिछले कुछ समय में भ्रामक और फर्जी दावों के कई मामले सामने आये हैं. कुछ समय पहले विटामिन-डी की कमी की भरपाई के लिए दवा प्रोमोट करने का घोटाला सामने आया. न्यूयॉर्क टाइम्स में छपी जांच रिपोर्ट में बताया गया है कि अमेरिकी दवा निर्माता कंपनियों ने विटामिन-डी को प्रोमोट करने के लिए एक शोधकर्ता डॉक्टर को करोड़ों रुपये का भुगतान किया था. डॉक्टर ने इसकी लोगों में भारी कमी को रेखांकित करते हुए शोध रिपोर्ट पेश की. इसके बाद दुनियाभर में विटामिन-डी की खपत बढ़ गयी और दवा कंपनियों को करोड़ों रुपये का मुनाफा कमाने का मौका मिल गया.

देखा जाए, तो पश्चिम के वैज्ञानिक शगूफे छोड़ने में माहिर हैं. हम सब जानते हैं कि सदियों से दक्षिण भारत में नारियल का तेल खूब इस्तेमाल होता है.

उनका अधिकतर खाना इसी तेल में तैयार होता है. स्वास्थ्य के लिए भी यह बेहद अच्छा बताया जाता है, लेकिन हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में टीएच चैन स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के प्रोफेसर कैरिन मिशेल्स ने नारियल तेल को जहर करार दे दिया है. उनका कहना है कि खाने में इस्तेमाल होने वाली सबसे बुरी वस्तुओं में से एक नारियल का तेल है.

इस तेल में सेचुरेटेड फैट की मात्रा बहुत अधिक होती है और यह हमारी धमनियों में खून का प्रवाह रोक सकती है. प्रोफेसर कैरिन कहते हैं कि नारियल तेल में 80 प्रतिशत से अधिक सेचुरेटेड फैट होता है. इसके बाद नारियल के तेल के फायदे और नुकसान को लेकर देश और दुनिया में ब‍हस छिड़ गयी है. दक्षिण भारत के लोगों में इस शोध पर खासी प्रतिक्रिया हुई है. सोशल मीडिया पर तो इसको लेकर शोधकर्ता की काफी लानत मलानत की गयी.

दक्षिण भारतीयों का दावा है कि वे लोग वर्षों से इसका इस्तेमाल कर रहे हैं और उनकी सेहत पर इसका कोई नुकसान नहीं हुआ है. कई लोगों ने कहा है कि उनके दादा-दादी सौ साल तक जीवित रहे और वह जीवनभर इस कथित जहर का ही प्रयोग करते रहे, मगर उन्हें कभी कुछ नहीं हुआ.

अभी तक धारणा रही है कि नारियल के तेल में सेचुरेटेड फैट की काफी कम मात्रा होती है, जो स्वास्थ्य के लिए लाभप्रद है. तलने में भी नारियल तेल अच्छा माना जाता है. पीढ़ी दर पीढ़ी विरासत में मिली वाली जानकारी के अनुसार, नारियल तेल शरीर में आसानी से नहीं जमता, जितना कि अन्य तेल शरीर में ठहरते हैं. लोग तो इसका इस्तेमाल वजन कम करने तक के लिए करते हैं. इसके पक्ष में वैज्ञानिक तर्क भी सामने हैं.

केरल में इसका सर्वाधिक इस्तेमाल होता है और केरल में लोगों की औसत आयु दर देश के अन्य राज्यों की तुलना में कहीं अधिक हैं. भारत में ही नहीं, कई अन्‍य देशों के लोगों ने भी प्रोफेसर के इस दावे को गलत बताया है. भारत की तरह फिलीपींस और थाइलैंड में भी सदियों से इस तेल का इस्तेमाल होता आया है.

अगर यह तेल वाकई जहर होता, तो दक्षिण भारत और इन देशों के लोगों को तो जीवित ही नहीं बचना चाहिए था. यहां तो खाने का लगभग हर सामान नारियल के तेल में तैयार किया जाता है. हमारी दादी-नानी बताती आयीं हैं कि नारियल का तेल गुणों से भरा है. यह त्वचा और बालों को स्वस्थ बनाये रखने में बेहद मददगार है. इसकी बैक्टीरिया और फंगस के खिलाफ की खासियत इसे बाकी तेलों से खास बनाती है.

नारियल के तेल में फैटी एसिड के साथ ही विटामिन-ई भी होता है, जो इसे त्वचा के लिए बेहद उपयोगी बनाना है. इस तेल से रूखी त्वचा भी मुलायम बन जाती है. दरअसल, खाद्य तेलों को लेकर पश्चिमी वैज्ञानिकों ने भ्रम का माहौल बना दिया है. अगर आप बाजार जाएं, तो आप दर्जनों तरह के तेल दुकानों में सजे पायेंगे और हरेक का दावा होगा कि उनका तेल दिल के लिए औरों से बेहतर है. पश्चिम के देश अपने यहां इस्तेमाल किये जाने वाले ऑलिव ऑयल पर फिदा हैं और हम उनसे बहुत जल्द प्रभावित भी हो जाते हैं.

सरसों का तेल हमारे किचन में सदियों से इस्तेमाल होता आया है और गुणों से भरा हुआ है, लेकिन मध्य और उच्च वर्ग में इसे हेय दृष्टि देखा जाने लगा है. लब्बोलुआब यह कि आप किसी झांसे में न आएं. जो ज्ञान हमें पीढ़ी दर पीढ़ी विरासत में मिला हैं, उस पर गौर करें.


https://www.prabhatkhabar.com/news/columns/story/1205984.html


Related Articles

 

Write Comments

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

Video Archives

Archives

share on Facebook
Twitter
RSS
Feedback
Read Later

Contact Form

Please enter security code
      Close